आठ जिलों में पार्टी समर्थित उम्मीदवारों को बहुमत, अध्यक्ष-उपाध्यक्ष पदों पर नजर
प्रदेश के आठ जिलों—बिलासपुर, मंडी, कुल्लू, ऊना, सोलन, हमीरपुर, किन्नौर और सिरमौर—में पार्टी समर्थित उम्मीदवारों को स्पष्ट बहुमत मिला है। इस सफलता के बाद पार्टी अब जिला परिषदों में अपनी पकड़ और मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
पार्टी का पूरा फोकस जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों पर कब्जा सुनिश्चित करने पर है। इसके लिए संगठन स्तर पर सक्रियता बढ़ा दी गई है और निर्वाचित सदस्यों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का लक्ष्य जिला परिषदों में मजबूत नेतृत्व स्थापित कर स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति देना है।
आठ जिलों में बहुमत के बाद जिला परिषदों पर पूर्ण नियंत्रण की तैयारी में भाजपा
आठ जिलों—बिलासपुर, मंडी, कुल्लू, ऊना, सोलन, हमीरपुर, किन्नौर और सिरमौर—में पार्टी समर्थित उम्मीदवारों को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद भाजपा अब जिला परिषदों में सत्ता का पूरा नियंत्रण स्थापित करने की रणनीति पर तेजी से काम कर रही है।
पार्टी का मुख्य फोकस जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों पर कब्जा सुनिश्चित करने पर है। इसके लिए संगठन ने प्रदेश स्तर से लेकर बूथ स्तर तक अपने तंत्र को सक्रिय कर दिया है। साथ ही, निर्वाचित सदस्यों के बीच समन्वय बढ़ाने और राजनीतिक समीकरणों को अपने पक्ष में साधने की कवायद भी तेज कर दी गई है।
भाजपा नेतृत्व का मानना है कि जिला परिषदों में मजबूत पकड़ स्थानीय स्तर पर संगठन को और सशक्त बनाएगी तथा विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में मददगार साबित होगी।
विधायकों, पूर्व विधायकों को साैंपी जिम्मेवारी
शिमला और कांगड़ा में निर्दलीय उम्मीदवारों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यहां अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद हासिल करने की संभावनाओं को लेकर पार्टी में गहन मंथन चल रहा है। इन दोनों जिलों में पार्टी नेतृत्व लगातार संपर्क और संवाद की रणनीति पर काम कर रहा है। जिला परिषद सदस्यों को एकजुट रखने और राजनीतिक समन्वय बनाए रखने की जिम्मेदारी संबंधित क्षेत्रों के विधायकों, पूर्व विधायकों, विधानसभा चुनाव लड़ चुके प्रत्याशियों तथा वरिष्ठ नेताओं को सौंपी गई है। पार्टी ने सभी जिला प्रभारियों और सह-प्रभारियों को भी विशेष जिम्मेदारी सौंपी है। प्रभारी लगातार जिलों का दौरा कर स्थानीय नेतृत्व, निर्वाचित सदस्यों और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर रहे हैं।
रिपोर्ट के आधार पर अंतिम सूची तैयार होगी
इन बैठकों में संभावित अध्यक्ष और उपाध्यक्ष उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा के साथ-साथ आरक्षण रोस्टर के आधार पर दावेदारों की सूची तैयार की जा रही है। संबंधित जिलों से प्राप्त फीडबैक, विधायकों की राय, पूर्व प्रत्याशियों के सुझाव और जिला प्रभारियों की रिपोर्ट के आधार पर अंतिम सूची तैयार की जा रही है। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी प्रदेश नेतृत्व स्वयं कर रहा है। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर तथा संगठन महामंत्री सिद्धार्थन लगातार जिलों से फीडबैक ले रहे हैं। बुधवार को हुई प्रदेश नेतृत्व की एक महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक में भी विभिन्न जिलों की राजनीतिक स्थिति और संभावित बोर्ड गठन को लेकर विस्तृत समीक्षा की गई।
पार्टी विचारधारा से जुड़े 28 निर्दलीय विजयी उम्मीदवारों से साधा जा रहा संपर्क
भाजपा की रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उन 28 बागी और निर्दलीय विजयी उम्मीदवारों को भी साथ जोड़ना है, जो वैचारिक रूप से पार्टी के निकट माने जाते हैं। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि यदि इन प्रतिनिधियों को संगठन के साथ समन्वित रखा गया तो जिला परिषदों में स्थिर और मजबूत बोर्ड गठन सुनिश्चित किया जा सकेगा। पार्टी नेताओं के अनुसार जिला परिषद सदस्यों की शपथ ग्रहण प्रक्रिया पूरी होते ही अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के लिए संभावित नामों की सूची सार्वजनिक की जा सकती है। पार्टी किसी भी तरह की गुटबाजी या अंतिम समय की राजनीतिक उठापटक से बचने के लिए पहले से ही सभी विकल्पों पर काम कर रही है।
