हिमाचल में बागवानों के लिए दो बड़ी पहल, लॉन्च हुआ ‘पांगी एप्पल’ ब्रांड; मंडी में शुरू हुई देश की पहली एग्री मोनोरेल

चंबा के पांगी क्षेत्र के सेबों को मिलेगी अलग पहचान, मंडी में मोनोरेल से किसानों को मिलेगी ढुलाई में राहत

शिमला, 24 अक्टूबर: हिमाचल प्रदेश सरकार ने बागवानी और कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में दो महत्वपूर्ण पहल की हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने चंबा के जनजातीय क्षेत्र पांगी में प्राकृतिक खेती से तैयार सेब के लिए ‘पांगी एप्पल’ ब्रांड लॉन्च किया है। वहीं, मंडी जिले में बागवानों की सुविधा के लिए देश की पहली एग्री मोनोरेल प्रणाली का उद्घाटन किया गया है।

सरकार का मानना है कि इन पहलों से प्रदेश के बागवानों को अपनी उपज की बेहतर पहचान और बाजार उपलब्ध कराने के साथ-साथ दुर्गम क्षेत्रों में कृषि उत्पादों की ढुलाई आसान बनाने में मदद मिलेगी।

पांगी के सेबों को मिलेगी अपनी अलग पहचान

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिमला में ‘पांगी एप्पल’ ब्रांड की शुरुआत करते हुए कहा कि पांगी उपमंडल को राज्य का पहला प्राकृतिक खेती उपमंडल घोषित किया गया है। सरकार का उद्देश्य यहां उत्पादित सेब को अलग पहचान दिलाना और स्थानीय किसानों के लिए बेहतर आर्थिक अवसर तैयार करना है।

पांगी में करीब 370 हेक्टेयर क्षेत्र में सेब की खेती होती है। यहां 1.04 लाख से अधिक सेब के पौधे हैं और मौजूदा सीजन में करीब 35,000 पेटी यानी लगभग 550 मीट्रिक टन सेब उत्पादन की उम्मीद है।

अब तक पांगी में तैयार होने वाले सेबों को अक्सर कुल्लू या किन्नौर के नाम से बाजार में भेजा जाता था। इससे पांगी के स्थानीय उत्पाद को अपनी अलग पहचान नहीं मिल पाती थी। नए ब्रांड के जरिए इस स्थिति को बदलने की कोशिश की जा रही है।

10 और 20 किलो के विशेष कार्टन पर 50% सब्सिडी

‘पांगी एप्पल’ की ब्रांडिंग के साथ सरकार ने किसानों के लिए विशेष पैकेजिंग की भी व्यवस्था की है। पांगी के बागवानों को 10 किलोग्राम और 20 किलोग्राम क्षमता वाले विशेष कार्टन 50 प्रतिशत सब्सिडी पर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।

सरकार के अनुसार, इससे पांगी के सेबों को बाजार में अलग पहचान बनाने में मदद मिलेगी और प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पादों की ब्रांड वैल्यू भी बढ़ेगी।

मंडी में शुरू हुई देश की पहली एग्री मोनोरेल

बागवानी क्षेत्र में दूसरी बड़ी पहल मंडी जिले में हुई है। सुंदरनगर विकास खंड के पलहोता-2 क्लस्टर में एग्री मोनोरेल प्रणाली का उद्घाटन किया गया है।

यह पायलट परियोजना एचपी शिवा (HP SHIVA) परियोजना के तहत तैयार की गई है। करीब 1 किलोमीटर लंबी इस प्रणाली को लगभग 20 से 25 लाख रुपये की लागत से विकसित किया गया है।

पहाड़ी क्षेत्रों में बागवानों को अक्सर खाद, गोबर और फलों को ढलानदार खेतों से सड़क तक पहुंचाने में काफी शारीरिक मेहनत करनी पड़ती है। मोनोरेल प्रणाली का उद्देश्य इसी समस्या को कम करना है।

85 किसान परिवारों को मिलेगा सीधा फायदा

पलहोता-2 क्लस्टर में यह परियोजना करीब 28.44 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करती है। इससे जुड़े लगभग 85 किसान परिवारों को फायदा मिलने की उम्मीद है।

मोनोरेल के जरिए खेतों से कृषि सामग्री और तैयार फलों को ऊबड़-खाबड़ तथा ढलानदार रास्तों के बजाय रेल प्रणाली के माध्यम से स्थानांतरित किया जा सकेगा। इससे किसानों का समय, श्रम और परिवहन खर्च कम करने में मदद मिल सकती है।

यह परियोजना राज्य के बड़े HP SHIVA प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसे एशियाई विकास बैंक के सहयोग से संचालित किया जा रहा है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश

हिमाचल सरकार की इन दोनों पहलों का फोकस बागवानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और पहाड़ी क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर है।

‘पांगी एप्पल’ ब्रांड जहां चंबा के दूरदराज क्षेत्र में उत्पादित सेबों को अपनी पहचान दिलाने की कोशिश है, वहीं एग्री मोनोरेल जैसी तकनीक दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में कृषि उत्पादों की ढुलाई को आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

सरकार को उम्मीद है कि इस तरह की पहलों से स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के अवसर बढ़ेंगे और प्रदेश के बागवानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य हासिल करने में मदद मिलेगी।

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