2026 में भारत में कई अहम चुनाव होने वाले हैं। चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके साथ ही राज्यसभा की 75 सीटों के लिए भी चुनाव होना है।
2025 में दो राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए। साल की शुरुआत में दिल्ली तो साल के आखिर में बिहार में विधानसभा के चुनाव हुए। दिल्ली में भाजपा 27 साल बाद सत्ता में लौटी तो बिहार में नीतीश का राज बरकरार रहा। नए साल की दस्तक के साथ विधानसभा चुनाव का दौर शुरू हो जाएगा। 2026 में ये चुनावी हलचल 2025 के मुकाबले ज्यादा रहेगी। 2026 में कहां-कहां और कब चुनाव होने वाले हैं? इन राज्यों में पिछले चुनावों में क्या हुआ था? फिलहाल वहां समीकरण कैसे हैं? आइये जानते हैं…
भारत में 2026 में कहां-कब चुनाव?
1. विधानसभा चुनाव
| राज्य/केंद्र शासित प्रदेश | सीटें | स्थिति |
| पश्चिम बंगाल | 294 | ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस सत्ता में। |
| केरल | 140 | माकपा के नेतृत्व वाला एलडीएफ की सरकार। |
| तमिलनाडु | 234 | द्रमुक के एमके स्टालिन अभी सत्ता में। |
| असम | 126 | भाजपा पिछले 10 साल से सत्ता पर काबिज। |
| पुडुचेरी | 30 | AINRC–BJP गठबंधन के एन. रंगसामी सत्ता में। |
2. राज्यसभा चुनाव
2026 में अलग-अलग समय पर राज्यसभा की कुल 73 सीटें खाली हो रही हैं। सबसे ज्यादा 37 सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल महीने में समाप्त होगा। इनमें से 22 सदस्य 2 अप्रैल को रिटायर हो रहे हैं। वहीं, 15 सदस्य 9 अप्रैल को रिटायर होंगे। इसी तरह जून में 22 सांसदों का कार्यकल खत्म हो रहा है। इनमें से 17 सदस्य 21 जून को चार 25 जून और एक सदस्य 23 जून को रिटायर होंगे। वहीं, 11 राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल नवंबर महीने में पूरा होगा। ये सभी 25 नवंबर को रिटायर होंगे। इन 70 सदस्यों के अलावा दो अन्य सदस्यों का कार्यकाल भी 2026 में समाप्त होगा। इनमें पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई 16 मार्च 2026 को सेवानिवृत्त होंगे। वहीं, मिजोरम से एमएएफ के सांसद के. वनलालवेना 19 जुलाई 2026 को रिटायर होंगे। इसके साथ ही एक रिक्त सीट पर भी 2026 में ही चुनाव होगा। ये सीट झारखंड से राज्यसभा सदस्य रहे राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के निधन के वजह से रिक्त पड़ी है।
इन चुनावों पर भी रहेगी सबकी नजर
महाराष्ट्र में साल की शुरुआत में ही नगरीय निकाय चुनाव होने हैं। इनमें एशिया के सबसे बड़े नगर निगम बीएमसी के चुनावों पर सबकी नजर रहेगी। इसके साथ ही पुणे नगर निगम के चुनाव के लिए बन रहे गठजोड़ों की वजह से ये चुनाव भी दिलचस्प होंगे। राज्य चुनाव आयोग का लक्ष्य है कि नगर निगमों, जिला परिषदों और पंचायत समितियों के लिए चरणबद्ध चुनाव जनवरी 2026 के मध्य तक पूरे हो जाएं।
लोकसभा और विधानसभा सीटों के लिए उप-चुनाव भी
पश्चिम बंगाल की बशीरहाट लोकसभा सीट इस वक्त खाली है। ये सीट टीएमसी के सांसद हाजी नूरूल इस्लाम के निधन की वजह से रिक्त हुई है। इस्लाम की इसी साल 25 सितंबर को निधन हो गया था। यहां भी जल्द ही चुनाव का एलान हो सकता है। इसी तरह कई राज्यों में विधानसभा सीटों को भरने के लिए उपचुनाव भी निर्धारित हैं जो मौजूदा विधायकों के निधन के कारण खाली हुई हैं। इनमें गोवा में पोंडा, कर्नाटक में बागलकोट, महाराष्ट्र में राहुरी, मणिपुर में ताडुबी, और नागालैंड में कोरिडांग सीट शामिल हैं। हालांकि, इन उपचुनावों के लिए आधिकारिक चुनाव तिथियों की घोषणा अभी तक नहीं हुई है।
अब जानें- चुनावी राज्यों में पिछले चुनावों में क्या रहे थे नतीजे?
पश्चिम बंगाल: पश्चिम बंगाल की मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 7 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। राज्य में मार्च से मई के बीच चुनाव होने की उम्मीद है। 294 सीटों वाली बंगाल विधानसभआ में 2021 के चुनाव में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने 215 सीटें जीती थीं। पार्टी को लगभग 48% वोट शेयर मिला था। 77 सीटें जीतकर भारतीय जनता पार्टी दूसरे नंबर पर रही थी। पार्टी को लगभग 38% वोट मिले थे। 2016 में जीती गई केवल तीन सीटों की तुलना में एक बड़ी छलांग थी।
पिछले करीब 15 साल से सत्ता में काबिज तृणमूल के लिए सत्ता विरोधी लहर को संभालना सबसे बड़ी चुनौती होगा। भाजपा के लिए 2026 का चुनाव यह परखेगा कि 2021 में उसे मिली 77 सीटों का उछाल एक अस्थायी उभार था या बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के प्रभुत्व के लिए एक स्थायी चुनौती की शुरुआत थी। कांग्रेस और लेफ्ट एक बार फिर अपनी खोई राजनीतिक जमीन को वापस पाने की कोशिश करेंगे।
2026 के चुनाव में क्या दांव पर?
2026 के चुनाव में एलडीएफ लगातार तीसरी बार चुनाव जीतने की कोशिश करेगा। ऐसा होता है तो ये रिकॉर्ड होगा। केरल के लोकतांत्रिक इतिहास में एलडीएफ ने कभी भी लगातार तीन विधानसभा चुनाव नहीं जीते हैं। मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ‘विकास के लिए निरंतरता’ की थीम पर प्रचार कर रहे हैं। हालांकि, एलडीएफ को सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ अपनी जमीन वापस हासिल करने की कोशिश करेगा। हाल ही में केरल में हुए नगरपालिका चुनावों के नतीजे से यूडीएफ के लिए उम्मीद जगाने वाले रहे हैं। भाजपा ने केरल में विधायक न होने के बावजूद लगातार सियासी आक्रामकता दिखाई है। तिरुवनंतपुरम के नगरपालिका चुनाव में पार्टी ने एलडीएफ से सत्ता भी छीनी है और मेयर पद पर अपने विजयी प्रत्याशी को बिठाया। ऐसे में भाजपा भी केरल में नई शुरुआत की उम्मीद कर रही है।
तमिलनाडु: तमिलनाडु की मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 10 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। अभी यहां द्रविड़ मुनेत्र कझगम (डीएमके) के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार सत्ता में है। 234 सदस्यों वाली विधानसभा में उसे 2021 में 133 सीटें मिलीं थीं। अन्य सहयोगियों के साथ ये आंकड़ा 159 सीट तक पहुंच गया था। वहीं, भाजपा और एआईएडीमके और अन्य सहयोगियों वाले गठबंधन को 75 सीट से संतोष करना पड़ा था।
2026 के चुनाव में क्या दांव पर?
इस बार के चुनाव में अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके की एंट्री सियासी समीकरणों को बदल सकती है। द्रमुक के लिए सत्ता विरोधी लहर का मुकाबला करना चुनौती होगी। वहीं, जयललिता का निधन के बाद बिखरी हुई एआईएडीएमके के लिए वापस जमीन पाने की कोशिश करेगी। मुख्यमंत्री स्टालिन ने घोषणा की है कि द्रमुक विपक्षी गठबंधन (इंडिया ब्लॉक) के हिस्से के रूप में राज्य में चुनाव लड़ेगी, जिसे उन्होंने साझा लक्ष्यों पर बना एक वैचारिक गठबंधन बताया है।
एआईएडीएमके नेता पलानीस्वामी ने दावा किया है कि उनका मोर्चा 200 सीटों पर स्टालिन के सपने को चकनाचूर कर देगा और भविष्यवाणी की है कि गठबंधन 210 का आंकड़ा पार कर सकता है। अभिनेता विजय की पार्टी, तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) का तमिलनाडु के सियासी परिदृश्य में उतरना इस चुनावी समीकरण को संभावित रूप से बदल सकता है। यह चुनाव टीवीके के लिए एक अहम राजनीतिक शुरुआत होगी। विजय ने इस मुकाबले को टीवीके बनाम द्रमुक की लड़ाई के रूप में घोषित किया है और खुद को स्टालिन के विकल्प के रूप में पेश किया है।
असम: असम की मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 20 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन को राज्य की 126 सीटों में से 75 सीटों पर जीत मिली थी। इनमें से 60 सीटें अकेले भाजपा के खाते में गईं थीं। कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन महाजोत को इस चुनाव में 50 सीटें मिली थीं। इनमें कांग्रेस को 29, बदरुद्दीन अजमल की एआईयूडीएफ को 16 सीटें सीटें मिलीं थीं।
2026 में क्या दांव पर?
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व में एनडीए राज्य में अपनी सत्ता बरकरार रखने की कोशिश करेगा। हालांकि, 10 साल के शासन की वजह से पैदा हुई सत्ता विरोधी लहर उनके लिए बड़ी चुनौती होगी। हालांकि, मुख्यमंत्री सरमा ने दावा किया है कि इस चुनाव में एनडीए 126 सीटों में से 104 सीटें जीत सकता है। कांग्रेस ने इस चुनाव में गौरव गोगोई को नेतृत्व सौंपा है। पार्टी को एंटी-इन्कंबेंसी का फायदा मिलने की उम्मीद है। बदरुद्दीन अजमल की एआईयूडीएफ ने 2021 में 16 सीटें जीती थीं, लेकिन कांग्रेस के साथ गठबंधन टूटने या अकेले चुनाव लड़ने से विपक्ष के वोट विभाजित हो सकते हैं, जिससे त्रिकोणीय लड़ाई में भाजपा को फायदा मिल सकता है।
5. पुडुचेरी
पुडुचेरी: पुडुचेरी में 2026 के विधानसभा चुनाव मार्च और मई 2026 के बीच होने हैं, जिसमें इस केंद्र शासित प्रदेश की 30 सीटों पर मतदान होगा। इस केंद्र शासित प्रदेश में मौजूदा समय में एन रंगसामी के नेतृत्व वाला एआईएनआरसी-भाजपा गठबंधन सत्ता में है। 2021 में एआईएनआरसी ने 10 सीटें और भाजपा ने 6 सीटें जीती थीं।
2026 में क्या दांव पर?
सत्ताधारी एनडीए गठबंधन, जिसका नेतृत्व ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस और भाजपा करती है, को एक नाजुक गठबंधन बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। यह गठबंधन अंदरूनी कलह और सत्ता विरोधी लहर के कारण दबाव में है। हाल ही में पुडुचेरी के एकमात्र दलित मंत्री एके साई जे सरवनन कुमार के इस्तीफे ने गठबंधन के भीतर गहरे मतभेदों को उजागर कर दिया, जिससे स्थानीय भाजपा इकाई और व्यापक गठबंधन में दरारें सामने आ गईं।
दूसरी तरफ इस केंद्र शासित प्रदेश में द्रविड़ मुनेत्र कझगम (द्रमुक) भी अपनी ताकत आजमाने की कोशिश में जुटी है। 2021 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने सीमित जमीनी उपस्थिति के बावजूद छह सीटें जीती थीं और वह सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी बनकर उभरी। द्रमुक के इस प्रदर्शन के बाद सबसे ज्यादा सवाल कांग्रेस पर उठे, जो कि 2026 के चुनाव में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ेगी।
