चंबा में सेब पौधों की खरीद घोटाले की जांच तेज, अब बीडीओ और अकाउंटेंट से भी होगी कड़ी पूछताछ
चंबा जिले में सेब पौधों की खरीद में सामने आई कथित गड़बड़ियों को लेकर जांच का दायरा अब और बढ़ा दिया गया है। मामले में पहले स्तर पर हुई जांच के बाद अब संबंधित खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) और अकाउंटेंट से भी पूछताछ किए जाने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार पौधों की खरीद प्रक्रिया, भुगतान रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि खरीद प्रक्रिया में कहीं नियमों की अनदेखी या वित्तीय अनियमितता तो नहीं हुई। मामले के सामने आने के बाद विभागीय अधिकारियों में भी हलचल तेज हो गई है।
किसानों के लिए खरीदे गए सेब पौधों की खरीद प्रक्रिया पर उठे सवाल, रिकॉर्ड में मिलीं कई विसंगतियां
जानकारी के अनुसार सेब पौधों की खरीद ग्रामीण विकास और बागवानी से जुड़े एक प्रोजेक्ट के तहत की गई थी, जिसका उद्देश्य किसानों और स्वयं सहायता समूहों को लाभ पहुंचाना था। लेकिन खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे, जिसके बाद प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी। आरोप हैं कि पौधों की खरीद में तय मानकों का पालन नहीं किया गया और रिकॉर्ड में भी कई प्रकार की विसंगतियां पाई गई हैं। इसी आधार पर अब बीडीओ और अकाउंटेंट से पूछताछ कर खरीद प्रक्रिया से जुड़े निर्णयों और वित्तीय लेनदेन की जानकारी जुटाई जाएगी।
निष्पक्ष जांच का दावा, अनियमितता साबित होने पर दोषियों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जाएगी। जांच टीम संबंधित फाइलों, बिलों, भुगतान विवरण और आपूर्ति से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है। यदि जांच में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि सरकारी योजनाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता को गंभीरता से लिया जाएगा और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
सेब पौधों की खरीद में गड़बड़ी पर किसानों और सामाजिक संगठनों ने उठाए सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग तेज
मामले के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और किसानों में भी चर्चा का माहौल बना हुआ है। लोगों का कहना है कि किसानों के हित से जुड़ी योजनाओं में पारदर्शिता और गुणवत्ता बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि वास्तविक लाभ जरूरतमंदों तक पहुंच सके। कई सामाजिक संगठनों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात कही है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो इससे सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।
जांच के दायरे में आ सकते हैं अन्य कर्मचारी और आपूर्तिकर्ता, रिपोर्ट के बाद होगी आगे की कार्रवाई
उधर, विभागीय स्तर पर भी पूरे मामले की निगरानी की जा रही है और उच्च अधिकारियों को नियमित रिपोर्ट भेजी जा रही है। जांच के आगामी चरण में अन्य संबंधित कर्मचारियों और आपूर्तिकर्ताओं से भी पूछताछ की जा सकती है। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। फिलहाल इस मामले ने जिले में प्रशासनिक कार्यप्रणाली और सरकारी खरीद प्रक्रियाओं को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनके जवाब जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे।
सेब पौधों की खरीद मामले में विभागीय निगरानी बढ़ी, जांच टीम जुटी दस्तावेजों की गहन पड़ताल में
उधर, विभागीय स्तर पर भी पूरे मामले पर लगातार नजर रखी जा रही है और जांच की प्रगति से संबंधित रिपोर्ट नियमित रूप से उच्च अधिकारियों को भेजी जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जाएगी। जांच टीम विभिन्न विभागों से जुड़े दस्तावेज, भुगतान रिकॉर्ड, खरीद प्रक्रिया और आपूर्ति से संबंधित जानकारियों को एकत्र कर उनकी विस्तार से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच का उद्देश्य केवल औपचारिकता पूरी करना नहीं, बल्कि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाना है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं को रोका जा सके।
जांच का दायरा बढ़ा, अब कर्मचारियों और आपूर्तिकर्ताओं की भूमिका भी होगी जांच के घेरे में
सूत्रों के अनुसार जांच के अगले चरण में अन्य संबंधित कर्मचारियों, आपूर्तिकर्ताओं और प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों से भी पूछताछ की जा सकती है। जांच एजेंसियां यह जानने का प्रयास कर रही हैं कि खरीद प्रक्रिया में किन-किन स्तरों पर निर्णय लिए गए और क्या सभी प्रक्रियाओं का पालन नियमानुसार किया गया था या नहीं। इसके साथ ही भुगतान से जुड़े दस्तावेजों और आपूर्ति की वास्तविक स्थिति का भी मिलान किया जा रहा है। यदि जांच के दौरान किसी प्रकार की गड़बड़ी, मिलीभगत या वित्तीय अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ कानूनी कदम भी उठाए जा सकते हैं।
