सलूणी (चंबा): मक्की की तैयार फसल के बीच किसानों को सता रही भंडारण की चिंता, वर्षों से बंद पड़ा है कोल्ड स्टोर
- 25 पंचायतों के किसानों की समस्या: सलूणी क्षेत्र की करीब 25 पंचायतों के किसानों के सामने उपज के सुरक्षित भंडारण का संकट खड़ा हो गया है।
- बंद पड़ा कोल्ड स्टोर: किसानों की सुविधा के लिए करोड़ों की लागत से बनाया गया कोल्ड स्टोर लंबे समय से ताले में बंद है।
- मजबूरी: फसल पककर तैयार होने के बावजूद भंडारण की सुविधा न मिलने से किसानों को अपनी उपज घरों या अन्य असुरक्षित स्थानों पर रखनी पड़ रही है।
“मुख्य द्वार पर लटका ताला क्षेत्र के अन्नदाताओं की बदहाली और प्रशासनिक उदासीनता की कहानी खुद बयां कर रहा है।”
प्रमुख समस्याएँ और किसानों का दर्द
- सुविधा का अभाव: मक्की की बंपर पैदावार के बावजूद किसानों को इसका उचित लाभ और सुरक्षित रखने का स्थान नहीं मिल पा रहा है।
- नुकसान का डर: घरों में भंडारण करने से नमी, चूहों और कीटों द्वारा फसल को नुकसान पहुँचने का लगातार खतरा बना रहता है।
- प्रशासनिक उपेक्षा: किसानों द्वारा बार-बार गुहार लगाने के बावजूद इस कोल्ड स्टोर को शुरू करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
सलूणी (चंबा): मक्की की फसल के लिए संकट; 2016 से बंद पड़े कोल्ड स्टोर के कारण 25 पंचायतों के किसान परेशान
- छह साल मिला लाभ: वर्ष 2010 में शुरू हुए इस कोल्ड स्टोर का किसानों को लगभग छह साल तक पूरा लाभ मिला, जहां वे अपनी उपज और अनाज सुरक्षित रखते थे।
- 2016 से लगा ताला: वर्ष 2016 के बाद से यह कोल्ड स्टोर पूरी तरह बंद हो गया और तब से लेकर आज तक इसे दोबारा शुरू नहीं किया जा सका है।
- प्रभावित क्षेत्र: इस स्टोर के बंद होने से सलूणी क्षेत्र की करीब 25 पंचायतों के किसानों के सामने अपनी मक्की की तैयार फसल के भंडारण का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
“जो कोल्ड स्टोर कभी अन्नदाताओं के लिए वरदान साबित होता था, आज उसके मुख्य द्वार पर लटका ताला प्रशासनिक उदासीनता की कहानी बयां कर रहा है।”
विस्तृत विवरण और किसानों की समस्याएँ
- सुरक्षित भंडारण का अभाव: फसल पककर तैयार है, लेकिन भंडारण की उचित सुविधा न होने के कारण किसानों को अपनी मेहनत की फसल घरों या अन्य असुरक्षित स्थानों पर रखने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
- फसल खराब होने का खतरा: वर्ष 2016 से पहले किसान यहां अपनी उपज को लंबे समय तक सुरक्षित रख पाते थे, लेकिन अब सुविधा के अभाव में नमी और कीटों से फसल के खराब होने का लगातार डर बना रहता है।
- प्रशासनिक चुप्पी: किसानों द्वारा लंबे समय से इसकी सुध लेने की मांग की जा रही है, परंतु वर्षों बीत जाने के बाद भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया है।
सलूणी (चंबा): 2016 से बंद पड़े कोल्ड स्टोर से 25 पंचायतों के किसान परेशान, मक्की की फसल के भंडारण की बढ़ी चिंता
- छह साल मिला था लाभ: वर्ष 2010 में शुरू हुए इस कोल्ड स्टोर का किसानों को लगभग छह साल तक लाभ मिला, जहां वे अपनी उपज सुरक्षित रखते थे।
- 2016 से बंद: वर्ष 2016 के बाद से कोल्ड स्टोर पर ताला लटका हुआ है, जिससे सलूणी क्षेत्र की करीब 25 पंचायतों के किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
- फसल सुरक्षा का संकट: मक्की की फसल तैयार होने के बावजूद सुरक्षित भंडारण न मिलने से किसानों को फसल खराब होने का डर सता रहा है।
“जो कोल्ड स्टोर कभी किसानों के लिए वरदान था, आज उसकी बदहाली अन्नदाताओं के लिए बड़ी मुसीबत बन चुकी है।”
किसानों का दर्द और प्रमुख माँगे
- किसानों के नाम: क्षेत्र के किसान तेज सिंह, महिंद्र कुमार, धारो राम, देवराज शर्मा, कर्म चंद, बिहारी लाल और मोहन कुमार ने बताया कि इलाके की बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है।
- अनसुनी गुहार: किसानों ने कई बार संबंधित विभाग और एसडीएम सलूणी के समक्ष इस मामले को उठाया, लेकिन आश्वासन के बावजूद आज तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
- शीघ्र बहाली की मांग: किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि इस कोल्ड स्टोर को जल्द से जल्द दोबारा शुरू किया जाए ताकि उनकी मेहनत की फसल सुरक्षित रह सके।
सलूणी (चंबा): 2016 से बंद पड़े कोल्ड स्टोर पर टिकी किसानों की उम्मीदें, एसडीएम ने दिए जल्द शुरू करने के निर्देश
- 25 पंचायतों की समस्या: सलूणी क्षेत्र की करीब 25 पंचायतों के किसानों के सामने मक्की की तैयार फसल के भंडारण का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
- 2016 से है बंद: वर्ष 2010 में शुरू हुए इस कोल्ड स्टोर ने छह साल तक किसानों को लाभ दिया, लेकिन वर्ष 2016 से इस पर ताला लटका हुआ है।
- प्रशासन का आश्वासन: एसडीएम सलूणी ने मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित विभाग को कोल्ड स्टोर को जल्द दोबारा शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
“किसानों की वर्षों पुरानी मांग और प्रशासनिक आश्वासन के बीच अब यह देखना अहम होगा कि अन्नदाताओं को इस सुविधा का लाभ कब तक मिल पाता है।”
किसानों का दर्द और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
- कृषि पर निर्भरता: क्षेत्र के किसान तेज सिंह, महिंद्र कुमार, धारो राम, देवराज शर्मा, कर्म चंद, बिहारी लाल और मोहन कुमार ने बताया कि बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है। भंडारण सुविधा न होने से फसल के खराब होने का लगातार खतरा बना हुआ है।
- अनसुनी गुहार और प्रयास: किसानों ने पहले कई बार संबंधित विभागों के समक्ष यह मामला उठाया था और एसडीएम सलूणी से मिलकर इसे जल्द शुरू करने की मांग की थी।
- प्रशासनिक रुख: मामले पर संज्ञान लेते हुए एसडीएम सलूणी सुरेंद्र कुमार कटोच ने कहा कि कोल्ड स्टोर बंद होने का मामला उनके ध्यान में आया है। किसानों को इसका पूरा लाभ मिल सके, इसके लिए संबंधित विभाग को स्टोर को दोबारा शुरू करने के निर्देश दिए जाएंगे।
