धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है ड्रिलबुरी पर्वत
लाहौल-स्पीति जिले के केलांग के पास स्थित ड्रिलबुरी पर्वत स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है। करीब 13 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित यह पर्वत अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ धार्मिक आस्था और पारंपरिक मान्यताओं के लिए भी जाना जाता है। यहां हर वर्ष श्रद्धालु धार्मिक परंपरा के तहत पर्वत की कोरा यानी परिक्रमा करते हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और ऊंचाई के बावजूद बड़ी संख्या में लोग इस धार्मिक यात्रा में हिस्सा लेते हैं। ड्रिलबुरी की कोरा को क्षेत्र की पुरानी धार्मिक परंपराओं से जोड़कर देखा जाता है।
क्या है ड्रिलबुरी की कोरा परिक्रमा की परंपरा
ड्रिलबुरी पर्वत की कोरा श्रद्धालुओं के लिए केवल एक सामान्य पैदल यात्रा नहीं, बल्कि आस्था और धार्मिक विश्वास से जुड़ी परंपरा है। श्रद्धालु पर्वत की परिक्रमा कर अपनी धार्मिक आस्था व्यक्त करते हैं। ऊंचाई अधिक होने और रास्ता पहाड़ी होने के कारण इस यात्रा में शारीरिक मेहनत भी करनी पड़ती है। कई श्रद्धालु इसे धार्मिक संकल्प के रूप में पूरा करते हैं। कोरा के दौरान आसपास का प्राकृतिक वातावरण, ऊंचे पहाड़ और बदलता मौसम इस यात्रा को और चुनौतीपूर्ण बना देते हैं। यही वजह है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को मौसम और रास्ते की परिस्थितियों को ध्यान में रखना पड़ता है।
अचानक बर्फबारी और फिसलन बनी हादसे की वजह
इस बार ड्रिलबुरी पर्वत की कोरा के दौरान अचानक मौसम बदल गया और क्षेत्र में बर्फबारी होने लगी। ऊंचाई वाले इलाके में बर्फ गिरने के कारण रास्तों पर फिसलन बढ़ गई, जिससे श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कठिन परिस्थितियों के बीच यात्रा कर रहे कई श्रद्धालु प्रभावित हुए। इसी दौरान दो बुजुर्ग महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि कई अन्य श्रद्धालुओं के घायल होने की जानकारी सामने आई। घटना के बाद प्रशासन और स्थानीय स्तर पर राहत एवं बचाव से जुड़ी गतिविधियों पर भी ध्यान केंद्रित हुआ।
दो महिला श्रद्धालुओं की मौत से धार्मिक यात्रा पर सवाल
ड्रिलबुरी की कोरा के दौरान दो बुजुर्ग महिला श्रद्धालुओं की मौत की घटना ने सभी को झकझोर दिया है। अचानक हुई बर्फबारी और रास्ते में बढ़ी फिसलन ने यात्रा को मुश्किल बना दिया। इस घटना के बाद एक बार फिर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आयोजित होने वाली धार्मिक यात्राओं के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और मौसम की जानकारी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। विशेष रूप से बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिए ऐसी कठिन परिस्थितियों में यात्रा करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हादसे के बाद ड्रिलबुरी पर्वत और यहां होने वाली धार्मिक कोरा परिक्रमा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है।
ऊंचाई और मौसम को देखते हुए चुनौतीपूर्ण है यात्रा
ड्रिलबुरी पर्वत की कोरा करीब 13 हजार फीट की ऊंचाई वाले क्षेत्र में होती है। इतनी अधिक ऊंचाई पर मौसम तेजी से बदल सकता है और बारिश या बर्फबारी के कारण पहाड़ी रास्ते मुश्किल हो सकते हैं। ठंड, कम तापमान, बर्फ और फिसलन जैसी परिस्थितियां श्रद्धालुओं के लिए चुनौती पैदा कर सकती हैं। ऐसे में इस धार्मिक यात्रा पर जाने वाले लोगों के लिए मौसम की स्थिति और प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों की जानकारी रखना जरूरी माना जाता है। इस बार हुए हादसे के बाद यात्रा के दौरान सुरक्षा और सावधानी का विषय भी प्रमुखता से सामने आया है।
हादसे के बाद फिर चर्चा में आया ड्रिलबुरी पर्वत
दो महिला श्रद्धालुओं की मौत और कई लोगों के घायल होने की घटना के बाद ड्रिलबुरी पर्वत एक बार फिर सुर्खियों में है। एक ओर यह स्थान अपनी धार्मिक आस्था और पारंपरिक कोरा के लिए जाना जाता है, वहीं दूसरी ओर इस तरह की घटनाएं ऊंचाई वाले क्षेत्रों में होने वाली धार्मिक यात्राओं की चुनौतियों को भी सामने लाती हैं। ड्रिलबुरी की धार्मिक परंपरा लंबे समय से श्रद्धालुओं के लिए आस्था का विषय रही है। मौजूदा घटना के बाद अब श्रद्धालुओं की सुरक्षा, मौसम की निगरानी और कठिन परिस्थितियों में यात्रा को लेकर भी चर्चा हो रही है।
