हिमाचल: धारा-118 में किस आधार पर दी गईं मंजूरियां, हाईकोर्ट ने सरकार से 10 साल का रिकॉर्ड किया तलब

धारा 118 के तहत जमीन खरीद की मंजूरियों पर हाईकोर्ट सख्त

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने गैर-कृषकों, विशेषकर प्रदेश से बाहर के लोगों को जमीन खरीदने के लिए हिमाचल प्रदेश टेनेंसी एंड लैंड रिफॉर्म्स एक्ट, 1972 की धारा 118 के तहत दी जा रही मंजूरियों पर कड़ा रुख अपनाया है।

धारा 118 के तहत जमीन खरीद की मंजूरियों का 10 साल का रिकॉर्ड तलब, हाईकोर्ट सख्त

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने गैर-कृषकों, विशेषकर प्रदेश से बाहर के लोगों को जमीन खरीदने के लिए हिमाचल प्रदेश टेनेंसी एंड लैंड रिफॉर्म्स एक्ट, 1972 की धारा 118 के तहत दी जा रही मंजूरियों पर कड़ा रुख अपनाया है।

मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने राज्य सरकार को पिछले 10 वर्षों में दी गई सभी मंजूरियों का पूरा रिकॉर्ड पेश करने का आदेश दिया है। अदालत ने सरकार से पूछा है कि इस अवधि में पूरे प्रदेश में धारा 118 के तहत कितनी मंजूरियां दी गईं और उन्हें देने का आधार क्या था।

कोर्ट ने मंजूरी देने या आवेदन खारिज करने की प्रक्रिया और उसके लिए निर्धारित मापदंडों की जानकारी भी मांगी है। साथ ही, जिन आवेदकों के आवेदन रद्द किए गए, उनके कारण बताने के निर्देश दिए हैं।

अदालत ने यह भी जानना चाहा है कि धारा 118 के तहत प्राप्त आवेदनों से प्रोसेसिंग फीस, आवेदन शुल्क या स्टांप ड्यूटी के रूप में राज्य सरकार को कितना राजस्व मिलता है और क्या यह आय सरकारी खजाने के लिए महत्वपूर्ण है।

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