राज्य चयन आयोग और टीसीएस के बीच समझौता
मुख्य बातें:
- समझौता: राज्य चयन आयोग ने कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) के संचालन के लिए टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) से हाथ मिलाया है।
- अवधि: यह करार 3 साल के लिए तय किया गया है।
- विस्तार (Extension): टीसीएस के प्रदर्शन के संतोषजनक पाए जाने पर इस अनुबंध को 2 साल और बढ़ाया जा सकेगा।
नोट: इस साझेदारी का उद्देश्य राज्य में आयोजित होने वाली परीक्षाओं को पूरी तरह से पारदर्शी, डिजिटल और आधुनिक तकनीक पर आधारित बनाना है।
हिमाचल में सरकारी भर्तियों पर तकनीकी पहरा, टीसीएस के साथ अनुबंध
मुख्य विशेषताएं:
- समझौता और अवधि: हिमाचल प्रदेश में सरकारी भर्तियों की परीक्षाओं के संचालन के लिए राज्य चयन आयोग ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के साथ 3 साल का अनुबंध किया है, जिसे संतोषजनक प्रदर्शन पर 2 साल और बढ़ाया जा सकता है।
- सख्त प्रावधान: परीक्षाओं में किसी भी तरह की गड़बड़ी या लापरवाही मिलने पर कंपनी पर भारी जुर्माने के साथ दोबारा परीक्षा आयोजित करने का प्रावधान किया गया है।
- भर्तियों का विवरण: विधानसभा में दिए गए लिखित ब्योरे के अनुसार, आयोग के गठन से 31 जुलाई 2025 तक विभिन्न विभागों में 2,977 पदों पर नियुक्तियों के लिए संस्तुतियां भेजी जा चुकी हैं।
- परीक्षा केंद्र और क्षमता: सीबीटी (CBT) के लिए राज्यभर में 29 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जिनकी एक शिफ्ट में 3,449 अभ्यर्थियों की क्षमता है। साथ ही, बफर के रूप में 5 से 10 फीसदी अतिरिक्त कंप्यूटर नोड्स और बिजली के लिए यूपीएस व डीजी सेट अनिवार्य किए गए हैं।
- डिजिटल निगरानी: हमीरपुर स्थित आयोग के कमांड सेंटर से रीयल-टाइम सीसीटीवी लाइव स्ट्रीमिंग के माध्यम से केंद्रों की हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी। परीक्षा और दस्तावेज सत्यापन के दौरान फोटो व फिंगरप्रिंट बायोमेट्रिक पंजीकरण अनिवार्य होगा।
तकनीकी निगरानी के साये में हिमाचल की सरकारी भर्तियां, टीसीएस को मिला जिम्मा
प्रमुख बिंदु:
- कड़े पेनल्टी प्रावधान: एडमिट कार्ड या परिणाम जारी करने में देरी, परीक्षा केंद्र तैयार न होने अथवा 15 मिनट से अधिक तकनीकी खराबी होने पर प्रभावित अभ्यर्थियों के अनुसार जुर्माना लगाया जाएगा।
- कर्मचारियों और बाहरी संलिप्तता पर जुर्माना: टीसीएस के स्टाफ की संलिप्तता से कदाचार पाए जाने पर 5 लाख रुपये प्रति घटना और बाहरी कदाचार पर 1 लाख रुपये प्रति घटना का जुर्माना तय किया गया है।
- पेपर लीक होने पर पुनरीक्षण: पेपर लीक या परीक्षा की शुचिता भंग होने की स्थिति में कंपनी को अपने खर्च पर दोबारा परीक्षा करानी होगी और संबंधित शिफ्ट की कुल लागत का 5 फीसदी जुर्माना भी भरना होगा।
- लोक सेवा आयोग के आंकड़े: सरकार के आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन वर्षों में हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग ने 143 अधिसूचनाएं जारी कीं, 107 परीक्षाएं आयोजित कीं और 105 अंतिम परिणाम घोषित किए। इस दौरान 2,784 अभ्यर्थियों की नियुक्ति की संस्तुति की गई, और फिलहाल आयोग की कोई विज्ञापित परीक्षा लंबित नहीं है।
शिक्षा विभाग में सबसे ज्यादा पदों पर भर्ती प्रक्रिया
जवाब में बताया गया कि विभागवार स्थिति में स्कूली शिक्षा विभाग सबसे आगे है। यहां 6,097 नियमित पद स्वीकृत हैं। इनमें 2,477 पद बैचवाइज, 415 पद राज्य चयन आयोग और 431 व 46 पद पूर्व सैनिकों एवं उनके आश्रितों के माध्यम से भरने की प्रक्रिया में हैं। इसके अलावा पुलिस विभाग में 1,260, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग में 329, अग्निशमन विभाग में 178 और स्वास्थ्य सेवाओं में 100 नियमित पदों की स्थिति बताई गई है। जल शक्ति विभाग में 50 और लोक निर्माण विभाग में 174 अनुबंध पदों तथा राज्य कर एवं आबकारी विभाग में 58 नियमित पदों की भर्ती प्रक्रिया विभिन्न चरणों में है।
