खराब मौसम के कारण राष्ट्रपति का अटल टनल और सिस्सू दौरा रद्द
राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा जारी की गई एक आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, भारत के राष्ट्रपति का 29 अप्रैल को हिमाचल प्रदेश के कुल्लू और लाहौल-स्पीति क्षेत्र का बहुप्रतीक्षित दौरा अब रद्द कर दिया गया है। अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत, राष्ट्रपति को विश्व विख्यात और इंजीनियरिंग के अद्भुत नमूने ‘अटल टनल, रोहतांग’ का दौरा करना था और उसके बाद लाहौल घाटी के खूबसूरत पर्यटन स्थल ‘सिस्सू’ में भी जाना था। इस हाई-प्रोफाइल दौरे को लेकर राज्य सरकार, स्थानीय प्रशासन और पुलिस द्वारा सुरक्षा व स्वागत की तमाम विशेष तैयारियां पहले ही पूरी कर ली गई थीं। इसके अलावा, इस जनजातीय क्षेत्र के स्थानीय लोगों में भी देश के प्रथम नागरिक के आगमन को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा था, जो इस खबर के बाद थोड़ी निराशा में बदल गया है।
अटल टनल और सिस्सू में खराब मौसम के मद्देनजर सचिवालय ने लिया बड़ा निर्णय
इस महत्वपूर्ण दौरे को ऐन वक्त पर रद्द करने का मुख्य कारण हिमालयी क्षेत्रों में अचानक बनी प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियां हैं। दरअसल, अटल टनल और सिस्सू जैसे अत्यधिक ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाकों में खराब मौसम, अचानक होने वाली बर्फबारी, तेज हवाओं या भारी बारिश के कारण वीवीआईपी (VVIP) मूवमेंट और हेलीकॉप्टर की उड़ानों में सुरक्षा का भारी जोखिम रहता है। इसी सुरक्षा संवेदनशीलता और मौसम के खतरनाक मिजाज को ध्यान में रखते हुए, राष्ट्रपति सचिवालय ने ऐहतियात के तौर पर इस यात्रा को तुरंत प्रभाव से स्थगित करने का उचित निर्णय लिया। यह कदम स्पष्ट करता है कि सुरक्षा प्रोटोकॉल सर्वोपरि हैं, और भविष्य में मौसम की परिस्थितियां पूरी तरह से अनुकूल और सुरक्षित होने पर ही इस प्रस्तावित दौरे को पुनः निर्धारित किए जाने की संभावना है।
खराब मौसम की भेंट चढ़ा राष्ट्रपति का दौरा: सुरक्षा कारणों से लिया गया निर्णय
हिमाचल प्रदेश के जनजातीय और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम के बदले मिजाज के कारण राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अटल टनल रोहतांग और लाहौल घाटी के सिस्सू का बहुप्रतीक्षित दौरा रद्द कर दिया गया है। राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, बुधवार 29 अप्रैल को होने वाला यह दौरा पूर्णतः प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों के कारण स्थगित किया गया है। मौसम विभाग द्वारा आगामी छह दिनों तक क्षेत्र में भारी बर्फबारी और बारिश की चेतावनी जारी की गई है, जिसके चलते सुरक्षित वीवीआईपी आवाजाही संभव नहीं थी। इसी सुरक्षा संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने ऐन वक्त पर इस यात्रा को निरस्त करने का निर्णय लिया।
प्रशासनिक तैयारियां हुईं मुकम्मल, मनाली से लाहौल तक तैनात रहा भारी पुलिस बल
इस ऐतिहासिक दौरे की सफलता के लिए हिमाचल प्रदेश के जिला प्रशासन द्वारा व्यापक स्तर पर तैयारियां की गई थीं। पर्यटन नगरी मनाली से लेकर लाहौल घाटी के सिस्सू तक सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। सड़कों की मरम्मत, सौंदर्यीकरण और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जा चुका था। लाहौल-स्पीति की उपायुक्त किरण भड़ाना ने आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि केंद्र से प्राप्त निर्देशों के बाद अब सभी संबंधित विभागों को इस बदलाव की सूचना दे दी गई है।
अत्यधिक ऊंचाई पर खराब दृश्यता और बर्फबारी बनी राष्ट्रपति की यात्रा में बड़ी बाधा
प्रतिकूल मौसम में पहाड़ों पर यात्रा करना, विशेषकर हेलीकॉप्टर और काफिले के माध्यम से, अत्यधिक जोखिम भरा होता है। अटल टनल और सिस्सू जैसे अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अचानक होने वाली बर्फबारी और दृश्यता (Visibility) की कमी सुरक्षा प्रोटोकॉल के लिए बड़ी चुनौती पेश करती है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील इलाकों में ‘क्लीयरेंस’ मिलना अनिवार्य है, जो कि वर्तमान मौसमी हालातों में असंभव था। अतः, सुरक्षा मानकों को सर्वोपरि रखते हुए सचिवालय ने यह कदम उठाया है।
नई तिथियों की प्रतीक्षा: मौसम की अनुकूलता पर टिका राष्ट्रपति का आगामी प्रवास
राष्ट्रपति का दौरा रद्द होने के बाद अब प्रशासन और स्थानीय जनता की नजरें भविष्य के नए कार्यक्रम पर टिकी हैं। हिमालयी क्षेत्रों की अनिश्चितता को देखते हुए यह स्पष्ट है कि अब भविष्य में मौसम पूरी तरह साफ होने और सुरक्षा मानकों के अनुकूल होने के बाद ही नई तिथियों का निर्धारण किया जाएगा। राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा परिस्थितियों का पुनर्मूल्यांकन किए जाने के बाद ही इस दौरे की संभावना दोबारा बन पाएगी।
