ठेका खत्म होने पर नौकरी जारी रखने का दावा नहीं कर सकते कर्मचारी : अदालत
शिमला | अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी विशेष कार्य, जैसे रखरखाव या संचालन, का ठेका निश्चित अवधि के लिए दिया गया है, तो उस ठेकेदार द्वारा नियुक्त कर्मचारी ठेका समाप्त होने के बाद नई ठेका कंपनी या सरकार से नौकरी जारी रखने का दावा नहीं कर सकते।
अदालत ने कहा कि ठेका अवधि समाप्त होने के साथ ही संबंधित ठेकेदार और उसके कर्मचारियों के बीच रोजगार संबंध भी समाप्त हो जाता है। ऐसे में नए ठेकेदार या सरकारी विभाग पर पुराने कर्मचारियों को दोबारा नियुक्त करने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं होती।
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि केवल पहले ठेकेदार के अधीन कार्य करने के आधार पर कर्मचारियों को स्थायी रोजगार या सेवा जारी रखने का अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता। नए ठेकेदार को अपनी आवश्यकता और नियमों के अनुसार कर्मचारियों की नियुक्ति करने का अधिकार है।
आउटसोर्स कर्मचारियों को सेवा जारी रखने का अधिकार नहीं : हाईकोर्ट
शिमला | हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि ठेकेदार (आउटसोर्सिंग एजेंसी) के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों को मुख्य नियोक्ता (सरकार या विभाग) के पास सेवा जारी रखने या नए ठेकेदार के अधीन स्थानांतरित किए जाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज की एकल पीठ ने निर्मल सिंह व अन्य द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारी केवल संबंधित ठेकेदार के कर्मचारी होते हैं और ठेका समाप्त होने के बाद वे सरकार या विभाग से नौकरी जारी रखने की मांग नहीं कर सकते।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि किसी विशेष कार्य के लिए निर्धारित अवधि का ठेका समाप्त होने पर नए ठेकेदार पर पुराने कर्मचारियों को नियुक्त करने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं होती। ऐसे मामलों में नियुक्ति और सेवा संबंधी निर्णय नए ठेकेदार की आवश्यकता और नियमों के अनुसार लिए जाएंगे।
ठेका समाप्त होने पर सेवा जारी रखने का अधिकार नहीं, हाईकोर्ट ने याचिका की खारिज
शिमला | हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़े मामले में स्पष्ट किया है कि ठेके की अवधि समाप्त होने के बाद कर्मचारी नए ठेकेदार या सरकार से नौकरी जारी रखने का दावा नहीं कर सकते। अदालत ने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों और मूल विभाग के बीच प्रत्यक्ष नियोक्ता-कर्मचारी संबंध नहीं होता।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जब किसी विशेष कार्य, जैसे रखरखाव या संचालन, का ठेका निश्चित अवधि के लिए दिया जाता है, तो उस ठेकेदार द्वारा नियुक्त कर्मचारी यह दावा नहीं कर सकते कि ठेका समाप्त होने के बाद उन्हें नए ठेकेदार या सरकार के अधीन सेवा में बनाए रखा जाए।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आउटसोर्स कर्मचारियों का मूल विभाग के साथ सीधा नियोक्ता-कर्मचारी संबंध नहीं होने के कारण उन्हें सेवा में बनाए रखने या नए ठेकेदार के पास समायोजित करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं बनता। ऐसे मामलों में अदालत किसी प्रकार का परमादेश (Mandamus) भी जारी नहीं कर सकती।
पंप ऑपरेटर और हेल्पर की याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज
शिमला | हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मलारी बाहल सीना लिफ्ट पेयजल योजना में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों की याचिका खारिज करते हुए कहा कि ठेकेदार के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों को ठेका समाप्त होने के बाद सेवा जारी रखने का कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं है।
याचिकाकर्ताओं में चार पंप ऑपरेटर और एक हेल्पर शामिल थे, जो उप-मंडल कलोल (जिला बिलासपुर) के अंतर्गत संचालित मलारी बाहल सीना लिफ्ट पेयजल योजना में कार्यरत थे। उनका कहना था कि वे सितंबर 2013 से लगातार काम कर रहे थे, लेकिन 3 फरवरी 2020 को बिना किसी नोटिस के मौखिक रूप से उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। उन्होंने अदालत से अपनी सेवाएं बहाल करने और आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए नीति बनाने के निर्देश देने की मांग की थी।
वहीं, राज्य सरकार और जल शक्ति विभाग ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति विभाग ने सीधे नहीं की थी। वे संबंधित ठेकेदार के कर्मचारी थे, जिसे 25 मार्च 2017 से 36 महीने की अवधि के लिए योजना के रखरखाव का ठेका दिया गया था। विभाग ने दलील दी कि ठेका समाप्त होने के साथ ही कर्मचारियों को सेवा जारी रखने का अधिकार स्वतः नहीं बनता।
