नई दिल्ली — संसद भवन की सुरक्षा को और मज़बूत बनाने के लिए आज एक अहम उच्च स्तरीय बैठक हुई। इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, संसद सचिवालय के शीर्ष अधिकारी, दिल्ली पुलिस आयुक्त, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के कमांडेंट और खुफिया एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
बैठक का मुख्य एजेंडा था—
- संसद भवन परिसर की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा।
- सुरक्षा में तकनीकी सुधार के लिए आधुनिक उपकरणों और AI-आधारित निगरानी सिस्टम का उपयोग।
- प्रवेश द्वारों पर बायोमेट्रिक और फेस रिकॉग्निशन तकनीक लागू करना।
- आपातकालीन प्रतिक्रिया (Emergency Response) की गति और दक्षता को और बेहतर करना।
- सुरक्षाकर्मियों के लिए नियमित मॉक ड्रिल और विशेष प्रशिक्षण।
अधिकारियों ने बताया कि संसद की सुरक्षा “ज़ीरो टॉलरेंस” नीति के तहत संचालित होगी, जिसमें किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत और सख़्त कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में यह भी तय हुआ कि
- परिसर में आने वाले वाहनों और व्यक्तियों की स्कैनिंग प्रक्रिया को और सख़्त बनाया जाएगा।
- संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त CCTV कैमरे लगाए जाएंगे, जो 24×7 निगरानी करेंगे।
- अग्निशमन, मेडिकल इमरजेंसी और आतंकवाद-रोधी अभ्यास नियमित अंतराल पर होंगे।
सरकार ने स्पष्ट किया कि भारत की संसद न केवल एक संवैधानिक संस्था है, बल्कि देश के लोकतांत्रिक गौरव का प्रतीक है। इसलिए इसकी सुरक्षा को लेकर कोई समझौता संभव नहीं है।
गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हम हर तरह की चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, और संसद की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
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