धर्मशाला। जिला कांगड़ा में इस वर्ष अब तक 69 लोगों ने आत्महत्या की है। हालांकि यह आंकड़ा अधिक है, लेकिन राहत की बात यह है कि ऐसे मामलों में पिछले वर्ष की अपेक्षा 40 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। आत्महत्या करने वालों में जहरीले पदार्थ के सेवन व फंदा लगाकर जान देने वालों की संख्या एक बराबर रही है। आत्महत्या करने वालों में 45 पुरुष व 24 महिलाएं शामिल रही हैं।
उधर आत्महत्या के मामलों में जिस तरह से इजाफा हो रहा है, ऐसे में कई ऐसे माध्यम हैं, जिनसे लोग अपनी समस्याओं का समाधान पाकर आत्महत्या जैसे कदम उठाने से पीछे हट सकते हैं। पुलिस प्रशासन की मानें तो घरेलू हिंसा, मानसिक तनाव, नशा, आर्थिक तंगी की वजह से लोग आत्महत्या जैसे कदम उठाते हैं। महिलाएं ऐसे कदम न उठाएं, इस संबंध में महिलाओं को विभिन्न स्तर पर काउंसलिंग सुविधा उपलब्ध है। यही नहीं, जिन महिलाओं की पुलिस द्वारा काउसंलिंग की जाती है, उनसे लगातार संपर्क करके उनकी स्थिति बारे भी जानकारी ली जाती है।
उधर, एएसपी कांगड़ा बीर बहादुर के अनुसार जिला कांगड़ा में इस वर्ष 69 मामले आत्महत्या के दर्ज हुए हैं। इनमें से 45 पुरुष व 24 महिलाएं हैं, जिन्होंने आत्महत्या की। यह आंकड़ा हालांकि गंभीर है लेकिन पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष आत्महत्या के मामलों में 40 फीसदी कमी दर्ज की गई है। लोगों का इस संबंध में जागरूक होना बेहद जरूरी है।
कांगड़ा जिले में इस साल अब तक 69 लोगों ने आत्महत्या की है, जिसमें 45 पुरुष और 24 महिलाएं शामिल हैं। यह आंकड़ा जिले में बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और सामाजिक-आर्थिक दबाव की ओर गंभीर चेतावनी देता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तनाव, बेरोजगारी, पारिवारिक समस्याएं और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की कमी मुख्य कारण हैं। स्थानीय प्रशासन ने भी स्थिति की गंभीरता को स्वीकारते हुए मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों और सहायता सेवाओं को तेज करने की जरूरत जताई है।
इसके साथ ही, समाज में समर्थन और परामर्श के लिए उपलब्ध संसाधनों को बढ़ाना और लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व के प्रति शिक्षित करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि आगे और जानें जोखिम में न आएं और आत्महत्या की घटनाओं को रोका जा सके।
