Himachal DA Update: 15 फीसदी महंगाई भत्ते पर अब सरकार को लेना होगा फैसला, हाईकोर्ट ने तय की समयसीमा

हिमाचल हाईकोर्ट का निर्देश: कर्मचारियों व पेंशनरों के 15% लंबित DA और एरियर पर फैसला ले सरकार

मुख्य बिंदु

  • अदालत का आदेश: प्रदेश सरकार को 15% लंबित महंगाई भत्ते (DA) और एरियर भुगतान पर जल्द फैसला लेने के निर्देश।
  • याचिकाकर्ताओं की समयसीमा: कर्मचारियों को 4 सप्ताह के भीतर सक्षम प्राधिकरण को अपना अभ्यावेदन (Representation) प्रस्तुत करना होगा।
  • सरकार की समयसीमा: सक्षम प्राधिकरण को 12 सप्ताह में कारण सहित स्पष्ट आदेश (Reasoned Order) पारित करना होगा।
  • कर्मचारियों का पक्ष: केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तुलना में हिमाचल के कर्मचारियों को कम डीए मिल रहा है।

विस्तृत समाचार:

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले पर सुनवाई करते हुए प्रदेश सरकार को निर्देश जारी किए हैं। मामला 15 फीसदी लंबित महंगाई भत्ते (DA) और बकाया एरियर के भुगतान से जुड़ा हुआ है।

अदालत ने याचिकाकर्ताओं को आदेश दिया है कि वे अपनी मांगों के संबंध में अगले चार सप्ताह के भीतर सक्षम प्राधिकरण के समक्ष अपना अभ्यावेदन प्रस्तुत करें। इसके साथ ही, हाईकोर्ट ने सरकार और संबंधित प्राधिकरण को इस पर विचार कर 12 सप्ताह के भीतर विस्तृत व कारण सहित (Reasoned) आदेश पारित करने के निर्देश दिए हैं।

केंद्र की तुलना में कम DA का दावा

याचिकाकर्ताओं और कर्मचारी संगठनों का कहना है कि उन्हें केंद्र सरकार के कर्मचारियों के मुकाबले 15 प्रतिशत कम महंगाई भत्ता मिल रहा है। इसके अलावा, लंबे समय से बकाया एरियर का भुगतान न होने से कर्मचारियों और पेंशनरों में असंतोष है। अब हाईकोर्ट के इस रुख के बाद सरकार पर तय समयसीमा के भीतर फैसला लेने का दबाव बन गया है।

हिमाचल हाईकोर्ट का फैसला: 15% लंबित DA व एरियर भुगतान पर 12 सप्ताह में निर्णय ले सरकार

मुख्य बिंदु

  • अदालत का आदेश: कर्मचारियों के 15% लंबित महंगाई भत्ते (DA), किस्तों और बकाया एरियर पर सरकार को फैसला लेने के निर्देश।
  • पीठ: न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने दिया आदेश।
  • याचिकाकर्ताओं को निर्देश: 4 सप्ताह के भीतर संबंधित अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करना होगा अभ्यावेदन (Representation)।
  • अथॉरिटी के लिए समयसीमा: सक्षम अथॉरिटी को 12 सप्ताह में कानून के अनुसार कारण सहित आदेश (Reasoned Order) पारित करना होगा।
  • याचिका का निपटारा: अदालत ने बिना गुण-दोष पर टिप्पणी किए तय समयसीमा में शिकायतों के निपटारे का निर्देश देकर याचिकाओं को बंद किया।

विस्तृत समाचार:

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों के 15 फीसदी लंबित महंगाई भत्ते (DA), उसकी किस्तों और बकाया एरियर के भुगतान से जुड़े मामले पर महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं।

न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की एकल पीठ ने याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे अपनी मांगों व शिकायतों से संबंधित अभ्यावेदन अगले चार सप्ताह के भीतर संबंधित उच्च अधिकारी के समक्ष सौंपें।

12 सप्ताह में कानूनन निर्णय लेने के निर्देश

अदालत ने सक्षम अथॉरिटी को स्पष्ट किया है कि अभ्यावेदन प्राप्त होने के बाद 12 सप्ताह के भीतर कानून के दायरों में रहकर एक स्पष्ट एवं कारण सहित आदेश (Reasoned Order) पारित कर इस पर अंतिम निर्णय लिया जाए।

बिना गुण-दोष पर विचार किए याचिकाओं का निपटारा

हाईकोर्ट ने मामले के मुख्य गुण-दोष (Merits) पर कोई टिप्पणी किए बिना ही याचिकाओं का निपटारा कर दिया है। अदालत का मुख्य उद्देश्य संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को एक निश्चित समयसीमा के भीतर कर्मचारियों की वित्तीय शिकायतों पर निष्पक्षता से विचार करने के लिए बाध्य करना है।

15% DA अंतर का मामला: सरकार द्वारा जवाब न देने पर हाईकोर्ट ने कर्मचारियों को दिया अभ्यावेदन का रास्ता

मुख्य बिंदु

  • मामले की पृष्ठभूमि: राज्य सरकार द्वारा नोटिस के बावजूद अदालत में जवाब दाखिल न करने पर हाईकोर्ट ने अभ्यावेदन (Representation) का निर्देश दिया।
  • DA का बड़ा अंतर: केंद्र कर्मचारियों को 60% तो हिमाचल के कर्मचारियों को मिल रहा महज 45% महंगाई भत्ता।
  • सीधा नुकसान: हिमाचल के कर्मचारियों व पेंशनरों का 15 फीसदी DA और बकाया किस्तें काफी समय से लंबित।
  • मुख्य मांग: कर्मचारियों ने अदालत से बकाया किस्तों और एरियर के जल्द भुगतान की गुहार लगाई है।

विस्तृत समाचार:

हिमाचल प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित महंगाई भत्ते (DA) और बकाया एरियर भुगतान मामले में अहम तथ्य सामने आए हैं। कर्मचारियों ने अपने हक का DA न मिलने पर अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जिस पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए थे।

सरकार ने नहीं दिया जवाब

अदालत के सख्त रुख के बावजूद राज्य सरकार तय समयसीमा के भीतर अपना जवाब दाखिल करने में विफल रही। सरकार द्वारा जवाब प्रस्तुत न किए जाने के बाद ही हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को संबंधित उच्च अधिकारियों के समक्ष अपना अभ्यावेदन (Representation) प्रस्तुत करने के आदेश जारी किए।

केंद्र और राज्य के DA में 15% का अंतर

याचिका में आरोप लगाया गया है कि केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को 60 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता दे रही है, जबकि हिमाचल सरकार के कर्मचारियों को मात्र 45 प्रतिशत ही DA दिया जा रहा है।

इस प्रकार केंद्र की तुलना में हिमाचल के कर्मचारियों और पेंशनरों का 15 फीसदी महंगाई भत्ता अभी तक बकाया है। कर्मचारियों का कहना है कि महंगाई के इस दौर में DA की किस्तें रुकने से उन्हें भारी वित्तीय नुकसान झेलना पड़ रहा है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से गुहार लगाई थी कि सरकार को बकाया किस्तें और एरियर तुरंत जारी करने के आदेश दिए जाएं।

हिमाचल में ₹DA संकट: 2023 से 2026 तक का 15% महंगाई भत्ता बकाया, आर्थिक तंगी बनी वजह

साथ ही अदालत से गुहार लगाई थी कि एक जुलाई 2024 से रुकीं डीए की सभी किस्तों को केंद्र की तर्ज पर जारी करने के निर्देश दिए जाएं। लंबे समय से भुगतान न होने के कारण राज्य सरकार पर इसकी देनदारियां बहुत ज्यादा बढ़ गई। आंकड़ों के अनुसार जुलाई 2023 से जनवरी 2026 के बीच कई चरणों में डीए बढ़ाया गया, लेकिन उसका भुगतान लंबित ही रहा। जुलाई 2023 और जनवरी 2024 में 4 फीसदी, जुलाई 2024 में 3 फीसदी, जनवरी 2025 में 2 फीसदी, जुलाई 2025 में 3 फीसदी और जनवरी 2026 में 2 फीसदी डीए लंबित रह गया। इस तरह कुल मिलाकर 15 फीसदी डीए का भुगतान अभी बाकी हैं। वहीं सरकार का कहना है कि कर्मचारियों की देनदारी अधिक होने की वजह से और आर्थिक तंगी के कारण वह समय पर भुगतान नहीं कर पा रही है। 

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