मां के आंचल की छांव: हादसे के वक्त भी सीने से चिपका रहा 3 महीने का बेटा, नहीं टूटी ममता की पकड़
एक भीषण सड़क हादसे के दौरान ममता की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। दुर्घटना के बाद जब बचाव दल मौके पर पहुंचा और क्षतिग्रस्त कार तक पहुंचा, तो अंदर का नजारा देख सभी हैरान रह गए।
हाथों की यह दर्दनाक दास्तान बयां करती है कि मां का आंचल हर मुसीबत से बड़ा होता है। हादसे के वक्त मां रिंपी ने अपने महज तीन महीने के दुधमुंहे बेटे को अपनी बाहों और सीने से मजबूती से चिपका रखा था। भीषण टक्कर और गंभीर स्थिति के बावजूद, उनकी बाहों की पकड़ इतनी मजबूत थी कि जरा भी ढीली नहीं पड़ी।
बचाव दल के सदस्यों का कहना है कि यह दृश्य बेहद मार्मिक था, जहां जान जोखिम में होने के बावजूद मां ने अपनी ममता और सुरक्षा की ढाल को एक पल के लिए भी खुद से अलग नहीं होने दिया।
भरमौर-पठानकोट हाईवे हादसा: अंतिम सांस तक बच्चे को सीने से लगाए रखी मां, ममता की इस तस्वीर ने नम कर दीं आंखें
भरमौर/चंबा:
भरमौर-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग-154ए पर लाहड़ के समीप हुए एक भीषण सड़क हादसे ने पूरे क्षेत्र को गहरे सदमे और शोक में डुबो दिया है। इस दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की मौत हो गई, जिससे हर किसी का कलेजा फट गया है।
इस हादसे के बाद राहत एवं बचाव दल और स्थानीय लोगों के सामने एक ऐसा मार्मिक दृश्य आया, जिसे देखकर किसी के भी आंसू छलक आएं।
ममता की अनूठी मिसाल
रेस्क्यू के दौरान जब बचाव दल दुर्घटनाग्रस्त कार तक पहुंचा, तो अंदर का नजारा बेहद हृदयविदारक था। मां रिंपी अपने महज तीन महीने के मासूम बेटे को अपने सीने से मजबूती से लगाए हुए थीं। भीषण टक्कर और हादसे की भयानकता के बावजूद उनकी बाहों की पकड़ जरा भी ढीली नहीं पड़ी थी।
मौके पर मौजूद लोगों का कहना था कि ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो वह अंतिम क्षण तक अपने जिगर के टुकड़े को हर खतरे से सुरक्षित रखने का प्रयास करती रही हों। हालांकि, कुदरत को कुछ और ही मंजूर था; इस भयानक हादसे में मां और बेटे दोनों को बचाया नहीं जा सका और दोनों की जान चली गई।
पीजीआई से लौट रही खुशियां मातम में तब्दील: इलाज कराकर घर आ रहे एक ही परिवार के 5 सदस्यों की मौत, नम कर देगी मां की यह आखिरी तस्वीर
चंबा:
भरमौर-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग-154ए पर लाहड़ के समीप हुए भीषण सड़क हादसे ने पूरे चंबा जिले को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत से हर आंख नम है।
इलाज करवाकर लौट रहा था परिवार
परिजनों के अनुसार, यह परिवार अपने तीन महीने के बीमार बच्चे का इलाज करवाने के बाद पीजीआई (PGI) चंडीगढ़ से वापस अपने घर लौट रहा था। किसी ने सपने में भी यह कल्पना नहीं की थी कि घर वापसी का यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा। चंद पलों में ही हंसता-खेलता पूरा परिवार काल के ग्रास में समा गया।
दिल दहला देने वाला रेस्क्यू दृश्य
दुर्घटनास्थल पर राहत एवं बचाव अभियान में शामिल लोगों ने बताया कि मां रिंपी और उनके मासूम बच्चे का वह आखिरी दृश्य जीवनभर भुलाया नहीं जा सकेगा। अंतिम क्षणों तक बच्चे को अपनी बाहों में समेटे रखने वाली मां की यह ममता भरी तस्वीर और इस अपूरणीय क्षति ने हर किसी के कलेजे को चीर कर रख दिया है।
