राजस्थान से विस्थापितों के पुनर्वास पर हाईकोर्ट का निर्देश
मुख्य बिंदु:
- न्यायालय का आदेश: मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने मिलाप सिंह की अनुपालना याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया।
- रेगिस्तान में भेजने पर रोक: अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि राजस्थान सरकार विस्थापितों को जैसलमेर के रेगिस्तान में धकेलने के बजाय, हिमाचल प्रदेश के नजदीक फेज-1 वाले क्षेत्रों में जमीन उपलब्ध कराए।
पौंग बांध विस्थापितों का पुनर्वास: हाईकोर्ट की राजस्थान सरकार को फटकार
प्रमुख बिंदु:
- अदालत की कड़ी फटकार: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पौंग बांध विस्थापितों के पुनर्वास में हो रही देरी और उन्हें दूरदराज के क्षेत्रों में जमीन आवंटित किए जाने को लेकर राजस्थान सरकार को कड़ी फटकार लगाई है।
- न्यायालय का निर्देश: मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने मिलाप सिंह की अनुपालना याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि राजस्थान सरकार विस्थापितों को जैसलमेर के रेगिस्तान में धकेलने के बजाय हिमाचल प्रदेश के नजदीक फेज-1 वाले क्षेत्रों में जमीन उपलब्ध कराए।
- नैतिक जिम्मेदारी: अदालत ने दो टूक कहा कि पौंग बांध के पानी का पूरा लाभ लेने के बाद राजस्थान सरकार विस्थापितों के पुनर्वास की अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकती।
- अवैध कब्जों का बहाना नामंजूर: हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि फेज-1 की विवादमुक्त जमीन पर अवैध कब्जों का हवाला देकर विस्थापितों को उनके हक के आवंटन से वंचित करना बिल्कुल उचित नहीं है।
हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी: विस्थापितों को रेगिस्तान में धकेलने के बजाय दें नजदीकी जमीन
प्रमुख बिंदु:
- रेगिस्तान में भेजने पर रोक: मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने स्पष्ट निर्देश दिया कि राजस्थान सरकार विस्थापितों को जैसलमेर के रेगिस्तान में धकेलने के बजाय हिमाचल प्रदेश के नजदीक फेज-1 वाले क्षेत्रों में जमीन उपलब्ध कराए।
- अदालत की नाराजगी: हाईकोर्ट ने पौंग बांध विस्थापितों के पुनर्वास में हो रही देरी और उन्हें दूरदराज के क्षेत्रों में जमीन आवंटित किए जाने पर राजस्थान सरकार को कड़ी फटकार लगाई है।
- नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी: अदालत ने दो टूक कहा कि पौंग बांध के पानी का पूरा लाभ उठाने के बाद राजस्थान सरकार विस्थापितों के पुनर्वास की अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकती।
- अवैध कब्जों का बहाना खारिज: पीठ ने स्पष्ट किया कि फेज-1 की विवादमुक्त जमीन पर अवैध कब्जों का हवाला देकर विस्थापितों को उनके हक की जमीन से वंचित करना बिल्कुल उचित नहीं है।
राजस्थान में 265 मामले अभी भी लंबित
सुनवाई के दौरान सामने आया कि हिमाचल प्रदेश ने 1,003 अदालती मामलों में से 969 का फैसला कर फाइलें राजस्थान को भेज दी हैं, जबकि राजस्थान में अभी 265 मामले लंबित हैं। केंद्र के निर्देश के बावजूद दोनों राज्यों के बीच नियमित मासिक बैठकें भी नहीं हो रही हैं। जनवरी 2025 के बाद केवल एक आवंटन बैठक हुई, जिसमें महज 50 विस्थापितों को जमीन आवंटित की गई। पौंग बांध के निर्माण के लिए वर्ष 1971 में हिमाचल प्रदेश में भूमि अधिग्रहित की गई थी। इससे हजारों परिवार विस्थापित हुए। करीब 16,352 पौंग बांध विस्थापितों के पुनर्वास के लिए राजस्थान के गंगानगर जिले में 2.20 लाख एकड़ भूमि आरक्षित की गई थी।
