विधानसभा में उठा पानी के स्टोरेज टैंक का मामला
हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के कसौली विधानसभा क्षेत्र की कोटबेजा और देवटी पंचायतों में बने पानी के स्टोरेज टैंक को लेकर विधानसभा में गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। मामला इसलिए चर्चा में आया क्योंकि एक ही स्टोरेज टैंक के निर्माण को लेकर दो अलग-अलग विभागों और परियोजनाओं की ओर से दावा किया जा रहा है। जल शक्ति विभाग जहां इस टैंक के निर्माण का दावा कर रहा है, वहीं जाइका परियोजना के तहत भी इसी टैंक को बनाया जाना बताया जा रहा है। विधानसभा में यह मुद्दा उठने के बाद पूरे मामले की जांच की मांग और तेज हो गई है।
एक ही टैंक पर जल शक्ति विभाग और जाइका परियोजना का दावा
कोटबेजा और देवटी पंचायतों में बने इस पानी के स्टोरेज टैंक को लेकर सामने आए दावों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। संबंधित क्षेत्र में मौजूद एक ही टैंक के निर्माण का श्रेय जल शक्ति विभाग और जाइका परियोजना, दोनों की ओर से लिया जा रहा है। ऐसे में यह स्पष्ट करना जरूरी हो गया है कि आखिर इस टैंक का निर्माण किस विभाग या परियोजना के माध्यम से किया गया था। एक ही सार्वजनिक निर्माण कार्य को लेकर दो अलग-अलग दावे सामने आने से सरकारी रिकॉर्ड और परियोजनाओं की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
प्रश्नकाल के दौरान विधायक विनोद सुल्तानपुरी ने उठाया सवाल
हिमाचल विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान कसौली से कांग्रेस विधायक विनोद सुल्तानपुरी ने इस मामले को सदन में प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि संबंधित पंचायतों में एक ही पानी का स्टोरेज टैंक मौजूद है, लेकिन उसके निर्माण को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। विधायक ने सदन के सामने यह सवाल रखा कि जब क्षेत्र में केवल एक ही टैंक है, तो जल शक्ति विभाग और जाइका परियोजना दोनों उसके निर्माण का दावा कैसे कर सकते हैं। उनके सवाल के बाद यह मुद्दा विधानसभा में चर्चा का विषय बन गया।
सरकारी रिकॉर्ड और निर्माण कार्यों की निगरानी पर उठे सवाल
एक ही टैंक को लेकर दो विभागों या परियोजनाओं के दावे सामने आने के बाद सरकारी रिकॉर्ड की जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है। यदि दोनों विभागों के दस्तावेजों में एक ही निर्माण कार्य दर्ज है, तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि रिकॉर्ड में यह स्थिति कैसे बनी। मामले से यह सवाल भी उठता है कि विकास कार्यों और सरकारी परियोजनाओं की मॉनिटरिंग किस स्तर पर की जा रही है। जांच के दौरान यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि निर्माण कार्य की वास्तविक जिम्मेदारी किसकी थी और दोनों दावों के पीछे क्या कारण हैं।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने दिए जांच के आदेश
मामला विधानसभा में सामने आने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इसकी जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अब संबंधित विभागों और परियोजना से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि पानी के स्टोरेज टैंक का निर्माण वास्तव में किस विभाग या परियोजना के माध्यम से किया गया था और एक ही निर्माण कार्य को लेकर दो अलग-अलग दावे क्यों किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री के जांच आदेश के बाद मामले में आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।
जांच के बाद सामने आएगी वास्तविक स्थिति
जांच पूरी होने के बाद ही इस पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। यदि सरकारी रिकॉर्ड में किसी प्रकार की गड़बड़ी या दोहराव पाया जाता है, तो संबंधित अधिकारियों और विभागों से जवाब मांगा जा सकता है। वहीं, जांच से यह भी स्पष्ट होगा कि कोटबेजा और देवटी पंचायतों के लिए बनाए गए पानी के स्टोरेज टैंक का वास्तविक निर्माण किस योजना के तहत हुआ था। विधानसभा में उठे इस मुद्दे ने स्थानीय विकास कार्यों की पारदर्शिता और सरकारी परियोजनाओं की निगरानी को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा कर दिया है।
