नंगल/दौलतपुर चौक (ऊना)। नंगल रेलवे स्टेशन के पास मंगलवार रात को शरारती तत्वों ने जनशताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन के एक डिब्बे पर पथराव कर दिया। इस घटना में ट्रेन के एक डिब्बे के शीशे टूट गए, जिससे यात्रियों के बीच डर का माहौल पैदा हो गया। घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें यात्री यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि पथराव नंगल के पास हुआ और रेलवे को ट्रेन में सुरक्षा बढ़ाने की आवश्यकता है। आरपीएफ थाना नंगल के प्रभारी इंस्पेक्टर गिरिराज प्रसाद मीणा ने इस कहा कि उनके पास इस घटना की कोई शिकायत नहीं आई है और न ही इसकी जानकारी है। उन्होंने यह भी बताया कि रेलवे पुलिस ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई करती है। यदि पथराव की घटना हुई है तो वे इसकी जानकारी लेकर उचित कार्रवाई करेंगे।
पिछले कुछ समय से रेल गाड़ियों पर पत्थरबाजी की घटनाओं में लगातार इजाफा हुआ है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मंगलवार रात की घटना में टूटे हुए शीशे और घबराए हुए यात्रियों का दृश्य साफ दिख रहा है। यात्रियों का कहना है कि रेलवे प्रशासन को ट्रेन में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए।
स्थानीय यात्रियों नरिंद्र कुमार, विनोद कुमार, वंदना कुमारी और रमेश चंद का कहना है कि यदि जल्द ही रेल खंडों पर कड़ी निगरानी और सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में कोई बड़ी घटना घट सकती है। उन्होंने रेलवे प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों से गश्त बढ़ाने, सीसीटीवी कैमरे लगाने और दोषियों को शीघ्र गिरफ्तार करने की मांग की है।
इससे पहले भी जिले में दिल्ली-ऊना जनशताब्दी एक्सप्रेस और वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों पर पथराव की घटनाएं हो चुकी हैं। बीते साल जुलाई में ऊना से दिल्ली जाने वाली जनशताब्दी एक्सप्रेस (12057) पर पथराव हुआ था, जिसमें यात्री बाल-बाल बच गए थे। घटना के समय ट्रेन रूपनगर रेलवे स्टेशन से करीब 100-200 मीटर की दूरी पर थी, जब कुछ असामाजिक तत्वों ने पत्थर फेंका, जिससे कोच की खिड़की का शीशा टूट गया।
इसके अलावा अक्तूबर 2024 में हिमाचल प्रदेश के अंब-अंदौरा से नई दिल्ली जा रही वंदे भारत ट्रेन पर ऊना के बसाल क्षेत्र में भी पथराव किया गया था, जिसमें दो कोच के शीशे क्षतिग्रस्त हो गए थे। हालांकि, इस घटना में कोई यात्री घायल नहीं हुआ।
चिंताजनक बात यह है कि इन घटनाओं में आरपीएफ के हाथ खाली रहते हैं। यह घटनाएं अक्सर ऐसे स्थानों पर हो रही हैं, जहां कम आबादी और सीसीटीवी जैसी सुविधाएं नहीं हैं, जिससे आरोपियों का पकड़ना मुश्किल हो रहा है।
