हिमाचल बोर्ड ने कक्षा 3, 5 और 8 की परीक्षा तिथि घोषित — जानें पूरा कार्यक्रम, छात्रों की तैयारी और शिक्षा विभाग की नई दिशा

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने आखिरकार राज्यभर के सरकारी और निजी स्कूलों के लिए कक्षा 3, 5 और 8 की वार्षिक परीक्षाओं की तारीखों की घोषणा कर दी है। लंबे इंतजार के बाद जारी हुआ यह शेड्यूल अब छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बन गया है।


बोर्ड के मुताबिक, इन कक्षाओं की परीक्षाएं मार्च 2026 के पहले सप्ताह से शुरू होकर मार्च के तीसरे सप्ताह तक चलेंगी। सभी जिलों के स्कूलों को परीक्षा केंद्रों की सूची और विषयवार तिथियाँ भेज दी गई हैं।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस बार परीक्षा का प्रारूप पिछले वर्षों की तुलना में थोड़ा अलग होगा। बोर्ड की ओर से मूल्यांकन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने पर जोर दिया गया है।

परीक्षाएं इस बार सीखने पर आधारित मूल्यांकन प्रणाली (Learning Outcome-Based Assessment) के तहत कराई जाएंगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे केवल रटने पर नहीं, बल्कि विषय की गहराई से समझ पर आधारित उत्तर दें।

कक्षा 3 और 5 के छात्रों के लिए परीक्षाएं प्रातःकालीन सत्र में सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक होंगी, जबकि कक्षा 8 की परीक्षाएं दोपहर सत्र में दो बजे से चार बजे तक होंगी।

बोर्ड के अध्यक्ष ने बताया कि परीक्षा कार्यक्रम को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि छात्रों को प्रत्येक विषय के बीच पर्याप्त तैयारी का समय मिल सके।

इस वर्ष लगभग 1.75 लाख छात्र कक्षा 3 में, 1.60 लाख छात्र कक्षा 5 में और 1.50 लाख छात्र कक्षा 8 में परीक्षा देने वाले हैं। यानी कुल मिलाकर लगभग 4.8 लाख विद्यार्थी इस परीक्षा में शामिल होंगे।

परीक्षाओं की तैयारियों को लेकर स्कूलों में हलचल शुरू हो गई है। शिक्षकों ने छात्रों की रिवीजन क्लासेज़ शुरू कर दी हैं और सिलेबस की आखिरी यूनिट्स को पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है।

बोर्ड ने इस बार स्कूलों को यह भी निर्देश दिया है कि वे परीक्षा से पहले कम से कम दो बार मॉक टेस्ट कराएं, ताकि छात्र उत्तर पुस्तिका भरने और समय प्रबंधन का अभ्यास कर सकें।

परीक्षा केंद्रों की निगरानी के लिए जिला स्तर पर उड़नदस्ते भी तैनात किए जाएंगे। इन टीमों का उद्देश्य परीक्षा के दौरान नकल या अनुशासनहीनता की किसी भी घटना को रोकना है।

राज्य के कई शिक्षकों ने बताया कि इस बार मूल्यांकन प्रक्रिया ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से की जाएगी, जिससे परिणाम तेजी से तैयार होंगे।

बोर्ड की सूचना के अनुसार, उत्तर पुस्तिकाओं की जांच उसी जिले में की जाएगी, जहां परीक्षा केंद्र स्थित हैं, ताकि समय और संसाधनों की बचत हो सके।

कई स्कूलों ने पहले से ही अपने छात्रों के लिए पुनरावृत्ति सत्र (revision sessions) शुरू कर दिए हैं। कुछ स्कूलों में साप्ताहिक टेस्ट का आयोजन भी चल रहा है, जिससे छात्रों की कमजोरियों को पहचानने में मदद मिल रही है।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि हिमाचल बोर्ड की यह पहल राज्य की प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।

परीक्षाओं में इस बार सामाजिक विज्ञान, गणित, विज्ञान, हिंदी, अंग्रेज़ी और पर्यावरण अध्ययन जैसे विषय शामिल होंगे। साथ ही छात्रों की भाषा दक्षता और तार्किक क्षमता पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

बोर्ड ने कहा है कि प्रश्नपत्रों में लगभग 30 प्रतिशत प्रश्न वस्तुनिष्ठ (objective) और 70 प्रतिशत प्रश्न वर्णनात्मक (descriptive) होंगे। इससे छात्रों की समझ और लेखन दोनों का परीक्षण होगा।

परीक्षा परिणाम घोषित करने की प्रक्रिया अप्रैल के पहले सप्ताह में पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। बोर्ड परिणाम ऑनलाइन पोर्टल पर जारी करेगा ताकि छात्र अपने रोल नंबर से तुरंत देख सकें।

हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

उन्होंने बताया कि राज्य के सभी स्कूलों को जल्द ही डिजिटल लॉकर की सुविधा से जोड़ा जाएगा, जिससे छात्रों की मार्कशीट और प्रमाणपत्र ऑनलाइन सुरक्षित रखे जा सकेंगे।

कई अभिभावकों ने इस कदम की सराहना की है। उनका कहना है कि पहले परीक्षा की तारीखों की घोषणा बहुत देर से होती थी, जिससे बच्चों की तैयारी प्रभावित होती थी।

अब जब शेड्यूल समय रहते जारी हो गया है, तो छात्र अपनी तैयारी योजनाबद्ध तरीके से कर सकेंगे।

कक्षा 8 के विद्यार्थियों के लिए इस परीक्षा का विशेष महत्व है, क्योंकि यह कक्षा उन्हें उच्च शिक्षा की ओर बढ़ने का आधार प्रदान करती है।

शिक्षकों ने कहा है कि इस परीक्षा के माध्यम से बच्चे न केवल किताबों से बल्कि अपने अनुभवों और समझ से भी सीखेंगे।

बोर्ड ने यह भी घोषणा की है कि प्रत्येक विद्यालय में CCTV कैमरों की निगरानी में परीक्षा कराई जाएगी, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता न हो सके।

जिन स्कूलों में यह सुविधा नहीं है, वहां शिक्षा विभाग ने अस्थायी सुरक्षा व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं।

राज्य सरकार ने परीक्षा अवधि के दौरान सभी स्कूल बसों, परिवहन सुविधाओं और स्थानीय पुलिस को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।

परीक्षाओं के समय में छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ट्रैफिक पुलिस विशेष व्यवस्थाएं करेगी।

कई जिलों जैसे मंडी, ऊना, कांगड़ा और चंबा में प्रशासन ने पहले ही केंद्रों का निरीक्षण कर लिया है।

प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर एक मुख्य अधीक्षक, दो पर्यवेक्षक और एक सहायक कर्मचारी तैनात रहेंगे।

बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि इस बार किसी भी स्थिति में परीक्षा की तिथि में बदलाव नहीं किया जाएगा।

बीमार या अनुपस्थित छात्रों के लिए स्कूलों को पुनर्परीक्षा (re-exam) की अनुमति नहीं होगी।

कक्षा 3 और 5 के परिणाम स्कूल स्तर पर घोषित किए जाएंगे, जबकि कक्षा 8 का परिणाम बोर्ड स्तर पर जारी किया जाएगा।

बोर्ड ने यह भी बताया कि इस बार ग्रेडिंग सिस्टम (A+, A, B+, B, C) अपनाया जाएगा ताकि बच्चों पर अंक आधारित दबाव न पड़े।

शिक्षकों का कहना है कि यह बदलाव बच्चों को आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करेगा और वे बिना तनाव के परीक्षा दे सकेंगे।

हिमाचल बोर्ड की इस नई पहल के तहत हर स्कूल को यह भी रिपोर्ट बनानी होगी कि बच्चों की सीखने की प्रगति पिछले साल की तुलना में कितनी बढ़ी है।

इसके आधार पर अगले शैक्षणिक सत्र में सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

कई शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में मदद करेगा।

बोर्ड ने यह भी कहा कि इस बार पेपर सेटिंग में बाहरी विशेषज्ञों को शामिल किया गया है ताकि प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता उच्चस्तरीय बनी रहे।

कई अध्यापकों ने बताया कि इस बार सिलेबस में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन प्रश्नों की प्रकृति अवधारणा-आधारित होगी।

इसलिए छात्रों को केवल याद करने के बजाय समझने पर ध्यान देना होगा।

राज्य के प्रमुख शिक्षण संस्थानों ने बच्चों को विशेष मार्गदर्शन देने के लिए कार्यशालाएं आयोजित करने का भी निर्णय लिया है।

कई निजी स्कूलों ने भी बोर्ड के निर्देशों के अनुसार अपनी टाइम टेबल्स में संशोधन कर दिया है।

कई स्थानों पर बच्चों और अभिभावकों के लिए “Exam Readiness Sessions” का आयोजन किया जा रहा है।

इन सत्रों में बच्चों को बताया जा रहा है कि कैसे समय प्रबंधन करें, कैसे उत्तर पुस्तिका साफ-सुथरी भरें और कैसे कठिन प्रश्नों से निपटें।

बोर्ड ने कहा है कि इस बार प्रश्नपत्रों में स्थानीय संदर्भ और जीवन से जुड़े सवाल भी शामिल किए जाएंगे ताकि बच्चे विषय को वास्तविक जीवन से जोड़ सकें।

परीक्षाओं के दौरान बिजली, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय निकायों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

कई जिलों में परीक्षाओं से पहले निरीक्षण दल स्कूलों का दौरा करेंगे ताकि किसी भी प्रकार की कमी को दूर किया जा सके।

अंतिम उत्तर पुस्तिकाएं स्कैन कर बोर्ड के ऑनलाइन सर्वर पर अपलोड की जाएंगी ताकि कोई गड़बड़ी न हो सके।

बोर्ड ने कहा है कि परिणाम घोषित होने के बाद छात्रों को डिजिटल सर्टिफिकेट भी जारी किया जाएगा।

राज्य सरकार की यह पहल हिमाचल की शिक्षा प्रणाली को देश के अन्य राज्यों के समकक्ष ला रही है।

कुल मिलाकर, इस परीक्षा शेड्यूल की घोषणा ने छात्रों में नई ऊर्जा और दिशा भर दी है।

अब बच्चे पूरे उत्साह के साथ अपनी तैयारियों में जुट गए हैं।

अभिभावक, शिक्षक और शिक्षा अधिकारी सभी मिलकर इस परीक्षा सत्र को सफल बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

यह परीक्षा सिर्फ अंक प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि बच्चों के सीखने और सोचने की प्रक्रिया का मूल्यांकन भी है।

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