हिमाचल सरकार ने तीन माह बाद वापस लिया वेतन स्थगन का फैसला, जुलाई में मिलेगा एरियर सहित पूरा वेतन
शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार ने मंत्रियों, विधायकों, मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) और उपायुक्तों (DC) के वेतन का एक हिस्सा छह माह तक स्थगित रखने के अपने निर्णय को निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले ही वापस ले लिया है। सरकार ने यह फैसला केवल तीन माह बाद ही रद्द कर दिया है।
अब संबंधित पदाधिकारियों को जुलाई माह में अप्रैल, मई और जून के बकाया एरियर के साथ पूरा वेतन जारी किया जाएगा। सरकार के इस निर्णय से मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को राहत मिलेगी।
गौरतलब है कि राज्य की वित्तीय स्थिति को देखते हुए सरकार ने कुछ माह पहले वेतन का एक हिस्सा छह माह तक स्थगित रखने का निर्णय लिया था। हालांकि, वित्तीय हालात में सुधार और अन्य प्रशासनिक कारणों को ध्यान में रखते हुए इस व्यवस्था को समय से पहले समाप्त करने का फैसला लिया गया है।
सरकार के नए आदेश के अनुसार, जुलाई के वेतन के साथ पिछले तीन महीनों का बकाया भुगतान भी संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के खातों में जमा किया जाएगा।
तीन माह में बदला फैसला, मंत्रियों-विधायकों समेत वरिष्ठ अधिकारियों को मिलेगा पूरा वेतन
शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार ने मंत्रियों, विधायकों, मुख्य सचिव (सीएस), अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) और उपायुक्तों (डीसी) का वेतन छह माह तक स्थगित रखने के अपने फैसले को महज तीन माह में ही वापस ले लिया है। अब इन सभी को जुलाई माह में अप्रैल, मई और जून के एरियर के साथ पूरा वेतन जारी किया जाएगा।
रविवार को सचिवालय में आयोजित वित्त विभाग की बैठक में मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu ने यह निर्णय लिया। सरकार के इस फैसले से मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को राहत मिलेगी।
गौरतलब है कि राज्य की वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कुछ समय पहले इन पदाधिकारियों के वेतन का एक हिस्सा छह माह तक स्थगित करने का निर्णय लिया था। हालांकि अब सरकार ने निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले ही इस व्यवस्था को समाप्त करने का फैसला किया है।
नए निर्णय के अनुसार, जुलाई माह के वेतन के साथ अप्रैल, मई और जून का बकाया एरियर भी संबंधित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को एक साथ प्रदान किया जाएगा।
आर्थिक सुधार के लिए लिया था फैसला, तीन माह बाद वापस
मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति को पटरी पर लाने के उद्देश्य से बजट भाषण के दौरान मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों के वेतन में कटौती एवं आंशिक स्थगन का निर्णय लिया था। यह व्यवस्था 1 अप्रैल से लागू की गई थी।
इसके तहत मुख्यमंत्री के वेतन का 50 प्रतिशत, विधानसभा अध्यक्ष और मंत्रियों का 30 प्रतिशत तथा विधायकों का 20 प्रतिशत वेतन छह माह तक स्थगित रखने का फैसला किया गया था। वहीं मुख्य सचिव से लेकर सचिव स्तर तक के अधिकारियों के वेतन का 30 प्रतिशत और इससे नीचे की विभिन्न श्रेणियों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के वेतन का 20 से 3 प्रतिशत तक हिस्सा छह माह के लिए स्थगित किया गया था।
हालांकि सरकार ने 15 अप्रैल को ही क्लास-ए और क्लास-बी अधिकारियों के वेतन कटौती संबंधी निर्णय को वापस ले लिया था। अब मंत्रियों, विधायकों, मुख्य सचिव, एसीएस और उपायुक्तों के वेतन स्थगन का फैसला भी तीन माह बाद समाप्त कर दिया गया है। इसके तहत जुलाई में अप्रैल, मई और जून का बकाया एरियर जारी करते हुए पूरा वेतन दिया जाएगा।
आर्थिक सुधारों से सुधरी वित्तीय स्थिति : मुख्यमंत्री सुक्खू
रविवार को लिए गए फैसले के संबंध में मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu ने राज्य सचिवालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जिस व्यवस्था परिवर्तन की शुरुआत की गई थी, हिमाचल उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा राज्य का राजस्व घाटा अनुदान (Revenue Deficit Grant) रोके जाने के बावजूद प्रदेश सरकार के आर्थिक सुधारों का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है और राज्य की वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए सरकार को कुछ कठिन निर्णय लेने पड़े, जिनसे कर्मचारियों और अधिकारियों को अस्थायी असुविधा हुई, लेकिन यह कदम लंबे समय के लिए नहीं थे।
सीएम सुक्खू ने कहा कि सरकार के आर्थिक सुधारों और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के कारण अब वित्तीय हालात पहले की तुलना में मजबूत हुए हैं, जिसके चलते वेतन स्थगन संबंधी फैसलों को वापस लेने का निर्णय लिया गया है।
सीएम ने कहा कि आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए भ्रष्टाचार के चोर दरवाजे बंद किए हैं। बिजली बोर्ड को 2,200 करोड़ की ग्रांट देते थे। अब 1,000 करोड़ दे रहे हैं। पहले एक परिवार दस-दस मीटरों पर सब्सिडी लेता था। अब सरकार ने दो मीटर पर ही 125-125 यूनिट का लाभ देने का प्रावधान किया।
65 से 70 आयुवर्ग के पेंशनरों को जुलाई में मिलेगा संशोधित पेंशन का पूरा एरियर
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने रविवार को वित्त विभाग की बैठक में 65 से 70 वर्ष आयुवर्ग के पेंशनरों को नए वेतनमान लागू होने के बाद से संशोधित पेंशन का पूरा एरियर जारी करने का निर्देश दिया है। यह एरियर अगले महीने मिलेगा। सीएम ने कहा कि इसके लिए राशि सरकार देगी। कर्मचारियों के लंबित एरियर और महंगाई भत्ते की समीक्षा करते हुए सीएम ने कहा कि कर्मचारी राज्य की रीढ़ हैं। सरकार ने पुरानी पेंशन योजना बहाल की है।
वहीं हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) पेंशनर्स ज्वाइंट एक्शन कमेटी के पदाधिकारियों के साथ सीएम ने बैठक में फैसला किया कि निगम पेंशनरों को प्रत्येक माह की 7 से 10 तारीख के बीच पेंशन जारी की जाएगी। इसके लिए सरकार हर माह 23 करोड़ रुपये ग्रांट देगी। सीएम ने कहा कि एचआरटीसी का राज्य के विकास में उल्लेखनीय योगदान है। पूर्व और वर्तमान कर्मचारी निगम को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
उन्होंने निगम प्रबंधन को निर्देश दिए कि अक्तूबर 2025 के बाद सेवानिवृत्त उन कर्मियों को शीघ्र पेंशन लाभ दें, जिनकी पेंशन शुरू नहीं हुई। सीएम ने एचआरटीसी के लंबित चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों के निपटारे के लिए 20 करोड़ जारी करने की घोषणा की।
सीएम बोले कि एचआरटीसी को प्रतिवर्ष लगभग 1,500 करोड़ रुपये प्राप्त होते हैं, जिनमें लगभग 800 करोड़ निगम की आय तथा 720 करोड़ सरकार से ग्रांट के रूप में प्राप्त होते हैं। एचआरटीसी करीब 3,000 बसों का संचालन करता है और इस पर भारी व्यय होता है, जिससे निगम का वित्तीय बोझ बढ़ता है। सीएम ने लीव इन कैशमेंट व ग्रैच्युटी तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पेंशनरों की राशि व पेंशनरों का सेवाकाल के दौरान रात्रि भत्ता व ओवरटाइम नियमित कर्मियों से अलग से सरकार को भेजने के निर्देश दिए।
