हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला आज एक ऐतिहासिक पल की साक्षी बन गई है। इस पर्वतीय राज्य के राजनीतिक इतिहास में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की भव्य मूर्ति का अनावरण आज किया गया। शिमला के प्रसिद्ध रिज मैदान पर आयोजित इस समारोह में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं का जमावड़ा लगा रहा। माहौल श्रद्धा, भावनाओं और गर्व से भरा हुआ था। हर कोई अपने “राजा साहब” को याद कर रहा था, जिनकी राजनीति जनसेवा और सादगी की मिसाल रही है।
शहर को इस अवसर पर विशेष रूप से सजाया गया था। रिज मैदान, मॉल रोड और आसपास के सभी रास्तों को बैनरों, पोस्टरों और फूलों से सजाया गया था। वीरभद्र सिंह की विशाल तस्वीरों से पूरा क्षेत्र रंगीन दिखाई दे रहा था। सुबह से ही लोग अपने नेता की एक झलक पाने के लिए मैदान में पहुंचने लगे थे। जैसे-जैसे समय बीतता गया, मैदान जनसैलाब में बदल गया।
इस कार्यक्रम में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, वीरभद्र सिंह की पत्नी और सांसद प्रतिभा सिंह, और उनके पुत्र विक्र्रमादित्य सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा प्रदेश के मंत्रियों, विधायकों और कांग्रेस के हजारों कार्यकर्ताओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।
कार्यक्रम का आरंभ सुबह 11 बजे हुआ। सबसे पहले वीरभद्र सिंह की स्मृति में दो मिनट का मौन रखा गया, जिसके बाद हिमाचली लोक कलाकारों ने पारंपरिक गीत प्रस्तुत किए। मंच पर लगे बड़े LED स्क्रीन पर वीरभद्र सिंह के जीवन और संघर्ष को दर्शाने वाला एक विशेष डॉक्युमेंट्री वीडियो चलाया गया। वीडियो में उनके राजनीतिक सफर, जनता के प्रति समर्पण और उनके विकास कार्यों की झलक दिखाई गई, जिसे देखकर उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गईं।
वीरभद्र सिंह की यह मूर्ति प्रसिद्ध मूर्तिकार राम वी. सुतार और उनके पुत्र अनिल सुतार ने बनाई है। इन्हीं कलाकारों ने भारत की सबसे ऊंची मूर्ति “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” का निर्माण किया था। वीरभद्र सिंह की यह कांस्य मूर्ति लगभग 12 फीट ऊंची है और इसे बनाने में लगभग ₹24 लाख की लागत आई है। मूर्ति में वीरभद्र सिंह को पारंपरिक हिमाचली पोशाक में दिखाया गया है — सिर पर पहाड़ी टोपी, चेहरे पर गंभीरता और करिश्माई मुस्कान, जो उनके व्यक्तित्व की पहचान थी।
अनावरण समारोह के लिए विशेष मंच तैयार किया गया था, जिसे फूलों और रोशनी से सजाया गया था। प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए थे। कार्यक्रम स्थल के चारों ओर 400 से अधिक पुलिस कर्मी तैनात थे। यातायात को सुचारू रखने के लिए शिमला में विशेष ट्रैफिक व्यवस्था की गई थी ताकि किसी तरह की अफरा-तफरी न हो।
सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी के पहुंचते ही भीड़ में जोश और उत्साह चरम पर पहुंच गया। पूरे मैदान में “वीरभद्र अमर रहें”, “राजा साहब अमर रहें” और “कांग्रेस जिंदाबाद” के नारे गूंज उठे। सोनिया गांधी ने मंच पर पहुंचकर प्रतिभा सिंह और विक्रमादित्य सिंह को गले लगाया, जिसके बाद पूरे माहौल में भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
अपने संबोधन में सोनिया गांधी ने कहा — “वीरभद्र सिंह केवल एक नेता नहीं थे, बल्कि हिमाचल की आत्मा थे। उन्होंने हमेशा जनता की सेवा को राजनीति का मूल मंत्र माना। उनका जीवन संघर्ष और समर्पण की कहानी है। उन्होंने हिमाचल को एक नई पहचान दी और लोगों के दिलों में अमिट स्थान बनाया।” सोनिया गांधी ने कहा कि उनकी सादगी और जनता के साथ जुड़ाव आज के नेताओं के लिए एक प्रेरणा है।
इसके बाद मंच पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा — “राजा साहब ने जिस तरह इस प्रदेश को संभाला, वह किसी पाठशाला से कम नहीं। उन्होंने हमें सिखाया कि राजनीति का असली अर्थ जनता की सेवा है, न कि सत्ता की लालसा। आज हम सब उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लेते हैं।”
प्रियंका गांधी वाड्रा ने अपने भाषण में कहा — “वीरभद्र सिंह जी का मेरे परिवार से एक गहरा रिश्ता था। उन्होंने हमेशा हिमाचल को अपना परिवार माना और यहां के लोगों से आत्मीयता से जुड़ाव रखा। यह मूर्ति केवल एक श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि उनके जीवन मूल्यों की प्रतीक है। आज का यह दिन कांग्रेस परिवार के लिए बेहद गर्व और भावनाओं से भरा हुआ है।”
कार्यक्रम में हजारों की संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक उपस्थित थे। मंच के सामने बैठी बुजुर्ग महिलाओं ने वीरभद्र सिंह के नाम के जयकारे लगाए और उनकी तस्वीरों पर फूल चढ़ाए। कई लोगों की आंखें उस वक्त नम हो गईं, जब अनावरण के साथ ही मूर्ति से पर्दा हटाया गया और आकाश में रंग-बिरंगे गुब्बारे छोड़े गए।
वीरभद्र सिंह के समर्थकों के लिए यह क्षण किसी उत्सव से कम नहीं था। शिमला की फिजाओं में संगीत, नारे और भावनाओं की गूंज थी। मूर्ति के अनावरण के बाद मुख्यमंत्री सुक्खू ने घोषणा की कि वीरभद्र सिंह के नाम पर एक राज्य स्तरीय विकास केंद्र और संग्रहालय बनाया जाएगा, जहां उनके जीवन, उपलब्धियों और योगदान को संजोया जाएगा।
कार्यक्रम के बाद सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य नेताओं ने वीरभद्र सिंह के निवास “Holy Lodge” जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। वहां उन्होंने परिवार के सदस्यों से मुलाकात की और उनकी यादों को साझा किया।
इस अवसर पर वीरभद्र सिंह के जीवन पर आधारित फोटोग्राफिक प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें उनके जीवन के अलग-अलग चरणों की दुर्लभ तस्वीरें प्रदर्शित की गईं। इसमें उनकी युवावस्था, चुनाव प्रचार के क्षण, विधानसभा में दिए भाषण और जनता से संवाद के दृश्य शामिल थे।
रात को रिज मैदान पर एक विशेष सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें हिमाचली लोक कलाकारों ने वीरभद्र सिंह को समर्पित गीत और नृत्य प्रस्तुत किए। बच्चों ने “वीरभद्र सिंह अमर रहें” गीत पर नृत्य किया, जिस पर लोगों ने खड़े होकर तालियां बजाईं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह आयोजन कांग्रेस के लिए केवल श्रद्धांजलि नहीं बल्कि जनता से फिर जुड़ने का प्रयास भी है। वीरभद्र सिंह जैसे करिश्माई नेता की विरासत को पार्टी एक प्रेरणा के रूप में देख रही है। उनकी लोकप्रियता का असर आज भी प्रदेश की राजनीति में महसूस किया जा सकता है।
वीरभद्र सिंह ने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में कभी सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। वे छह बार हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे और हर बार जनता ने उन्हें अपार स्नेह दिया। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में कई ऐतिहासिक काम किए। उनके समय में हिमाचल का विकास एक नई दिशा में आगे बढ़ा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मूर्ति आने वाली पीढ़ियों को उस दौर की याद दिलाएगी जब राजनीति का मतलब केवल सत्ता नहीं, बल्कि जनता के लिए काम करना था। शिमला का रिज अब न केवल एक पर्यटन स्थल रहेगा, बल्कि वीरभद्र सिंह की यादों का प्रतीक स्थल बन जाएगा।
इस आयोजन को देखकर यह साफ हो गया कि वीरभद्र सिंह भले ही शारीरिक रूप से अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका प्रभाव और प्रेरणा आज भी हर हिमाचली के दिल में ज़िंदा है। उनका नाम इस पहाड़ी प्रदेश की मिट्टी में रचा-बसा है, और उनकी यह मूर्ति उस अमर विरासत की गवाही देगी जो हमेशा प्रेरणा बनकर जीवित रहेगी।
निष्कर्ष
आज का यह दिन इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है।
शिमला की ठंडी हवाओं में आज श्रद्धा, गर्व और भावनाओं का संगम दिखाई दिया।
वीरभद्र सिंह की यह मूर्ति केवल धातु का आकार नहीं, बल्कि उस आत्मा का प्रतीक है
जिसने दशकों तक जनता की सेवा की, सादगी से नेतृत्व किया, और हिमाचल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
जब भी कोई इस मूर्ति को देखेगा, उसे उस नेता की याद आएगी जिसने सच्चे अर्थों में राजनीति को जनसेवा का माध्यम बनाया।
