युवती के पिता ने मीडिया के सामने किया बड़ा खुलासा, कहा-विधायक के लाेगाें ने किडनैप कर बयान बदलने को किया मजबूर

हिमाचल प्रदेश में चल रहे एक हाई-प्रोफाइल विवाद ने अब सनसनीखेज मोड़ ले लिया है। जिस युवती ने कुछ समय पहले एक विधायक पर गंभीर आरोप लगाए थे, अब उसी मामले में उसके पिता ने मीडिया के सामने बड़ा खुलासा कर पूरे प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। पिता का कहना है कि उनकी बेटी का अपहरण विधायक से जुड़े लोगों ने किया और उस पर जबरन बयान बदलवाने का दबाव बनाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बेटी को कई दिनों तक एक गुप्त स्थान पर रखा गया, जहां उसे धमकाया गया, डराया गया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया ताकि वह पहले दिए गए अपने बयानों से पलट जाए। पिता ने कहा कि उन्हें और उनके परिवार को लगातार धमकियां दी जा रही हैं कि अगर उन्होंने यह मामला आगे बढ़ाया या मीडिया से बात की तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। पिता के अनुसार, बेटी को झूठ बोलने के लिए मजबूर किया गया और यह कहा गया कि अगर वह विधायक के खिलाफ दिए बयान से पीछे नहीं हटी तो पूरे परिवार को नुकसान पहुंचाया जाएगा।

उन्होंने बताया कि जिस दिन युवती को अगवा किया गया, उस समय उन्होंने पुलिस को तुरंत इसकी सूचना दी थी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। पिता का आरोप है कि पुलिस अधिकारी भी सत्ता के दबाव में हैं और उन्होंने इस मामले को जानबूझकर नजरअंदाज किया। उन्होंने कहा कि न्याय मांगना अब उनके लिए एक संघर्ष बन गया है और पूरा परिवार भय के माहौल में जी रहा है। पिता ने कहा कि उन्होंने कई बार प्रशासन से सुरक्षा की मांग की लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने यह भी बताया कि बेटी अब भी मानसिक रूप से डरी हुई है और लगातार डर के साए में जी रही है।

मीडिया से बातचीत के दौरान पिता कई बार भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि “हम गरीब लोग हैं, हमारे पास न ताकत है, न पहुंच, लेकिन हम सच के लिए लड़ेंगे।” उन्होंने कहा कि उनकी बेटी पर जो जुल्म हुआ है, वह किसी भी लड़की के साथ नहीं होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी, जैसे सीबीआई, से करवाई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

इस खुलासे के बाद पूरे प्रदेश में हलचल मच गई है। विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि सत्ता में बैठे लोग अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर न्याय व्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं। विपक्ष ने मांग की है कि मुख्यमंत्री खुद इस मामले में हस्तक्षेप करें और पीड़ित परिवार को सुरक्षा प्रदान करें। विपक्षी नेताओं ने कहा कि अगर यह आरोप सही साबित होता है तो यह केवल एक परिवार के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे लोकतंत्र के खिलाफ अपराध है।

वहीं, ruling पार्टी के नेताओं ने कहा है कि यह मामला राजनीति से प्रेरित है और विपक्ष इसे सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए तूल दे रहा है। विधायक ने खुद एक बयान जारी कर कहा है कि उन पर लगाए गए सभी आरोप झूठे और बेबुनियाद हैं। उन्होंने कहा कि यह सब उनकी छवि खराब करने की साजिश है। विधायक ने कहा कि उनके खिलाफ झूठा प्रचार किया जा रहा है और जल्द ही वे सबूतों के साथ सच्चाई सामने लाएंगे।

उधर, सामाजिक संगठनों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। महिला आयोग की पूर्व सदस्य ने कहा कि अगर युवती को बयान बदलवाने के लिए मजबूर किया गया है, तो यह कानूनन अपराध है और आरोपी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे सजा मिलनी चाहिए। मानवाधिकार संगठन ने भी सरकार से रिपोर्ट तलब की है और पीड़िता को मनोवैज्ञानिक और कानूनी सहायता देने की सिफारिश की है।

प्रदेश भर में इस घटना को लेकर लोगों में आक्रोश फैल गया है। कई जगहों पर प्रदर्शन हुए, लोगों ने न्याय की मांग करते हुए नारे लगाए और पीड़ित परिवार के समर्थन में रैलियां निकालीं। सोशल मीडिया पर #JusticeForGirl और #StopPoliticalPressure जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या सत्ता के प्रभाव के आगे एक आम नागरिक की आवाज इतनी कमजोर हो गई है कि वह अपना सच भी नहीं कह सकता।

इस बीच पुलिस ने बयान जारी कर कहा है कि वह मामले की गहराई से जांच कर रही है और सभी पहलुओं की जांच की जाएगी। पुलिस सूत्रों का कहना है कि कुछ लोगों से पूछताछ की जा रही है और सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि अगर किसी भी व्यक्ति के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिले तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। गृह विभाग ने भी पुलिस को निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं।

मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से बयान आया है कि अगर किसी ने भी पीड़िता पर बयान बदलवाने का दबाव बनाया है, तो उसे किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार न्याय के प्रति प्रतिबद्ध है और किसी भी प्रकार की राजनीतिक हस्तक्षेप की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि पीड़ित परिवार को पूर्ण सुरक्षा दी जाए और मामले की हर प्रगति की रिपोर्ट सीधे उनके कार्यालय को भेजी जाए।

वहीं, स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह मामला केवल एक परिवार का नहीं बल्कि पूरे समाज की सुरक्षा और न्याय प्रणाली पर सवाल है। लोगों ने कहा कि ऐसी घटनाएं समाज के भरोसे को तोड़ती हैं और लोगों का विश्वास प्रशासन से उठता जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि यह मामला न्याय प्रणाली में व्याप्त राजनीतिक प्रभाव का एक उदाहरण है और इसे पारदर्शी तरीके से सुलझाना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

युवती के पिता ने कहा कि वे अब पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि चाहे उन्हें कितनी भी मुश्किलें क्यों न झेलनी पड़ें, वे अपनी बेटी को न्याय दिलाकर रहेंगे। उन्होंने जनता से भी अपील की कि वे उनके साथ खड़े रहें क्योंकि यह लड़ाई केवल एक परिवार की नहीं बल्कि हर उस व्यक्ति की है जो सच बोलने की हिम्मत रखता है।

वर्तमान में प्रशासन ने युवती और उसके परिवार की सुरक्षा बढ़ा दी है। उनके घर के बाहर पुलिस तैनात कर दी गई है। हालांकि, परिवार का कहना है कि उन्हें अब भी खतरे का एहसास है और वे चाहते हैं कि जब तक मामला पूरी तरह सुलझ नहीं जाता, तब तक उन्हें सुरक्षा दी जाए।

प्रदेश के राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी हलकों में यह मामला चर्चा का केंद्र बना हुआ है। हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर इस विवाद की सच्चाई क्या है और क्या वास्तव में एक युवती को सत्ता के दबाव में झुकाया गया। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि हिमाचल में न्याय का सूरज फिर चमकेगा या सत्ता की छाया में सच एक बार फिर दब जाएगा।

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