हिमाचल: सरकार ने वीबी-जी राम जी में बदलाव, अब आपदा के कार्य हो सकेंगे, इतनी मिलेगी दिहाड़ी

आपदा प्रबंधन के कार्य भी अब ग्रामीण रोजगार योजना में होंगे शामिल

शिमला: सरकार ने विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) योजना में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्यों को भी योजना के दायरे में शामिल कर लिया है।

इस निर्णय के तहत अब प्राकृतिक आपदाओं की रोकथाम, राहत एवं पुनर्वास से संबंधित विभिन्न कार्यों को भी योजना के माध्यम से कराया जा सकेगा। सरकार का उद्देश्य आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों को गति देने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराना है।

हिमाचल सरकार का बड़ा फैसला: ग्रामीण रोजगार योजना में शामिल हुए आपदा प्रबंधन के कार्य

शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार ने विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) योजना में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्यों को भी इसके दायरे में शामिल कर लिया है। ग्रामीण विकास विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। नई व्यवस्था एक जुलाई से पूरे प्रदेश में लागू हो गई है।

नई अधिसूचना के अनुसार अब योजना के तहत भूस्खलन, बाढ़, बादल फटने और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों में राहत, पुनर्बहाली और पुनर्स्थापन से जुड़े कार्य कराए जा सकेंगे। इसके साथ ही जल संरक्षण, नालों की सफाई, ढलानों को सुरक्षित बनाने, क्षतिग्रस्त संपर्क मार्गों की मरम्मत तथा अन्य आपदा न्यूनीकरण कार्यों को भी प्राथमिकता के आधार पर शामिल किया गया है।

सरकार का मानना है कि इस निर्णय से एक ओर आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं पुनर्बहाली कार्यों में तेजी आएगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अतिरिक्त अवसर भी उपलब्ध होंगे।

मजदूरी में भी की वृद्धि

सरकार ने योजना के तहत मिलने वाली मजदूरी में भी वृद्धि की है। अनुसूचित क्षेत्रों में दिहाड़ी 375 रुपये जबकि गैर-अनुसूचित क्षेत्रों में 300 रुपये प्रतिदिन निर्धारित की गई है। पहले केंद्र सरकार मनरेगा में गैर जनजातीय क्षेत्र में 247 और जनजातीय क्षेत्रों के लिए 309 रुपये दिहाड़ी देती थी। इसके ऊपर प्रदेश सरकार दिहाड़ी को बढ़ाती है। वहीं, पहले पात्र परिवारों को अब 125 दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। इससे ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ने के साथ-साथ उन्हें अधिक समय तक रोजगार का अवसर मिलेगा। योजना में किए गए इन बदलावों से प्रदेश सरकार के वित्तीय दायित्व में भी वृद्धि होगी। ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग ने सभी जिला कार्यक्रम समन्वयकों, उपायुक्तों और संबंधित अधिकारियों को नई व्यवस्था के अनुरूप कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

सरकार ने गठित की थी कमेटी

मुख्यमंत्री ने योजना का अध्ययन कर सुझाव तैयार करने के लिए पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की थी। कमेटी की ओर से इसमें कुछ बदलाव किए गए। समिति में पंचायती राज विभाग के सचिव सी. पालरासू और निदेशक राघव शर्मा को भी सदस्य बनाया गया है। हिमाचल सरकार का कहना है कि वर्तमान स्वरूप में योजना के कई प्रावधान प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों और श्रमिकों की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं हैं। ग्रामीण श्रमिकों की आजीविका से जुड़े किसी भी विषय पर राज्य सरकार कोई समझौता नहीं करेगी।

हिमाचल में विकसित भारत जीरामजी लागू किया गया है। इसमें कुछेक बदलाव किए गए हैं। आपदा को जीरामजी में शामिल किया गया है। इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है। – सी. पालरासू, सचिव, ग्रामीण विकास विभाग

वीबी-जी रामजी पर कांग्रेस फैला रही भ्रम : जयराम

वहीं नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने वीबी-जी रामजी योजना को लेकर प्रदेश सरकार पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मनरेगा मजदूरों की दिहाड़ी घटने का दावा गलत है, क्योंकि अधिनियम की धारा-10 में मजदूरी मनरेगा से कम न होने का स्पष्ट प्रावधान है। उन्होंने मुख्यमंत्री और मंत्रियों से इस मुद्दे पर माफी मांगने की मांग की। ठाकुर ने कहा कि योजना में 100 की जगह 125 दिनों के रोजगार की गारंटी, रोजगार के अधिकार, पारदर्शी भुगतान और आपदा राहत कार्यों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिसका लाभ हिमाचल को मिलेगा। उन्होंने 16वें वित्त आयोग के तहत प्रदेश को 240.5 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी करने पर केंद्र का आभार जताया। उधर, धर्मशाला नगर निगम में भाजपा के मेयर व डिप्टी मेयर निर्वाचित होने पर जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार के दबाव और हथकंडों के बावजूद लोकतंत्र की जीत हुई है।

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