6.30 लाख पड़े-पड़े खा रहे धूल, जमीन न मिलने से 14 साल से एक कमरे में कैद 21 बच्चों का बचपन
पांवटा साहिब (सिरमौर):
पैसा है, लेकिन मंशा नहीं! सिरमौर के भुंगरनी राजकीय प्राथमिक पाठशाला की बदहाली की कहानी कुछ ऐसी ही है। 14 साल से यह स्कूल अपनी खुद की छत को तरस रहा है। हद तो यह है कि भवन बनाने के लिए 6.30 लाख रुपये का बजट मंजूर हो चुका है, लेकिन जमीन का एक टुकड़ा न मिलने की वजह से निर्माण शुरू ही नहीं हो पाया।
एक कमरे का ‘सर्वगुण संपन्न’ स्कूल:
- 21 बच्चे एक छोटे से कमरे में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
- उसी एक कमरे में पाँचों कक्षाएँ एक साथ लगती हैं।
- वही कमरा हेडमास्टर का ऑफिस भी है, वही किचन (रसोई) है और वही स्टोर रूम भी।
ऑप्शन 2: सीधा और असरदार स्टाइल (डिजिटल न्यूज)
सिरमौर का यह कैसा स्कूल? 14 सालों से सोसायटी के एक कमरे में सिमटी 5 कक्षाएं और 21 मासूमों की पढ़ाई
विशेष रिपोर्ट | पांवटा साहिब
क्या एक कमरे में 5 अलग-अलग क्लास, ऑफिस और रसोई एक साथ चल सकते हैं? पांवटा साहिब की भुंगरनी प्राइमरी पाठशाला में 14 साल से यही खेल चल रहा है।
| मुख्य समस्या | वर्तमान स्थिति |
| स्कूल भवन | 14 साल से अपना भवन नहीं, सोसायटी के कमरे में चल रहा है |
| छात्र संख्या | 21 बच्चे |
| सरकारी बजट | ₹6.30 लाख (स्वीकृत, लेकिन अप्रयुक्त) |
| अड़चन | जमीन की अनुपलब्धता (Land Issue) |
ऑप्शन 3: संक्षेप / बुलेटिन स्टाइल (सोशल मीडिया के लिए)
सरकारी लापरवाही: 6.3 लाख का बजट पास, फिर भी 14 साल से बिना छत के चल रहा भुंगरनी का प्राइमरी स्कूल
- स्थान: भुंगरनी (पांवटा साहिब, सिरमौर)
- अव्यवस्था: सोसायटी के 1 छोटे से कमरे में 21 बच्चे, 5 कक्षाएं, ऑफिस, रसोई और स्टोर।
- मुद्दा: 6.30 लाख का फंड होने के बावजूद जमीन न मिलने से अटका निर्माण कार्य।
