बनीखेत के गांवों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या: डिजिटल युग में भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित ग्रामीण
चंबा जिले के बनीखेत क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों में मोबाइल नेटवर्क की गंभीर समस्या ने लोगों का जीवन मुश्किल बना दिया है। नगर पंचायत बनीखेत के अंतर्गत आने वाले ढलोग, धारद, कलर, बैंस्का और फाटी जैसे गांवों के निवासी आज भी कमजोर और अस्थिर नेटवर्क से जूझ रहे हैं। डिजिटल युग में जहां संचार सुविधाएं जीवन का अहम हिस्सा बन चुकी हैं, वहीं इन गांवों के लोग आज भी बुनियादी मोबाइल नेटवर्क जैसी सुविधा से पूरी तरह वंचित हैं।
कमजोर नेटवर्क से जूझते ग्रामीण, कॉल करने के लिए गांव से दूर जाने की मजबूरी
ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर मोबाइल सिग्नल या तो बिल्कुल नहीं आता या इतना कमजोर होता है कि फोन कॉल करना भी मुश्किल हो जाता है। किसी से संपर्क करने के लिए लोगों को अपने गांव से दूर ऊंचाई वाले स्थानों या सड़कों की ओर जाना पड़ता है। इससे न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि कई बार जरूरी कार्य भी प्रभावित हो जाते हैं।
नेटवर्क समस्या से पढ़ाई और आपात सेवाएं प्रभावित, छात्रों व ग्रामीणों को बढ़ी परेशानी
इसके अलावा, आपातकालीन स्थितियों में यह समस्या और भी गंभीर रूप ले लेती है। बीमार व्यक्ति के लिए एंबुलेंस बुलाना हो या किसी अन्य आपदा की स्थिति में मदद मांगनी हो, नेटवर्क न होने के कारण समय पर संपर्क नहीं हो पाता, जिससे लोगों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडराता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभागों से कई बार इस समस्या के समाधान की मांग की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लगाए गए मोबाइल टावर भी पर्याप्त रूप से काम नहीं कर रहे या उनकी क्षमता बहुत सीमित है, जिसके कारण नेटवर्क की स्थिति में सुधार नहीं हो पा रहा है।
नेटवर्क समस्या के स्थायी समाधान की उठी मांग
स्थानीय निवासियों ने सरकार और दूरसंचार कंपनियों के प्रति गहरी नाराजगी और चिंता व्यक्त करते हुए इस गंभीर समस्या के त्वरित और स्थायी समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि वर्षों से चली आ रही इस नेटवर्क समस्या के कारण वे न केवल संचार सुविधाओं से वंचित हैं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी सेवाओं में भी पीछे रह गए हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है।
टावरों की कमी और खराब व्यवस्था पर सवाल, नेटवर्क मजबूत करने की उठी मांग
लोगों का मानना है कि क्षेत्र में या तो पर्याप्त मोबाइल टावर नहीं हैं या जो टावर मौजूद हैं, वे सही तरीके से कार्य नहीं कर रहे। ऐसे में उन्होंने सरकार और संबंधित दूरसंचार कंपनियों से नए टावर स्थापित करने के साथ-साथ मौजूदा नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड और मजबूत करने की मांग की है, ताकि हर गांव में बेहतर और स्थिर सिग्नल उपलब्ध हो सके।
डिजिटल सुविधाओं से जोड़ने की ग्रामीणों की उम्मीद
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि डिजिटल भारत की दिशा में बढ़ते देश में उन्हें भी समान सुविधाएं मिलनी चाहिए। वे चाहते हैं कि उनके बच्चे भी बिना किसी बाधा के ऑनलाइन शिक्षा प्राप्त कर सकें, और जरूरत पड़ने पर वे आसानी से स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य आपातकालीन सुविधाओं का लाभ उठा सकें। उनका मानना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान किया गया, तो न केवल उनका जीवन आसान होगा, बल्कि वे भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ पाएंगे।
टावरों की कमी और कमजोर नेटवर्क से बढ़ी परेशानी, सुधार की ग्रामीणों की मांग
क्षेत्र के लोगों का मानना है कि मोबाइल नेटवर्क की खराब स्थिति के पीछे मुख्य कारण पर्याप्त टावरों की कमी और मौजूदा टावरों का सही तरीके से काम न करना है। कई स्थानों पर लगे टावर या तो पूरी क्षमता से कार्य नहीं कर रहे या उनकी पहुंच सीमित है, जिससे दूर-दराज के गांवों तक सिग्नल नहीं पहुंच पाता। इसके चलते लोगों को रोजमर्रा के संचार कार्यों में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने सरकार और संबंधित दूरसंचार कंपनियों से मांग की है कि क्षेत्र में नए मोबाइल टावर लगाए जाएं और जो टावर पहले से मौजूद हैं, उन्हें तकनीकी रूप से उन्नत (अपग्रेड) किया जाए। उनका कहना है कि यदि नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जाए, तो हर गांव में बेहतर और स्थिर सिग्नल उपलब्ध कराया जा सकता है।
लोगों को उम्मीद है कि इस दिशा में जल्द ठोस कदम उठाए जाएंगे, जिससे उन्हें बेहतर संचार सुविधाएं मिल सकें और वे भी डिजिटल सेवाओं का पूरा लाभ उठा सकें।
