हिमाचल हाईकोर्ट सख्त: सरकार पर 25 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक मामले में राज्य सरकार पर 25 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया है। यह मामला जिला बिलासपुर स्थित सरस्वती संस्कृत कॉलेज, डंगार के कर्मचारियों के अधिग्रहण से जुड़ा हुआ है।
अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान सरकार के रुख पर नाराजगी जताते हुए यह दंड लगाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियमों के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर भी सुनवाई जारी है और अदालत आगे की कार्यवाही में संबंधित पक्षों की जवाबदेही तय करेगी।
हिमाचल हाईकोर्ट की सख्ती: कर्मचारी अधिग्रहण मामले में सरकार को फटकार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने जिला बिलासपुर के सरस्वती संस्कृत कॉलेज, डंगार के कर्मचारी अधिग्रहण मामले में कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने इस पर तीखी टिप्पणी की।
अदालत ने कहा कि यह मुकदमेबाजी का तीसरा दौर है, जो पूरी तरह अनावश्यक था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार का कर्तव्य है कि वह अपने ही नियमों और अधिसूचनाओं का पालन करे, न कि कर्मचारियों को बार-बार अदालतों के चक्कर लगाने के लिए मजबूर करे।
हिमाचल हाईकोर्ट का फैसला: सरकार पर 25 हजार का अतिरिक्त जुर्माना
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि कर्मचारी अधिग्रहण मामलों में अधिग्रहण की तारीख ही सबसे महत्वपूर्ण होती है। अदालत ने कहा कि 25 अगस्त 1994 की अधिसूचना के क्लॉज-7 के अनुसार पात्रता के लिए 17 जून 2021, यानी टेकओवर की तारीख ही प्रासंगिक मानी जाएगी।
कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि एकल पीठ पहले ही सरकार पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगा चुकी थी। इसके बावजूद दायर की गई अपील को खंडपीठ ने पूरी तरह गलत ठहराते हुए सरकार पर 25 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भी लगा दिया।
हिमाचल हाईकोर्ट की टिप्पणी: नीतियों से बंधी सरकार, अनावश्यक अपीलों पर सख्त रुख
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सरकार अपनी ही नीतियों और अदालती फैसलों से बंधी होती है। अदालत ने कहा कि सरकारी अधिकारियों द्वारा बिना ठोस आधार के कानूनी आदेशों की व्याख्या करना और बार-बार अपील करना न्यायालय के समय की बर्बादी है।
कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि राज्य सरकार ने 17 जून 2021 को संबंधित कॉलेज को अपने नियंत्रण में लिया था। नियमों के अनुसार, अधिग्रहण की तारीख से एक वर्ष पहले से कार्यरत कर्मचारियों को सरकारी सेवा में शामिल किया जाना आवश्यक था।
हिमाचल हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी: कानूनी स्पष्टता के बावजूद मामला लटकाने पर नाराजगी
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के रवैये पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मामला सरकार द्वारा जानबूझकर कानूनी स्पष्टता के बावजूद मुद्दे को लटकाने का एक स्पष्ट उदाहरण है।
अदालत ने यह भी पाया कि इसी विषय पर खंडपीठ पहले ही ‘सुनील कुमार बनाम राज्य’ मामले में 31 मई 2024 को फैसला सुना चुकी थी। इसके बावजूद सरकार ने आदेशों की अनदेखी की और कर्मचारियों की पात्रता को गलत तरीके से निरीक्षण की तारीख से जोड़ दिया, जबकि नियम स्पष्ट रूप से अधिग्रहण की तारीख को ही आधार मानते हैं।
