अदालत की टिप्पणी: डीपीई की बैचवाइज भर्ती का नियमों में प्रावधान नहीं
न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की अदालत ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद स्पष्ट किया कि आरएंडपी नियमों में डीपीई (शारीरिक शिक्षा अध्यापक) की बैचवाइज भर्ती का कोई प्रावधान मौजूद नहीं है। अदालत की इस टिप्पणी से भर्ती प्रक्रिया से जुड़े नियमों और प्रावधानों को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो गई है।
हिमाचल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: डीपीई भर्ती में बैचवाइज नियुक्ति का प्रावधान नहीं
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शारीरिक शिक्षा प्रवक्ताओं (डीपीई) की नियुक्ति और वरिष्ठता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि भर्ती एवं पदोन्नति (आरएंडपी) नियमों से बाहर जाकर किसी भी प्रकार की नियुक्ति का आदेश नहीं दिया जा सकता।
न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की अदालत ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि आरएंडपी नियमों में डीपीई की बैचवाइज भर्ती का कोई प्रावधान नहीं है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि उन्हें उचित तिथि से सीधी भर्ती प्रक्रिया के तहत रोजगार कार्यालयों के माध्यम से नियुक्ति दी जाए, लेकिन अदालत ने नियमों के दायरे में रहते हुए इस मांग को अस्वीकार कर दिया।
डीपीई भर्ती विवाद: वरिष्ठ अभ्यर्थियों ने नियुक्ति और लाभ से वंचित किए जाने पर उठाए सवाल
याचिकाकर्ताओं ने अदालत में मांग की कि उन्हें भी वही सभी परिणामी लाभ प्रदान किए जाएं, जो 152 कनिष्ठ अभ्यर्थियों को दिए गए हैं। उनका कहना था कि वरिष्ठ होने के बावजूद उन्हें नियुक्तियों और लाभों से वंचित रखा गया।
मुख्य शिकायत यह थी कि याचिकाकर्ता भर्ती एवं पदोन्नति (आरएंडपी) नियमों के अनुसार शारीरिक शिक्षा डिप्लोमा धारक पद के लिए पूरी तरह पात्र थे, लेकिन इसके बावजूद प्रतिवादियों ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना रोजगार कार्यालयों के माध्यम से इन पदों को भर दिया। बताया गया कि डीपीई के लगभग 237 पद रिक्त थे, फिर भी वर्ष 2000 के बाद से याचिकाकर्ताओं से कनिष्ठ व्यक्तियों को इन पदों पर नियुक्त किया गया, जिससे भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और नियमों के पालन पर गंभीर प्रश्न खड़े हुए।
डीपीई भर्ती मामले में सीधी भर्ती न होने पर उठे सवाल, सरकार ने दी कैडर संरचना की जानकारी
याचिकाकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2000 से 2008 और 2013 के दौरान अपने डिप्लोमा प्राप्त किए थे, लेकिन इसके बावजूद उन्हें नियुक्ति का अवसर नहीं मिला। उनका आरोप था कि प्रतिवादी विभाग ने पीटीए नीति 2006 के तहत डीपीई के 328 पद भर दिए, जबकि वर्ष 1997 से इन पदों पर कोई सीधी भर्ती नहीं की गई। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि ये नियुक्तियां भर्ती एवं पदोन्नति (आरएंडपी) नियमों के विपरीत थीं और उन्हें सीधी भर्ती प्रक्रिया से वंचित रखा गया।
वहीं, राज्य सरकार ने अदालत में तर्क दिया कि वर्तमान में शारीरिक शिक्षा प्रवक्ताओं की कुल कैडर संख्या 1527 है। आरएंडपी नियमों के अनुसार इनमें से 25 फीसदी यानी 382 पद सीधी भर्ती के माध्यम से तथा 75 फीसदी यानी 1145 पद पदोन्नति के जरिए भरे जाने निर्धारित हैं। सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप बताया।
डीपीई भर्ती विवाद: सीधी भर्ती कोटा पहले ही सीमा से अधिक भरने का सरकार का दावा
राज्य सरकार ने अदालत में स्पष्ट किया कि सीधी भर्ती के लिए निर्धारित 382 पदों के मुकाबले अब तक 645 डीपीई की नियुक्ति की जा चुकी है। सरकार के अनुसार सीधी भर्ती का कोटा पहले ही तय सीमा से काफी अधिक भर चुका है, इसलिए अतिरिक्त नियुक्तियों की मांग नियमों के अनुरूप नहीं है।
सरकार ने यह भी बताया कि वर्ष 2003 में पैरा-शिक्षक नीति के तहत 89 डीपीई नियुक्त किए गए थे, जिनकी सेवाओं को सरकारी स्वीकृति के बाद वर्ष 2014 में नियमित कर दिया गया। दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि उन्हें उनके बैच की वरिष्ठता के आधार पर नियुक्ति का अवसर मिलना चाहिए था, लेकिन अदालत ने भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के तहत ही प्रक्रिया को मान्य माना।
हिमाचल हाईकोर्ट ने डीपीई भर्ती याचिकाएं खारिज कीं, देरी और प्रक्रिया को माना आधार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने डीपीई भर्ती और वरिष्ठता से जुड़ी याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं ने उचित समयसीमा के भीतर मामला दायर नहीं किया। अदालत ने उल्लेख किया कि वर्ष 2005 से 2011 के बीच हुई नियुक्तियों को वर्ष 2014 में चुनौती दी गई, जो अत्यधिक विलंब माना गया।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन जूनियर उम्मीदवारों की नियुक्तियों को अवैध बताया गया, उन्हें मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया। कानून के अनुसार किसी भी व्यक्ति के खिलाफ उसकी अनुपस्थिति में आदेश पारित नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की थी कि उन्हें भी पीटीए या पैरा-टीचर नियुक्ति नीति जैसी राहत दी जाए, लेकिन अदालत ने नियमों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर यह मांग अस्वीकार कर दी।
