प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी अस्पतालों में खराब लिफ्टों पर जताई गंभीर चिंता, सुधार के दिए संकेत
प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के सरकारी अस्पतालों में खराब और लंबे समय से बंद पड़ी लिफ्टों के कारण मरीजों, बुजुर्गों, दिव्यांगों और उनके परिजनों को हो रही गंभीर परेशानियों पर कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने इस स्थिति को बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं है। लिफ्टों के खराब रहने से मरीजों को वार्डों, ओपीडी और अन्य विभागों तक पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे कई बार उनकी चिकित्सा में भी देरी हो जाती है।
कोर्ट ने आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों की समस्याओं पर जताई चिंता, तत्काल मरम्मत और नियमित रखरखाव के दिए निर्देश
कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले अधिकतर मरीज आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं और उनके लिए सीढ़ियां चढ़ना-उतरना बेहद मुश्किल और कभी-कभी खतरनाक भी साबित हो सकता है। खासकर आपात स्थिति में यह समस्या और भी गंभीर रूप ले लेती है। अदालत ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि वे तुरंत सभी खराब लिफ्टों की मरम्मत करवाएं और यह सुनिश्चित करें कि अस्पतालों में आने वाले किसी भी मरीज को इस तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े। साथ ही, नियमित निगरानी और रखरखाव की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
हिमाचल हाईकोर्ट सख्त: सरकारी अस्पतालों में खराब लिफ्टों पर सरकार को तुरंत सुधार के निर्देश
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के सरकारी अस्पतालों में खराब और लंबे समय से बंद पड़ी लिफ्टों के कारण मरीजों, बुजुर्गों और दिव्यांगों को हो रही गंभीर परेशानियों पर सख्त रुख अपनाते हुए विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने इस मामले को गंभीर जनहित से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि अस्पतालों में मूलभूत सुविधाओं की कमी किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है।
हाईकोर्ट का आदेश: सभी सरकारी अस्पतालों की लिफ्टों पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट और तत्काल सुधार के निर्देश
अदालत ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे प्रदेश के सभी बहुमंजिला सरकारी अस्पतालों की पूरी सूची तैयार करें और वहां उपलब्ध लिफ्टों की स्थिति, उनकी कार्यक्षमता और खराब पड़ी लिफ्टों के बारे में विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करें। कोर्ट ने यह भी कहा कि मरीजों की सुविधा और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: मरीजों की सुविधा के लिए समयबद्ध मरम्मत और नियमित निगरानी व्यवस्था अनिवार्य
खंडपीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि लिफ्टों के बंद रहने से विशेषकर बुजुर्ग, गंभीर मरीज और दिव्यांग व्यक्तियों को अस्पताल के विभिन्न विभागों तक पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जो कई बार इलाज में देरी का कारण भी बन सकता है। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि सभी खराब लिफ्टों की मरम्मत कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए नियमित निगरानी और रखरखाव की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
अगली सुनवाई 30 जून को, हाईकोर्ट सरकार की प्रगति रिपोर्ट पर करेगा विचार
मामले की अगली सुनवाई 30 जून को निर्धारित की गई है, जिसमें अदालत सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा अब तक की गई कार्रवाई की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट का अवलोकन करेगी। इस दौरान यह देखा जाएगा कि सरकारी अस्पतालों में खराब पड़ी लिफ्टों की मरम्मत और सुधार के निर्देशों का कितना पालन किया गया है।
हाईकोर्ट ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि मरीजों की सुविधा और सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा, इसलिए अगली सुनवाई में लिफ्टों की स्थिति सुधारने को लेकर उठाए गए कदमों की गंभीरता से समीक्षा की जाएगी।
