डॉक्टरों को बड़ी राहत: ट्रेनी नियुक्ति की सरकारी नीति को हिमाचल हाईकोर्ट ने असांविधानिक करार दिया

हिमाचल हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने डॉक्टरों की नियुक्ति और उनकी सेवा शर्तों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में राज्य सरकार की ट्रेनी नियुक्ति नीति पर फैसला सुनाया है। अदालत ने सरकारी कर्मचारी (भर्ती और सेवा शर्तें) अधिनियम, 2024 के तहत कर्मचारियों को ट्रेनी के रूप में नियुक्त करने की नीति को गैरकानूनी और असांविधानिक करार दिया। इस फैसले से उन डॉक्टरों को राहत मिली है, जिनकी नियुक्ति हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से हुई थी और जिन्हें सरकार की ट्रेनी नीति के तहत अलग सेवा शर्तों का सामना करना पड़ रहा था।

भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियम बदलने पर आपत्ति

हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि जब किसी पद के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू हो जाती है, तो उसके बीच में नियमों और सेवा शर्तों में इस तरह बदलाव नहीं किया जा सकता, जिससे पहले से चल रही भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हो। अदालत ने भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और उम्मीदवारों के अधिकारों को ध्यान में रखने पर जोर दिया। मामले में सरकार द्वारा लागू की गई ट्रेनी व्यवस्था को लेकर यही प्रमुख सवाल सामने आया था कि क्या भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियुक्ति की शर्तों में बदलाव किया जा सकता है।

लोक सेवा आयोग से चयनित डॉक्टरों को माना जाएगा अनुबंध कर्मचारी

अदालत ने स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से चयनित डॉक्टरों को ट्रेनी के बजाय अनुबंध कर्मचारी माना जाएगा। इसका सीधा असर उनकी सेवा शर्तों और उनसे जुड़े लाभों पर पड़ता है। कोर्ट के निर्णय के अनुसार डॉक्टरों की नियुक्ति की प्रकृति को उस भर्ती प्रक्रिया और उसमें लागू शर्तों के आधार पर देखा जाना चाहिए, जिसके तहत उनका चयन किया गया था। इस फैसले से ट्रेनी के रूप में नियुक्त किए गए डॉक्टरों की स्थिति को लेकर बनी स्थिति स्पष्ट हुई है।

19 जुलाई 2025 की कटऑफ डेट का मामला

राज्य सरकार ने इन डॉक्टरों के लिए 19 जुलाई 2025 की कटऑफ डेट निर्धारित की थी। इस कटऑफ डेट के आधार पर कुछ डॉक्टरों को पोस्ट ग्रेजुएशन यानी पीजी करने के दौरान मिलने वाले इन-सर्विस लाभों से बाहर कर दिया गया था। डॉक्टरों की ओर से इस व्यवस्था को चुनौती दी गई थी। मामले में यह सवाल भी उठा कि पहले से चयनित और भर्ती प्रक्रिया में शामिल डॉक्टरों पर बाद में लागू की गई ऐसी शर्तों का क्या प्रभाव होना चाहिए।

पीजी और सुपर स्पेशलिटी कोर्स में पात्रता पर राहत

हाईकोर्ट ने डॉक्टरों के पक्ष में महत्वपूर्ण राहत देते हुए कटऑफ डेट के आधार पर लगाई गई पाबंदी को हटाने का आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि संबंधित डॉक्टरों को जनरल ड्यूटी ऑफिसर (GDO) के रूप में पीजी और सुपर स्पेशलिटी कोर्स के लिए पूरी तरह पात्र माना जाए। इससे उन डॉक्टरों के लिए उच्च चिकित्सा शिक्षा और विशेषज्ञता से जुड़े अवसरों का रास्ता साफ हुआ है, जिन्हें सरकार की निर्धारित कटऑफ डेट के कारण इन-सर्विस लाभों से बाहर कर दिया गया था।

डॉक्टरों की सेवा शर्तों पर फैसले का असर

हाईकोर्ट के इस फैसले को डॉक्टरों की नियुक्ति, सेवा शर्तों और उच्च चिकित्सा शिक्षा से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने भर्ती प्रक्रिया के दौरान नियमों में बदलाव और नियुक्त कर्मचारियों की स्थिति से जुड़े मुद्दों पर अपना निर्णय दिया है। फैसले के बाद लोक सेवा आयोग से चयनित संबंधित डॉक्टरों को ट्रेनी के बजाय अनुबंध कर्मचारी के रूप में माना जाएगा और उन्हें पीजी तथा सुपर स्पेशलिटी कोर्स के लिए पात्रता का लाभ मिलेगा। इससे प्रभावित डॉक्टरों को अपनी आगे की चिकित्सा शिक्षा और करियर से जुड़े अवसरों में राहत मिलने की उम्मीद है।

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