अटल टनल पर बढ़ा ट्रैफिक और प्रदूषण का दबाव, क्षमता से दोगुने वाहन गुजर रहे
मनाली: सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण Atal Tunnel बढ़ते ट्रैफिक और प्रदूषण के दबाव का सामना कर रही है। प्रतिदिन लगभग 4,500 वाहनों की डिजाइन क्षमता वाली इस सुरंग से पर्यटन सीजन के दौरान क्षमता से दोगुने से भी अधिक वाहन गुजर रहे हैं।
वाहनों की बढ़ती आवाजाही के कारण सुरंग के भीतर धुएं का स्तर लगातार बढ़ रहा है। इसके साथ ही टनल की दीवारों पर कार्बन की परत जमने की समस्या भी सामने आई है, जो पर्यावरणीय और रखरखाव दोनों दृष्टियों से चिंता का विषय बनती जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वाहनों की संख्या इसी तरह बढ़ती रही तो सुरंग के वेंटिलेशन सिस्टम और अन्य बुनियादी ढांचे पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। पर्यटन सीजन में बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए संबंधित एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और आवश्यक प्रबंधन उपायों पर विचार कर रही हैं।
अटल टनल पर बढ़ा ट्रैफिक और प्रदूषण का दबाव, वाहनों की संख्या सीमित करने की तैयारी
मनाली: सामरिक और रणनीतिक दृष्टि से देश की सबसे महत्वपूर्ण सुरंगों में शामिल Atal Tunnel अब बढ़ते ट्रैफिक और प्रदूषण के दबाव से जूझ रही है। क्षमता से दोगुना से अधिक वाहनों की आवाजाही के कारण सुरंग के भीतर धुएं का स्तर लगातार बढ़ रहा है, जबकि दीवारों पर कार्बन की मोटी परत जमने लगी है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह केवल यातायात का मुद्दा नहीं है, बल्कि टनल की दीर्घायु, सुरक्षा व्यवस्था और आपदा प्रबंधन से जुड़ा गंभीर विषय बन चुका है। लगातार बढ़ रहे वाहनों के दबाव से सुरंग के वेंटिलेशन सिस्टम और अन्य तकनीकी ढांचे पर भी अतिरिक्त भार पड़ रहा है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए लाहौल-स्पीति और कुल्लू जिला प्रशासन ने सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के साथ मिलकर अटल टनल से गुजरने वाले वाहनों की संख्या निर्धारित करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत पर्यटन सीजन और व्यस्त दिनों में यातायात प्रबंधन के लिए विशेष व्यवस्था लागू की जा सकती है।
प्रशासन का मानना है कि सुरंग की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और दीर्घकालिक संचालन को सुनिश्चित करने के लिए वाहनों की संख्या को नियंत्रित करना आवश्यक हो गया है। इस संबंध में जल्द ही विस्तृत योजना तैयार कर लागू किए जाने की संभावना है।
डिजाइन क्षमता से कई गुना अधिक ट्रैफिक, बढ़ीं सुरक्षा और प्रदूषण की चुनौतियां
अटल टनल का निर्माण प्रतिदिन लगभग 4,500 वाहनों की डिजाइन क्षमता को ध्यान में रखकर किया गया था, जिसमें 3,000 हल्के और 1,500 भारी वाहन शामिल हैं। लेकिन पर्यटन सीजन के दौरान वाहनों की संख्या निर्धारित क्षमता से कई गुना अधिक पहुंच जाती है।
वाहनों की लगातार बढ़ती आवाजाही के कारण सुरंग के भीतर प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। इसके साथ ही यातायात जाम, सड़क सुरक्षा और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की चुनौतियां भी गंभीर होती जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षमता से अधिक ट्रैफिक का दबाव सुरंग के संचालन, रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
इसी वजह से प्रशासन और संबंधित एजेंसियां टनल में वाहनों की संख्या नियंत्रित करने तथा यातायात प्रबंधन को और प्रभावी बनाने के विकल्पों पर विचार कर रही हैं, ताकि सुरंग की सुरक्षा और दीर्घकालिक उपयोगिता सुनिश्चित की जा सके।
पर्यटन बढ़ने से बढ़ा ट्रैफिक दबाव, प्रशासन ने जताई चिंता
अटल टनल के निर्माण के बाद लाहौल घाटी में पर्यटन गतिविधियों में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। पहले रोहतांग दर्रा बंद होने के बाद नवंबर से अप्रैल तक घाटी लगभग यातायात से मुक्त रहती थी, लेकिन अब सर्दियों के मौसम में भी प्रतिदिन हजारों वाहन टनल से होकर गुजर रहे हैं।
प्रशासन का मानना है कि वाहनों की अनियंत्रित बढ़ोतरी भविष्य में पर्यावरणीय दबाव बढ़ाने के साथ-साथ संभावित आपदाओं का कारण भी बन सकती है। लगातार बढ़ रहा ट्रैफिक सुरंग की क्षमता, सुरक्षा व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण के लिए चुनौती बनता जा रहा है।
लाहौल-स्पीति की उपायुक्त Kiran Bhadana ने कहा कि अटल टनल में क्षमता से अधिक वाहनों की आवाजाही हो रही है, जिससे सड़क सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि प्रशासन इस विषय के सभी पहलुओं का विस्तृत अध्ययन कर रहा है और स्थिति के अनुरूप आवश्यक कदम उठाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
| वर्ष | वाहन संख्या |
|---|---|
| 2023 | 12,41,150 |
| 2024 | 16,56,983 |
| 2025 | 16,04,719 |
| जनवरी-मई 2026 | 7,82,976 |
टनल की लंबी उम्र के लिए ट्रैफिक नियंत्रण जरूरी : ब्रिगेडियर मनोज
अटल टनल परियोजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर मनोज कुमार का कहना है कि सुरंग के भीतर लगातार बढ़ता ट्रैफिक इसके सुरक्षा और संचालन तंत्र के लिए खतरा बन सकता है। टनल की दीर्घायु और सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करने के लिए वाहनों की संख्या निर्धारित करना समय की जरूरत है।
हिमाचल पर्यटकों से गुलजार
हिमाचल प्रदेश में समर पर्यटन सीजन चरम पर है। शिमला, मनाली, कुफरी, नारकंडा, कसौली, चायल, डलहौजी और रोहतांग टनल सैलानियों से गुलजार हैं। बढ़ती पर्यटको की संख्या के कारण कई स्थानों पर होटल लगभग फुल हो चुके हैं, जबकि आगामी वीकेंड के लिए भी एडवांस बुकिंग तेजी से हो रही है। शिमला के होटलों में शनिवार को ऑक्यूपेंसी 80 से 90 फीसदी तक पहुंच गई, रविवार को भी 80 फीसदी तक होटलों के कमरे बुक रहे।
मनाली होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष रोशन ठाकुर ने बताया कि शहर में 80 से 90 फीसदी तक होटलों के कमरे बुक हैं। फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गजेंद्र चंद ठाकुर ने पर्यटकों को सलाह दी है कि ऐसे पर्यटक जो परिवार के साथ पर्यटन स्थलों का रुख कर रहे हैं, कमरों की एडवांस बुकिंग जरूर करें। बर्फ का आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक रोहतांग टनल, सिस्सू और बारालाचा दर्रे की ओर भी रुख कर रहे हैं। शनिवार को करीब 19 हजार वाहन कुल्लू और मंडी की ओर रवाना हुए, रविवार को भी 11 हजार से अधिक वाहनों की आवाजाही दर्ज की गई।
