हिमाचल प्रदेश: एचपीवी वैक्सीन लगवाए बिना विदेश नहीं जा पाएंगी बेटियां, सर्टिफिकेट दिखाना किया गया है अनिवार्य

विदेश यात्रा के लिए एचपीवी टीकाकरण सर्टिफिकेट अनिवार्य

एचपीवी टीकाकरण को लेकर नया नियम सामने आया है। निर्धारित आयु वर्ग की किशोरियों को यदि विदेश यात्रा करनी है, तो उन्हें पहले एचपीवी टीकाकरण का सर्टिफिकेट दिखाना अनिवार्य होगा। इस प्रमाणपत्र के बिना उन्हें विदेश में प्रवेश नहीं मिलेगा।

यह फैसला स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि संक्रमण के खतरे को कम किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि सभी पात्र किशोरियां समय पर टीकाकरण करवाएं और यात्रा से पहले जरूरी दस्तावेज अपने पास रखें।

सर्वाइकल कैंसर से बचाव के साथ विदेश यात्रा के लिए भी एचपीवी टीका अनिवार्य

प्रदेशभर में सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। यह टीका जहां एक ओर किशोरियों को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षा प्रदान करेगा, वहीं अब विदेश यात्रा के लिए भी इसे अनिवार्य कर दिया गया है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, निर्धारित आयु वर्ग की किशोरियों को विदेश जाने से पहले एचपीवी टीकाकरण का प्रमाणपत्र दिखाना होगा। इस कदम का उद्देश्य स्वास्थ्य सुरक्षा को बढ़ावा देना और संक्रमण के खतरे को कम करना है।

एचपीवी टीकाकरण: विदेश यात्रा के लिए सर्टिफिकेट अनिवार्य, 90 दिन का अभियान जारी

प्रदेश में चल रहे एचपीवी टीकाकरण अभियान के तहत अब निर्धारित आयु वर्ग की किशोरियों के लिए विदेश यात्रा से पहले टीकाकरण सर्टिफिकेट दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है। बिना इस प्रमाणपत्र के उन्हें विदेशों में प्रवेश नहीं मिलेगा।

जानकारी के अनुसार, टीका लगवाने के लिए फार्म भरते समय ही इस सर्टिफिकेट का प्रमाण देना होगा। टीकाकरण के समय विभाग की ओर से हर किशोरी को यह प्रमाणपत्र उपलब्ध कराया जा रहा है।

प्रदेशभर में 14-15 वर्ष आयु वर्ग की करीब 65 हजार किशोरियों को 90 दिनों के भीतर एचपीवी टीके लगाए जाने का लक्ष्य रखा गया है। यह अभियान 21 जून तक चलेगा, हालांकि इसकी शुरुआत फिलहाल धीमी बताई जा रही है।

चिकित्सकों के मुताबिक, इस टीके का प्रभाव लगभग 26 वर्षों तक बना रहता है, जिससे सर्वाइकल कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

हिमाचल में एचपीवी का गार्डासिल-4 टीका निशुल्क, निजी क्लीनिकों में महंगा

प्रदेश में किशोरियों को एचपीवी से बचाव के लिए गार्डासिल-4 टीका लगाया जा रहा है। यह टीका मर्क एंड कंपनी द्वारा निर्मित है, जिसे वर्ष 2006 में बाजार में उतारा गया था। यह एक अमेरिकी बहुराष्ट्रीय फार्मास्यूटिकल कंपनी है।

भारत में इस टीके का वितरण एमएसडी फार्मास्यूटिकल्स के माध्यम से किया जा रहा है। खास बात यह है कि जहां निजी क्लीनिकों में यह टीका करीब 12 से 15 हजार रुपये तक में लगाया जाता है, वहीं हिमाचल प्रदेश में सरकार द्वारा इसे निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।

इस पहल का उद्देश्य अधिक से अधिक किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाव प्रदान करना है।

160 देशों में लग चुकी हैं 500 मिलियन डोज

एचपीवी को स्वास्थ्य विभाग सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षा कवच मान रहा है। गार्डासिल-4 का टीका 160 देशों में लगाया गया है। डॉक्टरों के अनुसार अब तक इसकी 500 मिलियन डोज लगाई जा चुकी है। एचपीवी एक ऐसा वायरस है जो कम से कम छह तरह के कैंसर का कारण बन सकता है।

अभिभावकों से टीकाकरण सुिनश्चित करने की अपील

एचपीवी का टीका विदेश जाने के लिए भी लगवाना अनिवार्य है। फार्म भरते समय इसका सर्टिफिकेट दिखाना भी जरूरी किया गया है। 160 देशों में यह टीका लगाया जा रहा है, जिसकी अब तक 500 मिलियन डोज लगाई जा चुकी हैं। अभिभावकों से अपील है कि वे अपनी बेटियों का समय पर टीकाकरण सुनिश्चित करें। यह टीका न केवल यात्रा के लिए जरूरी है, बल्कि गंभीर बीमारी से सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है।- डॉ. परविंद्र सिंह, बीएमओ धर्मपुर

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