आईआईटी मंडी ने खोजी नई तकनीक: पुलों और सुरंगों की निगरानी आसान करेगा ड्रोन, आठ महीने में पूरा हुआ शोध

आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं ने ड्रोन तकनीक में किया अभिनव विकास

हिमाचल प्रदेश के मंडी स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT Mandi) के शोधकर्ताओं ने ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति की है। शोधकर्ताओं ने ऐसी तकनीक विकसित की है, जिसकी मदद से क्वाडरोटर ड्रोन को दीवार जैसी सतह के पास स्थिर रखा जा सकता है। यह तकनीक भविष्य में पुलों, सुरंगों, इमारतों और अन्य बड़े ढांचों की निगरानी तथा निरीक्षण को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद कर सकती है।

आमतौर पर ड्रोन को किसी स्थान पर निरीक्षण करने के लिए लगातार हवा में उड़ते रहना पड़ता है। इससे उसकी बैटरी खर्च होती रहती है और लंबे समय तक एक ही जगह पर निगरानी करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। नई तकनीक इसी समस्या को ध्यान में रखकर विकसित की गई है। इसका उद्देश्य ड्रोन को दीवार जैसी सतह के पास स्थिर रखने की क्षमता प्रदान करना है, ताकि वह निरीक्षण से जुड़े कार्य अधिक प्रभावी ढंग से कर सके।

दीवार जैसी सतह के पास स्थिर रह सकेगा क्वाडरोटर ड्रोन

क्वाडरोटर ड्रोन चार रोटर वाला एक उड़ने वाला उपकरण होता है, जिसका उपयोग निगरानी, फोटोग्राफी, मैपिंग और तकनीकी निरीक्षण जैसे कार्यों में किया जाता है। इसकी मदद से उन स्थानों तक पहुंचना आसान हो सकता है, जहां इंसानों के लिए पहुंचना मुश्किल या जोखिम भरा होता है।

IIT Mandi के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित तकनीक ड्रोन को दीवार जैसी सतह के पास स्थिर रखने की क्षमता पर केंद्रित है। इस तरह की तकनीक का उपयोग करके ड्रोन को किसी संरचना के नजदीक निरीक्षण करने के लिए अधिक समय तक एक निश्चित स्थिति में रखा जा सकता है।

पुलों और सुरंगों की निगरानी में मिल सकती है मदद

पुलों और सुरंगों का नियमित निरीक्षण उनकी सुरक्षा और रखरखाव के लिए आवश्यक होता है। समय के साथ इन संरचनाओं में दरारें, सतह पर टूट-फूट या अन्य प्रकार की क्षति हो सकती है। ऐसी समस्याओं की पहचान करने के लिए विशेषज्ञों को कई बार कठिन और जोखिमपूर्ण स्थानों तक पहुंचना पड़ता है।

ड्रोन आधारित निरीक्षण तकनीक इस प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यदि ड्रोन किसी दीवार या संरचना के पास स्थिर रह सके, तो वह संबंधित क्षेत्र की तस्वीरें और वीडियो लेने के लिए अधिक सुविधाजनक मंच प्रदान कर सकता है।

ऊर्जा की बचत और लंबे समय तक निरीक्षण की संभावना

ड्रोन की बैटरी उसकी कार्यक्षमता को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में से एक है। लगातार उड़ते रहने के दौरान मोटरों को ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिससे बैटरी तेजी से खर्च हो सकती है। इसलिए लंबे समय तक निरीक्षण करने वाले ड्रोन के लिए ऊर्जा प्रबंधन महत्वपूर्ण होता है।

दीवार जैसी सतह के पास ड्रोन को स्थिर रखने की तकनीक इस क्षेत्र में नए अवसर पैदा कर सकती है। यदि किसी विशेष डिजाइन में स्थिर रहने के लिए लगातार उड़ान की आवश्यकता कम हो, तो ऊर्जा की बचत संभव हो सकती है। इससे निरीक्षण के दौरान ड्रोन को लंबे समय तक उपयोग करने की संभावना बढ़ सकती है।

आठ महीने में पूरा हुआ शोध, Scientific Reports में प्रकाशित हुआ शोधपत्र

IIT Mandi के शोधकर्ताओं का यह अध्ययन वैज्ञानिक शोध के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शोध कार्य आठ महीने में पूरा किया गया। इस शोध से संबंधित पेपर 12 फरवरी 2026 को वैज्ञानिक जर्नल Scientific Reports में ऑनलाइन प्रकाशित हुआ।

शोधपत्र का प्रकाशन यह दर्शाता है कि इस विषय पर किए गए अध्ययन को वैज्ञानिक मंच पर प्रस्तुत किया गया है। ऐसे शोध भविष्य में ड्रोन नियंत्रण, रोबोटिक्स और संरचनात्मक निरीक्षण से संबंधित तकनीकों के विकास में योगदान दे सकते हैं।

नई तकनीकों को वास्तविक परिस्थितियों में उपयोग करने से पहले उनकी स्थिरता, विश्वसनीयता, ऊर्जा खपत और सुरक्षा का मूल्यांकन करना आवश्यक होता है। इसलिए इस शोध के व्यावहारिक उपयोग की संभावनाओं को समझने के लिए तकनीक की विस्तृत कार्यप्रणाली और परीक्षण परिणामों का अध्ययन महत्वपूर्ण रहेगा।

IIT Mandi की शोध टीम ने तकनीकी विकास में दिया योगदान

इस शोध में IIT Mandi के प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा और डॉ. नरेंद्र कुमार धर के साथ IIT Mandi iHub एवं HCI Foundation से जुड़े डॉ. अनुज नंदनवार भी शामिल हैं।

शोधकर्ताओं की टीम ने क्वाडरोटर ड्रोन को दीवार जैसी सतह के पास स्थिर रखने की समस्या पर काम किया। इस तरह का शोध रोबोटिक्स और स्वचालित निरीक्षण प्रणालियों के विकास के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

आने वाले समय में ड्रोन तकनीक का उपयोग औद्योगिक निरीक्षण, बुनियादी ढांचे के रखरखाव और कठिन स्थानों की निगरानी जैसे क्षेत्रों में बढ़ने की संभावना है। ऐसे में ड्रोन को किसी संरचना के पास स्थिर रखने की क्षमता उपयोगी साबित हो सकती है।



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