हिमाचल में मानसून बना जानलेवा, पांच वर्षों में 2108 लोगों की गई जान
अधिक खतरनाक बना दिया है। हर साल बरसात के मौसम में जान-माल का भारी नुकसान हो रहा है, जिससे हजारों परिवार प्रभावित हो रहे हैं।
पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में मानसून के दौरान विभिन्न आपदाओं में 2108 लोगों की जान जा चुकी है। इन घटनाओं ने हजारों परिवारों पर दुखों का पहाड़ तोड़ दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और अत्यधिक वर्षा की घटनाओं में वृद्धि के कारण ऐसी आपदाएं लगातार बढ़ रही हैं।
प्रदेश में हर वर्ष बरसात के मौसम में सड़कें, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे भी भारी नुकसान का सामना करते हैं। प्रशासन लोगों से बारिश के दौरान सतर्क रहने और संवेदनशील क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील कर रहा है।
हिमाचल में मानसून बना बड़ी आपदा, पांच वर्षों में 2108 लोगों की मौत
शिमला: हिमाचल प्रदेश में मानसून अब केवल बरसात का मौसम नहीं रह गया है, बल्कि हर साल तबाही, मौत और भारी आर्थिक नुकसान लेकर आने वाली बड़ी आपदा बन चुका है। पहाड़ों में बढ़ती अतिवृष्टि, बादल फटने, भूस्खलन और बाढ़ जैसी घटनाओं ने प्रदेश में जनजीवन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों के अनुसार, मानसून के दौरान विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं में 2108 लोगों की जान जा चुकी है। इन हादसों ने हजारों परिवारों को गहरे दुख में डाल दिया, जबकि प्रदेश को हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान भी उठाना पड़ा।
हर वर्ष बरसात के मौसम में सड़कें, पुल, घर, कृषि भूमि और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी क्षति पहुंचती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और अत्यधिक वर्षा की बढ़ती घटनाओं के कारण हिमाचल में मानसून का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में आपदा प्रबंधन को और मजबूत बनाने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
2018 से 2023 तक मानसून में 1,981 लोगों की मौत, 2023 सबसे भयावह वर्ष रहा
शिमला: राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2018 से 2022 के बीच मानसून अवधि में 1,553 लोगों की मौत हुई। इनमें सबसे अधिक 476 मौतें वर्ष 2021 में दर्ज की गईं। इसके अलावा 2020 में 240, 2019 में 218 और 2022 में अगस्त तक 276 लोगों की जान गई।
इसके बाद वर्ष 2023 हिमाचल प्रदेश के इतिहास की सबसे भयावह आपदाओं में शामिल हो गया। लगातार हुई अतिवृष्टि, भूस्खलन और बाढ़ की घटनाओं में 428 लोगों की मौत हुई। इस दौरान हजारों मकान, सड़कें, पुल और अन्य सार्वजनिक ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया। वहीं, प्रदेश को 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा।
2025 में भी मानसून का कहर जारी, 468 लोगों की गई जान
शिमला: वर्ष 2025 भी हिमाचल प्रदेश के लिए मानसून के लिहाज से बेहद खतरनाक साबित हुआ। हिमाचल सरकार की आपदा आकलन रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2025 तक मानसूनी आपदाओं में 468 लोगों की मौत दर्ज की गई।
सबसे अधिक प्रभावित जिलों में मंडी, चंबा, कांगड़ा और शिमला शामिल रहे, जहां बादल फटने, भूस्खलन और अतिवृष्टि की घटनाओं ने व्यापक तबाही मचाई। इन आपदाओं से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ और कई क्षेत्रों में भारी नुकसान हुआ।
विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण कम समय में अत्यधिक वर्षा की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। वहीं, हिमालयी क्षेत्रों में अनियोजित निर्माण, पहाड़ों की कटाई, नदी-नालों के किनारे बढ़ता दबाव और संवेदनशील भूगर्भीय संरचना आपदा के खतरे को और बढ़ा रही है। हालिया अध्ययनों में भी वर्ष 2023 की भीषण त्रासदी को अत्यधिक वर्षा और भूस्खलनों से जोड़ते हुए हिमालयी क्षेत्रों की बढ़ती संवेदनशीलता पर चिंता जताई गई है।
इस मानसून भी हालात गंभीर
वर्तमान मानसून सीजन में भी प्रदेश के कई जिलों में लगातार भूस्खलन, बाढ़ और बादल फटने की घटनाएं सामने आ रही हैं। सैकड़ों सड़कें बाधित हुई हैं और कई क्षेत्रों में बिजली-पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई है। मौसम विभाग दो बार भारी से बहुत भारी बारिश का रेड और कई बार ऑरेंज अलर्ट जारी कर चुका है।
