हिमाचल में होली कब है: होलिका दहन आज, शाम 6:22 से रात्रि 8:53 बजे तक रहेगा शुभ मुहूर्त; चंद्रग्रहण कल

Holi 2026: 2026 में होली कब मनाई जाएगी। होलिका दहन और रंग कब खेला जाएगा, इस बात की काफी चर्चा है। तो विस्तार से जानें हिमाचल प्रदेश में होलिका दहन कब है…

रंगों का पर्व होली देशभर में इस वर्ष 4 मार्च को मनाया जाएगा। गुलाल उड़ने से पहले होलिका दहन 2 मार्च को होगा। इस वर्ष होलिका दहन का शुभ मुहूर्त सोमवार शाम 6:22 से रात्रि 8:53 बजे तक रहेगा। शहर के गंज बाजार के राधा-कृष्ण मंदिर में होलिका दहन का कार्यक्रम शाम 7:00 बजे शुरू होगा। इस अवसर पर मंदिर में होलिका और प्रह्लाद के प्रतीकात्मक पुतले भी रखे जाएंगे। इसके बाद परंपरानुसार प्रह्लाद के पुतले को हटाया जाएगा और होलिका दहन होगा। 

श्री सनातन धर्म सभा के राधा कृष्ण मंदिर में होली का त्योहार धूमधाम से मनाया जाएगा। दो मार्च को शाम 7:00 बजे होलिका दहन का कार्यक्रम होगा। स्थानीय लोगों की ओर से पूजन किया जाएगा। इसके बाद मंदिर परिसर में होलिका दहन होगा। होलिका और प्रह्लाद का पुतला रखा जाएगा। पूजन के बाद प्रह्लाद का पुतला हटाकर होलिका का दहन किया जाएगा।  कार्यक्रम में सभा के प्रधान अजय सूद, सचिव धर्म पॉल पूरी सहित सभी सदस्य शामिल होंगे। सभा के प्रचार मंत्री सुमन पॉल दत्ता ने बताया कि सनातन धर्म सभा के एसडी विद्यालय में सोमवार को पहली से लेकर पांचवीं कक्षा के विद्यार्थियों को सभा प्रबंधन की ओर से किताबें निशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी।


चंद्रग्रहण कल; 9 घंटे पहले लगेगा सूतक, मांगलिक कार्य वर्जित
इस साल का पहला चंद्रग्रहण तीन मार्च को लगेगा। ग्रहण के 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाएगा जिसमें सभी मांगलिक कार्य वर्जित होंगे। चंद्रग्रहण की शुरूआत मंगलवार दोपहर 3:20 बजे से होगी और शाम को 6:46 बजे समापन होगा। वहीं सूतक काल नौ घंटे पहले सुबह 6:20 बजे शुरू होगा। साल का पहला चंद्रग्रहण है जो सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में जगह बनाएगा। यह चंद्रग्रहण पूरे भारत में दिखाई देने वाला है। इसलिए इसका महत्व और भी बढ़ गया है।

गंज बाजार के राधा-कृष्ण मंदिर के पंडित उमेश नौटियाल ने बताया कि भारतीय समयानुसार वर्ष के पहले चंद्रग्रहण की अवधि 3 घंटे 27 मिनट होगी। तीन मार्च को लगने वाले चंद्रग्रहण के सूतक काल में शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। इस दौरान मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं ताकि पूजा करने वाले लोग भगवान की प्रतिमा और शुभ चिह्नों को स्पर्श न कर सकें। बताया कि इस समय खाना पकाना या भोजन करना भी वर्जित होता है। इसमें पूजा, हवन यज्ञ और नए काम की शुरुआत नहीं करनी चाहिए। सूतक काल से पहले अपने घर में मौजूद तरल पदार्थों जल, दूध, घी, तेल, अचार, शहद में कुशा और तुलसी डालना अच्छा होता है।



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