हिमाचल: एमआर होम के दोषपूर्ण डिजाइन पर हाईकोर्ट सख्त, मंजूरी देने वाले अधिकारी की जिम्मेदारी तय करने को कहा

दिव्यांगजनों के अधिकारों को लेकर हाईकोर्ट ने दिखाई सख्ती

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने दिव्यांगजनों के अधिकारों के संरक्षण और उनके लिए उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं में खामियों को लेकर प्रदेश सरकार पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने विशेष रूप से एमआर होम के दोषपूर्ण डिजाइन को गंभीरता से लेते हुए इस मामले में जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए हैं।

दोषपूर्ण डिजाइन को मंजूरी देने वाले अधिकारी की जिम्मेदारी तय होगी

हाईकोर्ट ने कहा कि एमआर होम के डिजाइन में मौजूद खामियों के बावजूद इसे मंजूरी कैसे दी गई, इसकी जांच की जानी चाहिए। अदालत ने दोषपूर्ण डिजाइन को स्वीकृति देने वाले संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय करने को कहा है।

दिव्यांगजनों के लिए बुनियादी ढांचे की खामियों पर उठे सवाल

प्रदेश में दिव्यांगजनों के लिए तैयार किए जा रहे बुनियादी ढांचे में मौजूद कमियों को लेकर भी अदालत ने चिंता जताई। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि दिव्यांगजनों की जरूरतों और उनके अधिकारों को ध्यान में रखते हुए सुविधाओं का निर्माण किया जाना आवश्यक है।

बैकलॉग पदों को भरने का मुद्दा भी उठा

सुनवाई के दौरान दिव्यांगजनों के लिए आरक्षित बैकलॉग पदों को भरने का मुद्दा भी सामने आया। हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को इस संबंध में गंभीरता से कार्रवाई करने और दिव्यांगजनों के अधिकारों की उचित सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

सरकार को व्यवस्था में सुधार के निर्देश

हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब प्रदेश सरकार से दिव्यांगजनों से जुड़े मामलों में आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने की उम्मीद है। अदालत ने संकेत दिया है कि दिव्यांगजनों के अधिकारों और सुविधाओं से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।




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