डीआईजी संजीव गांधी के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में डीआईजी संजीव गांधी के खिलाफ सरकारी धन के कथित दुरुपयोग से जुड़ा एक और मामला दर्ज किया गया है। इस बार पुलिस भवनों और पुलिस जवानों के आवासों की मरम्मत के लिए आवंटित बजट के इस्तेमाल में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुलिस मुख्यालय की ऑडिट समिति की रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। मामले में 22 अक्तूबर 2026 को पुलिस थाना सदर शिमला में एफआईआर दर्ज की गई। इस घटनाक्रम के बाद पुलिस विभाग में मरम्मत कार्यों के लिए आवंटित सरकारी धन के उपयोग को लेकर मामला चर्चा में है।
पुलिस भवनों और जवानों के आवासों की मरम्मत के बजट पर सवाल
इस मामले में मुख्य आरोप पुलिस भवनों और जवानों के आवासों की मरम्मत के लिए निर्धारित धनराशि के इस्तेमाल में कथित अनियमितताओं से संबंधित हैं। सरकारी बजट आम तौर पर निर्धारित कार्यों और आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आवंटित किया जाता है। ऐसे में मरम्मत के लिए जारी राशि के उपयोग की जांच के दौरान यह देखा जाता है कि धन का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप हुआ या नहीं। इस मामले में भी पुलिस मुख्यालय की ऑडिट समिति की रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में जांच के निष्कर्ष या आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि का उल्लेख नहीं है।
14 लाख रुपये सरकारी आवास पर खर्च करने का आरोप
मामले की सुर्खी में जवानों के आवासों की मरम्मत के लिए निर्धारित 14 लाख रुपये की राशि को सरकारी आवास पर खर्च करने का आरोप प्रमुखता से सामने आया है। यह आरोप सरकारी धन के उपयोग से संबंधित है और इसकी वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि कथित खर्च को लेकर जांच में क्या निष्कर्ष निकले हैं या संबंधित राशि के इस्तेमाल को लेकर कोई अंतिम निर्णय हुआ है। एफआईआर दर्ज होना मामले की कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है और आरोपों को अभी जांच के दायरे में ही देखा जाना चाहिए।
ऑडिट समिति की रिपोर्ट के आधार पर हुई कार्रवाई
पुलिस मुख्यालय की ऑडिट समिति की रिपोर्ट इस मामले में एफआईआर दर्ज होने का आधार बताई गई है। ऑडिट के दौरान सरकारी खर्च और उपलब्ध रिकॉर्ड की समीक्षा की जाती है, ताकि बजट के इस्तेमाल में किसी संभावित गड़बड़ी या अनियमितता की पहचान की जा सके। इस मामले में रिपोर्ट के आधार पर पुलिस थाना सदर शिमला में कार्रवाई की गई। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में ऑडिट रिपोर्ट के विस्तृत निष्कर्ष, संबंधित बिलों या खर्च के रिकॉर्ड का ब्योरा नहीं दिया गया है। इसलिए मामले से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि जांच और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही हो सकेगी।
भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(5) के तहत मामला दर्ज
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस मामले में एफआईआर संख्या 139/2026 दर्ज की गई है। एफआईआर 22 अक्तूबर 2026 को पुलिस थाना सदर शिमला में दर्ज हुई और इसमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 316(5) का उल्लेख किया गया है। इस कानूनी प्रावधान के तहत दर्ज मामले में पुलिस आगे की जांच के दौरान संबंधित रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल कर सकती है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में जांच की आगे की प्रक्रिया, किसी गिरफ्तारी या अन्य कार्रवाई के संबंध में जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए इस स्तर पर मामले की स्थिति को एफआईआर दर्ज होने तक सीमित समझना जरूरी है।
जांच के बाद स्पष्ट होगी मामले की पूरी स्थिति
डीआईजी संजीव गांधी के खिलाफ दर्ज इस एफआईआर में सरकारी धन के कथित इस्तेमाल और मरम्मत बजट से जुड़ी अनियमितताओं के आरोपों की जांच की जानी है। जांच के दौरान संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड, मरम्मत कार्यों से जुड़े दस्तावेजों और ऑडिट समिति की रिपोर्ट जैसे तथ्यों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में मामले को लेकर किसी भी तरह का अंतिम निर्णय जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। आगे की कार्रवाई और आधिकारिक जानकारी से ही यह पता चल सकेगा कि कथित अनियमितताओं के संबंध में जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।
