अक्टूबर के पहले सप्ताह में ही बर्फ से लकदक हुए उच्च पर्वतीय क्षेत्र, शीतलहर बढ़ी

हिमाचल प्रदेश के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में अक्टूबर के पहले सप्ताह में ही बर्फबारी ने दस्तक दे दी है। ऊँची चोटियों और पासों पर बर्फ की सफेद चादर बिछ जाने से ठंडक में वृद्धि हुई है और शीतलहर ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। तापमान में तेज़ गिरावट के कारण ग्रामीण और पर्यटक दोनों ही मौसम के बदलाव का अनुभव कर रहे हैं।


अक्टूबर की शुरुआत में ही बर्फबारी

अक्टूबर के पहले सप्ताह में पर्वतीय क्षेत्रों में हुई बर्फबारी ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है। आमतौर पर यह समय हल्की ठंड और धूप वाला होता है, लेकिन इस बार ऊँचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ गिरने से तापमान में अचानक कमी आई।
स्थानीय लोगों के अनुसार, कई सालों में यह पहली बार हुआ है कि अक्टूबर के पहले ही बर्फबारी ने क्षेत्र को ढक दिया।

उच्च पर्वतीय क्षेत्र लकदक हुए बर्फ में

सोलंग, रोहतांग पास और किन्नौर के उच्च पर्वतीय इलाके सफेद चादर में ढक गए हैं। पेड़-पौधों, घरों और सड़कों पर बर्फ जम गई है, जिससे दृश्य बेहद मनोहारी हो गया है।
हालांकि, बर्फबारी के कारण कुछ सड़क मार्गों पर आवाजाही में परेशानी बढ़ गई है और वाहन चालकों को सतर्क रहने की जरूरत है।

ठंड और शीतलहर से बढ़ी परेशानियाँ

बर्फबारी के चलते तापमान में गिरावट के कारण शीतलहर बढ़ गई है। दिन का तापमान 5 से 7 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया है, जबकि रात में यह शून्य से नीचे पहुंच रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अलाव और गर्म कपड़े का सहारा लेकर ठंड से बचाव कर रहे हैं। बच्चों और बुजुर्गों को इस मौसम में सबसे अधिक परेशानी हो रही है।

प्रशासन ने जारी की चेतावनी और सावधानी

स्थानीय प्रशासन ने बर्फबारी वाले क्षेत्रों में आने-जाने वाले लोगों के लिए सावधानी बरतने की चेतावनी जारी की है। फिसलन और बर्फ से भरी सड़कें हादसों का कारण बन सकती हैं।
सड़क मार्गों और गांवों में जरूरी वस्तुओं की सप्लाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। प्रशासन ने पर्यटकों को भी अलर्ट रहने की सलाह दी है।

👉 अक्टूबर के पहले सप्ताह में ही उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में हुई बर्फबारी ने शीतलहर को तेज़ कर दिया है। तापमान में गिरावट के साथ ही जनजीवन प्रभावित हुआ है, लेकिन इस बर्फीले नज़ारे ने पर्यटन के लिए नई संभावनाएँ भी खोल दी हैं। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में ठंड और बढ़ सकती है, जिससे पर्वतीय इलाकों में सर्दियों की शुरुआत सामान्य से पहले हो गई है।

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