मंडी, हिमाचल प्रदेश
हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी के सराज क्षेत्र में आई प्राकृतिक आपदा के बाद हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। क्षेत्र के कई गांवों में बाढ़ और भूस्खलन से भारी तबाही मची है। कुछ इलाकों में तो घर पूरी तरह से नालों में आई बाढ़ की चपेट में आकर बह गए हैं, जिससे गांवों का दोबारा बसना लगभग असंभव हो गया है।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, सराज के कई हिस्सों में न केवल आवासीय ढांचा तहस-नहस हुआ है, बल्कि खेत, सड़कों और जरूरी संसाधनों को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है। लोगों के सामने अब रहने और जीविकोपार्जन का संकट खड़ा हो गया है।
प्रभावित इलाकों में राहत और पुनर्वास कार्य जारी हैं, लेकिन दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के चलते मदद पहुंचाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने का काम तेज कर दिया है।
सराज में कुदरत का कहर: उजड़ गए गांव, छिन गया जीवन का सहारा
मंडी, हिमाचल प्रदेश | 10 जुलाई:
सराज घाटी में आसमान से बरसी आफत ने कई गांवों को पूरी तरह से तबाह कर दिया है। बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने जैसी प्राकृतिक घटनाओं ने न सिर्फ बस्तियों को मिटा दिया, बल्कि प्रभावित लोगों को ऐसे घाव दे दिए हैं, जिन्हें भरने में पूरी उम्र लग सकती है।
वैयोड़, लांबशाफड़, देजी, रूशाड़गाड़ जैसे गांव अब वीरान हो चुके हैं। कभी हरियाली और खुशहाल जीवन से भरपूर ये इलाके अब मलबे और तबाही का मंजर बन गए हैं। घर, खेत, रास्ते—सब कुछ कुदरत की मार के आगे नष्ट हो गया। ऐसा लगता है मानो यहां कभी कोई बस्ती ही नहीं थी।
इस आपदा में सब कुछ गंवा चुके ग्रामीण अब विस्थापन के भय से जूझ रहे हैं। जिन जगहों पर उनका बचपन बीता, जहां उनकी जड़ें थीं, अब वे ही इलाके दोबारा बसाने लायक नहीं बचे। लोगों को नए सिरे से जीवन शुरू करने की चिंता सताने लगी है।
प्रशासन की ओर से राहत और पुनर्वास की कोशिशें जारी हैं, लेकिन तबाही का स्तर इतना बड़ा है कि हर प्रयास छोटा महसूस हो रहा है। सराज की यह त्रासदी हिमाचल के आपदा इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज हो रही है।
सराज में आपदा की मार: 80 हजार की आबादी संकट में, 20 हजार लोग विस्थापन की कगार पर
मंडी, हिमाचल प्रदेश | 10 जुलाई:
सराज घाटी में प्रकृति का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा। भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। थुनाग बाजार, लांब, केल्टी, रोपा, उंधीगाड़, कुथाह, लस्सी चिऊणी, शिवा खड्ड, चैड़ाखड्ड, लंबाथाच और शरण जैसे क्षेत्रों में घर नालों में आई बाढ़ की चपेट में आकर बह गए हैं।
बाखली, कुकलाह, जरोल, पांडवशीला, चैड़ाखड्ड, शिवा खड्ड, खबलेच, जैंशला, ढीम कटारू, तुंगाधार, पखरैर, बगस्याड, शिकावरी, ब्रेयोगी, गतू, मैहरीधार, रूहमणी और काकड़धार जैसे गांवों में खतरा अब भी बरकरार है। इन क्षेत्रों में लोगों का रहना अब जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है।
आपदा का असर सराज की 38 पंचायतों के 129 राजस्व गांवों पर पड़ा है, जहां लगभग 80 हजार की आबादी निवास करती है। प्रशासनिक रिपोर्टों के अनुसार, करीब 20 हजार लोग विस्थापन के कगार पर हैं।
भूस्खलन और बाढ़ ने सैकड़ों मकान, स्कूल, गौशालाएं और खेत मलबे में तब्दील कर दिए हैं। अब लोगों के पास न तो सिर छिपाने की जगह बची है और न ही आजीविका के साधन। हालात ऐसे हैं कि लोग अपने गांव-घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों या अपने रिश्तेदारों के यहां शरण लेने को मजबूर हैं।
सराज में अब जीवन यापन एक चुनौती बन गया है, और शासन-प्रशासन के लिए पुनर्वास सबसे बड़ी प्राथमिकता बनती जा रही है।
हिमाचल आपदा: सराज और धर्मपुर में तबाही का मंजर, गांव उजड़े, हजारों बेघर
मंडी, हिमाचल प्रदेश | 10 जुलाई:
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में आई प्राकृतिक आपदा ने सराज और धर्मपुर क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई है। बाखली खड्ड, देजी खड्ड, रूशाड़गाड़, चिमटी खड्ड, तीर्थन खड्ड, घुमराला नाला और चिऊणी खड्ड जैसे जलस्रोतों ने विकराल रूप धारण कर लिया और रास्ते में आई हर चीज़ को अपने साथ बहा ले गए।
सराज के अधिकांश गांव छोटी पहाड़ियों और नालों के किनारे बसे हैं, जो अब भूस्खलन और बाढ़ की चपेट में हैं। थुनाग बाजार, जो पिछले तीन सालों से मानसून की मार झेलता आ रहा है, इस बार भी तबाही से नहीं बच सका।
“अब दोबारा बसना मुश्किल है” – पीड़ितों की पीड़ा
देजी गांव के जालम सिंह, सोहन सिंह, नंद लाल और मस्त राम ने बताया कि उनका पूरा गांव तबाह हो गया है और दोबारा वहां बसना अब असंभव लगता है।
रूशाड़गाड़ गांव के इंद्र सिंह, दलवीर और गोकुल चंद का कहना है कि अब वहां रहना जीवन को खतरे में डालने जैसा है।
थुनाग के प्रेम सिंह ने बताया, “हमारी चार पीढ़ियाँ यहां रही हैं, लेकिन अब मकान बह गया। अब कहाँ जाएं?”
यह प्रकृति की चेतावनी है – गुमान सिंह
हिमालय नीति अभियान के गुमान सिंह ने इस आपदा को मानवीय गतिविधियों का नतीजा बताया। उन्होंने कहा कि सराज क्षेत्र की नाजुक मिट्टी और कमजोर भू-संरचना के बावजूद अवैज्ञानिक निर्माण और अवैध रेत खनन ने खतरे को कई गुना बढ़ाया। देजी-पखरैर की 60% तबाही को उन्होंने मानवजनित बताया और इसे प्रकृति की चेतावनी करार दिया।
थुनाग उपमंडल में सबसे अधिक नुकसान
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 8 जुलाई तक मंडी जिले में आपदा से:
- 1,183 घर,
- 710 गोशालाएं,
- 780 पशुओं की हानि,
- 201 दुकानें प्रभावित हुई हैं।
अकेले थुनाग उपमंडल में:
- 959 मकान,
- 395 गोशालाएं,
- 559 पशु,
- 190 दुकानें प्रभावित हुई हैं।
अब तक 290 लोगों को रेस्क्यू किया जा चुका है।
धर्मपुर का स्याठी गांव मलबे में तब्दील
धर्मपुर उपमंडल के लौंगणी पंचायत का स्याठी गांव 30 जून की रात आई भीषण आपदा में पूरी तरह तबाह हो गया। यहां:
- 27 घर पूर्ण रूप से,
- 11 घर आंशिक रूप से,
- 38 गोशालाएं पूरी,
- 12 आंशिक गोशालाएं क्षतिग्रस्त हुईं।
- 76 पशु हानि दर्ज की गई है।
ग्रामीण जय सिंह, कृष्ण, दीप कुमार, देशराज, रजनीश, हल्कू और अन्य ने बताया कि गांव अब केवल मलबे का ढेर बनकर रह गया है। दोबारा बसने की कल्पना करना भी असंभव लग रहा है। लोगों ने सरकार से दूसरी जगह जमीन आवंटित करने की मांग की है।
