दिल्ली में यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. यमुना ने 2010 का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. सुबह 5:00 बजे तक जलस्तर 207.44 मीटर पर पहुँच गया था, जो खतरे के निशान से दो मीटर ऊपर है. यमुना बाजार में करीब आठ फुट तक पानी भरा हुआ है, जिससे राह शिविर में रह रहे लोगों को हटाना पड़ा. रिंग रोड पर भी पानी पहुँचने लगा है, जिसके कारण राजघाट से कश्मीरी गेट जाने वाले मार्ग पर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है
सचिवालय परिसर तक पहुंचा बाढ़ का पानी
दिल्ली में यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ने से राजधानी में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि अब पानी दिल्ली सचिवालय तक पहुंच गया है। सचिवालय वह जगह है जहां से दिल्ली सरकार की प्रशासनिक गतिविधियाँ संचालित होती हैं, ऐसे में यहां तक पानी पहुंचना बेहद चिंता का विषय है। इससे अधिकारियों और कर्मचारियों की आवाजाही पर भी असर पड़ने लगा है और कई विभागों का कामकाज प्रभावित हो रहा है।
मुख्य सड़कों पर भारी जलभराव, यातायात ठप
दिल्ली की कई बड़ी और व्यस्त सड़कों पर पानी भर जाने से यातायात व्यवस्था चरमरा गई है। प्रमुख मार्गों पर वाहन फंसे हुए हैं और लोगों को घंटों जाम में फंसे रहने की नौबत आ रही है। खासकर आईटीओ, रिंग रोड और पुरानी दिल्ली के पास की सड़कों पर पानी भर जाने से हालात और मुश्किल हो गए हैं। ऑफिस और स्कूल जाने वाले लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं।
रिहायशी इलाकों में घुसा पानी, लोग परेशान
सिर्फ सड़कों पर ही नहीं, बल्कि कई कॉलोनियों और रिहायशी इलाकों में भी पानी घुस चुका है। घरों और दुकानों में पानी भर जाने से लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है। कई परिवारों को अपना सामान ऊँचाई पर रखना पड़ा है ताकि नुकसान कम हो सके। दुकानदारों को भी अपने सामान को सुरक्षित करने के लिए दुकानें बंद करनी पड़ रही हैं।
प्रशासन और राहत दल अलर्ट पर
लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। दिल्ली सरकार और नगर निगम की ओर से राहत व बचाव दल प्रभावित इलाकों में तैनात किए गए हैं। पंपिंग मशीनों के जरिए पानी निकालने की कोशिशें चल रही हैं, लेकिन बारिश और यमुना के तेज बहाव की वजह से हालात पर काबू पाना आसान नहीं हो रहा। प्रशासन लोगों से अपील कर रहा है कि वे प्रभावित क्षेत्रों से निकलकर सुरक्षित जगहों पर चले जाएं।
खतरे का स्तर और संभावित संकट
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यमुना का जलस्तर और बढ़ा तो हालात और भी गंभीर हो सकते हैं। पहले ही राजधानी के कई इलाके बाढ़ की चपेट में हैं, ऐसे में हालात और बिगड़ने की संभावना है। खासकर निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सबसे ज्यादा खतरा है। प्रशासन ने साफ कहा है कि जरूरत पड़ने पर लोगों को अस्थायी राहत शिविरों में शिफ्ट किया जाएगा।
दिल्लीवासियों के सामने बड़ी चुनौती
आम जनता को इस समय रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में भी दिक्कत हो रही है। दूध, सब्जी और जरूरी सामान लाने-ले जाने में मुश्किलें आ रही हैं। बच्चों और बुजुर्गों के लिए हालात और परेशानी भरे साबित हो रहे हैं। कई जगहों पर बिजली आपूर्ति भी बाधित हुई है, जिससे लोगों की दिक्कतें और बढ़ गई हैं।
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