युवाओं में तेजी से बढ़ रहे हृदय रोग: चिंता का विषय
मुख्य बिंदु:
- बदलता ट्रेंड: जो हृदय संबंधी समस्याएं पहले 40 से 50 वर्ष की उम्र में देखने को मिलती थीं, वे अब युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रही हैं।
- मामलों में भारी उछाल: शिमला के कार्डियोलॉजी विशेषज्ञों के अनुसार, लगभग 15 साल पहले युवावस्था में हार्ट अटैक या हृदय रोग का केवल एक मामला महीने में आता था, लेकिन अब यह आंकड़ा बढ़कर सप्ताह में 3 से 4 मामलों तक पहुंच गया है।
प्रमुख जोखिम कारक (क्यों बढ़ रहा है खतरा?):
- खराब खान-पान: जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक्स और पैक्ड फूड का अत्यधिक सेवन।
- बिगड़ती जीवनशैली: शारीरिक गतिविधियों में भारी कमी और बढ़ता हुआ मोटापा।
- स्वास्थ्य समस्याएं: शरीर में बढ़ता हुआ कोलेस्ट्रॉल स्तर।
- नशे की लत: युवाओं में नशे की बढ़ती आदतें इस खतरे को और तेजी से बढ़ावा दे रही हैं।
विशेष सलाह: विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते खान-पान में सुधार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली को अपनाया नहीं गया, तो यह स्थिति भविष्य में और भी गंभीर रूप ले सकती है।
कम उम्र में दिल का कमजोर होना: युवाओं के लिए एक गंभीर चेतावनी
मुख्य बिंदु:
- बदलता दौर और बढ़ता खतरा: गलत खानपान और बिगड़ी जीवनशैली के कारण अब 20 से 30 वर्ष की कम उम्र के युवाओं में भी हृदय रोग का जोखिम तेजी से बढ़ रहा है।
- चिंताजनक आंकड़े: करीब 15 साल पहले युवावस्था में हृदय रोग का सिर्फ एक मामला महीने में आता था, लेकिन अब शिमला जैसे क्षेत्रों की कार्डियोलॉजी ओपीडी में हर सप्ताह 3 से 4 युवा मरीज दिल से जुड़ी समस्याएं लेकर पहुंच रहे हैं।
मुख्य वजहें:
- गलत खानपान: जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक्स और पैक्ड फूड का लगातार और अत्यधिक सेवन।
- अस्वास्थ्यकर जीवनशैली: शारीरिक गतिविधियों में भारी कमी।
विशेष सलाह: भविष्य की बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से बचने के लिए युवाओं को समय रहते अपने खानपान और जीवनशैली में सुधार करने की सख्त जरूरत है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हृदय रोग अचानक पैदा नहीं होते। कई मामलों में इसकी नींव बचपन और किशोरावस्था में ही पड़ने लगती है। बच्चों की खाने की आदतें, शारीरिक गतिविधियां और जीवनशैली आगे चलकर उनके स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं।
पहाड़ों में भी बदल रहा खानपान
पहाड़ी क्षेत्रों में पहले लोगों की जीवनशैली अपेक्षाकृत सक्रिय मानी जाती थी। घर का पारंपरिक भोजन, शारीरिक मेहनत और सीमित मात्रा में जंक फूड का सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहतर माना जाता था। लेकिन अब आधुनिक जीवनशैली के साथ खानपान की आदतों में भी बदलाव आया है।
बच्चों और युवाओं में मोबाइल और इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के कारण खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों का समय भी कम हुआ है। कई स्थानों पर खेल मैदानों की कमी समस्या को और बढ़ा रही है। कम शारीरिक गतिविधि के कारण मोटापा और कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है, जो हृदय स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा करते हैं।
इसके साथ ही धूम्रपान, शराब और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन भी युवाओं के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर हृदय रोग के कई जोखिम कारकों को कम किया जा सकता है।
हार्ट अटैक के इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
सीने में अचानक तेज दर्द या भारीपन को सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके साथ अचानक अत्यधिक पसीना आना, चक्कर आना, बिना मेहनत के सांस फूलना या असामान्य रूप से बहुत ज्यादा थकान महसूस होना भी गंभीर संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर खुद इलाज करने या इंतजार करने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।
दिल को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
विशेषज्ञों के अनुसार संतुलित भोजन को जीवनशैली का हिस्सा बनाना चाहिए। नियमित शारीरिक गतिविधि और व्यायाम करना भी जरूरी है। धूम्रपान और शराब से दूरी बनाना, वजन और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना तथा तनाव कम करना हृदय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। रात में पर्याप्त नींद लेना भी जरूरी है। विशेषज्ञों ने युवाओं और बच्चों को कम उम्र से ही स्वस्थ खानपान तथा नियमित व्यायाम की आदत डालने की सलाह दी है।
डॉ. संजीव मरवाह, विशेषज्ञ, कार्डियोलॉजी विभाग, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना के अनुसार, बच्चों में जंक फूड और गलत खानपान के कारण हृदय रोग से जुड़े मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को जंक फूड से दूर रखने, घर का भोजन खाने के लिए प्रेरित करने, नियमित व्यायाम कराने और नशे से दूर रखने की अपील की है।
