हिमाचल: पांगी का जैविक सेब कश्मीरी और विदेशी सेब को देगा टक्कर, ‘पांगी सेब’ ब्रांड से अक्टूबर में होगी एंट्री

पांगी के प्राकृतिक सेब को मिलेगी नई पहचान: अक्टूबर में बाजार में उतरेंगे ‘पांगी सेब’ के 5,000 कार्टन

विशेष पहल: पांगी क्षेत्र के प्राकृतिक रूप से उत्पादित सेब को एक विशिष्ट ब्रांड पहचान देने की तैयारी शुरू कर दी गई है।

लॉन्च: अक्टूबर के पहले सप्ताह में लगभग 5,000 कार्टन ‘पांगी सेब’ के नाम से बाजार में उतारे जाएंगे।

सब्सिडी का लाभ: इसके लिए विशेष कार्टन तैयार किए जा चुके हैं, जिन्हें बागवानों को 50 फीसदी तक की सब्सिडी पर उपलब्ध कराने की योजना है।

खासियत: पांगी को प्राकृतिक खेती क्षेत्र घोषित किए जाने के कारण यहाँ के सेब को एक अलग और प्रीमियम पहचान दिलाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

पांगी का प्राकृतिक सेब अब ‘पांगी सेब’ ब्रांड के नाम से बिकेगा, अक्टूबर में आएंगे 5,000 कार्टन

चंबा के दुर्गम पांगी क्षेत्र में पैदा होने वाले प्राकृतिक सेब को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। पांगी उपमंडल को पूरी तरह प्राकृतिक खेती क्षेत्र घोषित किए जाने के कारण यहाँ रासायनिक खादों और कीटनाشकों का प्रयोग प्रतिबंधित है। 8,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर तैयार होने वाले इस सेब को विशेष ब्रांडिंग देने के लिए अक्टूबर के पहले सप्ताह में 5,000 कार्टन बाजार में उतारे जाएंगे। बागवानों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष रूप से छपे ये कार्टन 50% तक की सब्सिडी पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

पहले चरण में 5 हजार कार्टन

इस वर्ष शुरुआत सीमित स्तर पर की जा रही है। पहले चरण में करीब 5,000 कार्टन बाजार में भेजे जाएंगे। इसके बाद मांग और उत्पादन के आधार पर ब्रांड को आगे बढ़ाने की योजना है। बागवानों को विशेष कार्टन उपलब्ध करवाने के साथ सेब उत्पादन से जुड़ी आवश्यक सहायता और उपदान उपलब्ध करवाने की दिशा में भी तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू इन कार्टन को जल्द लॉन्च करेंगे।

अभी पांगी में सीमित है सेब उत्पादन

पांगी में सेब का उत्पादन फिलहाल सीमित है। पिछले कुछ वर्षों में यहां नए बगीचे विकसित किए गए हैं, लेकिन इनमें से कई अभी पूरी तरह फल उत्पादन की अवस्था में नहीं पहुंचे हैं। पुराने बगीचों में भी उत्पादन सीमित है। आने वाले वर्षों में पांगी में सेब का रकबा और उत्पादन बढ़ाने पर जोर देने की तैयारी है। प्राकृतिक उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए क्षेत्र के बागवानों के लिए ब्रांडिंग को बाजार से बेहतर जुड़ाव का माध्यम माना जा रहा है।

इस साल हिमाचल में सेब की आवक 40 से 50 फीसदी कम

प्रदेश की मंडियों में इस बार सेब की आवक पिछले वर्ष की तुलना में 40 से 50 फीसदी तक कम बताई गई है। प्रतिकूल मौसम का असर सेब उत्पादन पर पड़ा है। अब तक राज्य की मंडियों में करीब एक करोड़ कार्टन सेब पहुंच चुका है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा लगभग दोगुना था। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अभी सेब की तुड़ान जारी है, इसलिए अंतिम उत्पादन का आंकड़ा बाद में स्पष्ट होगा। हिमाचल प्रदेश में सेब का कुल रकबा करीब 1.16 लाख हेक्टेयर है। हालांकि इसमें पांगी का हिस्सा फिलहाल बहुत कम है।

किन्नौर के सेब जैसा स्वाद

पांगी क्षेत्र के सेब को स्वाद के लिहाज से किन्नौर के सेब जैसा बताया जाता है। ऐसे में प्राकृतिक तरीके से तैयार होने वाले इस सेब को अलग ब्रांड के तौर पर बाजार में पेश करने की कोशिश की जा रही है। ‘पांगी सेब’ की शुरुआत ऐसे समय में हो रही है जब मंडियों में कश्मीर के सेब के साथ विदेशी सेब की भी अच्छी मौजूदगी है। आने वाले वर्षों में उत्पादन बढ़ने के साथ पांगी के सेब को व्यापक बाजार तक पहुंचाने की दिशा में प्रयास किए जाने की उम्मीद है।

इस विषय से संबंधित:

Toggle Dark Mode