खुले में पड़ा पेयजल टैंक, बढ़ी लोगों की चिंता
चंबा जिले की चनेड़ और भनौता पंचायतों के ग्रामीण इन दिनों अपने पेयजल स्रोत की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। दोनों पंचायतों को पानी उपलब्ध कराने वाला मुख्य पेयजल टैंक खुले में पड़ा हुआ है, जिस कारण लोगों में पानी की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिस पानी पर हजारों लोग निर्भर हैं, उसकी उचित सुरक्षा और रखरखाव बेहद जरूरी है।
बरसात में बढ़ा दूषित पानी का खतरा
मानसून के दौरान खुले में रखे पेयजल टैंक में गंदगी, बारिश का पानी, पत्ते और अन्य बाहरी तत्व आसानी से पहुंच सकते हैं। इससे पानी के दूषित होने की आशंका बढ़ जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि दूषित पानी के सेवन से डायरिया, टाइफाइड और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में समय रहते आवश्यक कदम उठाना बेहद जरूरी है।
दो पंचायतों के अलावा कई संस्थान भी निर्भर
इस पेयजल स्रोत पर केवल चनेड़ और भनौता पंचायतों के लोग ही नहीं, बल्कि आसपास के सरकारी स्कूल, बैंक, आंगनबाड़ी केंद्र और अन्य सरकारी कार्यालय भी निर्भर हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग इसी पानी का उपयोग पीने और अन्य घरेलू कार्यों के लिए करते हैं। ऐसे में टैंक की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही का असर बड़ी आबादी पर पड़ सकता है।
ग्रामीणों ने उठाई सुरक्षा की मांग
स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग से मांग की है कि पेयजल टैंक को जल्द से जल्द सुरक्षित किया जाए। उनका कहना है कि टैंक को ढकने, नियमित सफाई कराने और समय-समय पर पानी की गुणवत्ता की जांच कराने की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि लोगों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल मिल सके। ग्रामीणों का कहना है कि छोटी सी लापरवाही भविष्य में बड़ी स्वास्थ्य समस्या का कारण बन सकती है।
प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की उम्मीद
ग्रामीणों को उम्मीद है कि जल शक्ति विभाग और स्थानीय प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द आवश्यक कदम उठाएंगे। उनका मानना है कि सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और बरसात के मौसम में इस दिशा में विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
स्वच्छ पेयजल ही बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी
विशेषज्ञों का कहना है कि स्वच्छ पेयजल प्रत्येक व्यक्ति का मूल अधिकार है। यदि जल स्रोतों की नियमित निगरानी, सफाई और रखरखाव किया जाए तो जलजनित बीमारियों से काफी हद तक बचा जा सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि समस्या का स्थायी समाधान किया जाए, ताकि आने वाले समय में किसी भी प्रकार के स्वास्थ्य संकट से बचा जा सके।
