Himachal: एचआरटीसी कंडक्टरों को 20 साल की सेवा पर दो अतिरिक्त इंक्रीमेंट, हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के परिचालकों को अब 20 साल की नियमित सेवा पूरी करने पर दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) का लाभ मिलेगा।

हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के परिचालकों को अब 20 साल की नियमित सेवा पूरी करने पर दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) का लाभ मिलेगा। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए परिवहन निगम को आदेश दिया कि वह छह माह के भीतर इस पूरी प्रक्रिया को पूर्ण करे और लाभार्थी कर्मचारियों को इसकी सूचना भी दे। अदालत ने इस मामले में निगम की ओर से 8 मई 2023 को पारित उस आदेश को भी रद्द कर दिया है, जिसमें याचिकाकर्ता की मांग को खारिज कर दिया गया था। अदालत ने यह आदेश रजनीश कुमार बनाम एचआरटीसी मामले में पारित किया गया।

याचिकाकर्ता ने शिकायत दी थी कि उन्होंने 20 वर्ष की नियमित सेवा पूरी कर ली है, इसके बावजूद उन्हें 10 सितंबर 2015 को जारी अधिसूचना के तहत मिलने वाली दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि का लाभ नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने निगम की ओर से उनकी मांग अस्वीकार करने वाले आदेश को मनमाना और नियमों के विपरीत बताया था। सुनवाई के दौरान परिवहन निगम के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि निगम ने 20 दिसंबर 2025 को नई कंसोलिडेटेड इंस्ट्रक्शन जारी की हैं। इन नई हिदायतों में 20 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले परिचालकों को दो अतिरिक्त इंक्रीमेंट देने से संबंधित शिकायतों का समाधान कर दिया गया है। गौरतलब है कि इंक्रीमेंट से जुड़े ऐसे ही मामलों को लेकर हाईकोर्ट में सैकड़ों याचिकाएं लंबित हैं। इस फैसले से अनेक परिचालकों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।

वर्कचार्ज स्टेटस प्राप्त कर्मचारियों को नोशनल इंक्रीमेंट देने पर करे पुनर्विचार
 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने वर्कचार्ज स्टेटस प्राप्त कर चुके कर्मचारियों को नोशनल इंक्रीमेंट दिए जाने के अधिकार पर  टिप्पणी करते हुए कहा है कि ऐसे मामलों पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। न्यायाधीश संदीप शर्मा की एकल पीठ ने उस याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया, जिसमें याचिकाकर्ता ने 14 अक्तूबर को जारी सरकारी आदेश को चुनौती दी थी। उक्त आदेश के माध्यम से याचिकाकर्ता को पहले प्रदान की गई नोशनल इंक्रीमेंट की सुविधा को वापस ले लिया गया था।

याचिकाकर्ता का तर्क था कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से सूरजमणि एवं अन्य मामले में दिए गए फैसले के अनुपालन में उन्हें वर्कचार्ज स्टेटस और उससे संबंधित वेतन वृद्धि का लाभ दिया गया था, लेकिन बाद में बिना किसी ठोस और वैध कारण के यह लाभ छीन लिया गया। अदालत ने इस मामले में जयंती राठौर बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार के पूर्व निर्णय का हवाला दिया। उस फैसले में हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि कर्मचारियों को आठ वर्ष की दैनिक वेतनभोगी सेवा पूरी करने के बाद वर्कचार्ज स्टेटस प्रदान किया जाना अनिवार्य है। साथ ही कहा था कि वर्कचार्ज स्टेटस मिलने की तिथि से नियमितीकरण तक कर्मचारियों को नोशनल लाभऔर वार्षिक इंक्रीमेंट दिए जाएंगे, हालांकि इन लाभों के तहत पिछली अवधि का कोई नकद एरियर देय नहीं होगा।

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