Una News: मिड-डे-मील, आंगनबाड़ी कर्मियों की मांगों से गूंजा एमसी पार्क ऊना

ऊना। समय : सुबह 11 बजे। स्थान एमसी पार्क ऊना। सीटू, इंटक और एटक के बैनर तले जिलेभर के मिड-डे-मील, आंगनबाड़ी वर्कर, एंबुलेंस चालकों, किसान सभा और मनरेगा कर्मियों ने अपनी मांगों को एमसी पार्क में धरना प्रदर्शन लगाया हुआ है। इस दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ और अपनी मांगों के समर्थन में कर्मी व मजदूर नारेबाजी कर रहे। कर्मियों ने कहा कि मजदूर विरोधी कानूनों को वापस लिया जाए। समय पर वेतन और उसमें नियमित समय अवधि के बाद बढ़ोतरी होनी चाहिए। इसके अलावा बिजली संशोधन बिल वापिस लेने और बैंकों का निजीकरण न करने जैसे मुद्दे भी गूंजे।

समय : सुबह 11:30 बजे। सीटू के बैनर तले एकत्रित हुईं कार्यकर्ता समय पर वेतन न मिलने, वर्षों से एक ही मानदेय पर काम करवाने, अतिरिक्त विभागीय कार्यों का बोझ डालने और खराब पड़े मोबाइल फोन को बदलने में लापरवाही जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका यूनियन के जिला अध्यक्ष नरेश शर्मा के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने भाग लेकर अपनी एकजुटता का परिचय दिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन भी सौंपा।

नरेश शर्मा ने आरोप लगाया कि उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा, जिससे उनके परिवारों का भरण-पोषण प्रभावित हो रहा है। कई बार महीनों तक भुगतान लंबित रहता है, जिससे आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्षों से एक ही मानदेय पर उनसे लगातार काम लिया जा रहा, जबकि महंगाई लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर विभागीय कार्यों के अलावा अन्य योजनाओं का अतिरिक्त बोझ डाला जाता है, लेकिन इसके लिए कोई अतिरिक्त पारिश्रमिक नहीं दिया जाता। विभाग द्वारा दिए गए मोबाइल फोन लंबे समय से खराब पड़े हैं और उन्हें बदलने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे ऑनलाइन कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई कार्यकर्ताओं ने अपने पैसे खर्च कर मोबाइल फोन भी खरीदे।

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समय : दोपहर 12 बजे

क्या बोले मनरेगा कर्मी

इस अवसर पर मनरेगा कर्मियों ने भी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। अंजु देवी ने बताया कि बीते दो साल से मनरेगा के तहत कार्य नहीं मिल रहा। कहा कि उनकी आर्थिक स्थिति लगातार खराब हो रही। इससे उन्हें परेशानी पेश आ रही। कहा कि उन्हें जल्द मनरेगा के तहत कार्य दिया जाए।

कुठार कलां से मनरेगा कर्मी शुभलता ने बताया कि बीते लंबे समय कार्य नहीं मिल रहा। परिवार की आर्थिक हालत पहले से खराब है और मनरेगा से कुछ आस जगी थी। लेकिन दो साल होने को है और कोई कार्य नहीं मिला। कहा कि सरकार को गरीब वर्ग के बारे सोचना चाहिए और मनरेगा का कार्य मजदूरों को दिया जाए।

अमरो देवी ने बताया कि गांव में मनरेगा के तहत बीते कई सालों से कार्य चल रहा था। लेकिन दो साल से काम मिलना बंद हो चुका है। केवल योजना का नाम बदल दिया गया और कार्य नहीं दिया जा रहा। कहा कि केंद्र सरकार ऐसे छोटी और लाभकारी योजना को नियमित तौर पर चलाए।

नीलम देवी निवासी खुरवाईं ने बताया कि मनरेगा योजना लाखों परिवारों की सहारा है। कहा कि इस योजना के तहत अगर कार्य नहीं मिलेगा तो गरीब परिवार कहां जाएंगे। कहा कि पंचायतों में विकास कार्य रुके नहीं हैं। ऐसे में उन्हें काम मिलना भी बंद नहीं होना चाहिए।

एंबुलेंस कर्मी बैठे हड़ताल पर

उधर, 108 व 102 एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन ने भी पार्क में अपनी मांगों को लेकर रोष प्रदर्शन कर रहे हैं। कर्मचारियों ने एकजुट होकर शहर में प्रदर्शन करते हुए सरकार और प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की तथा अपनी मांगों को शीघ्र पूरा करने की मांग उठाई। यूनियन के प्रधान सुनील दत्त, महासचिव बालक राम, शविंदर शर्मा और कुलबीर सिंह सहित अन्य कर्मचारियों ने कहा कि लंबे समय से कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन, ओवरटाइम, ईपीएफ और ईएसआई जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि 12-12 घंटे की ड्यूटी के बावजूद नियम अनुसार डबल ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया जाता। कई कर्मचारियों को सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन तक नहीं मिल रहा, जिससे उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा। उन्होंने कहा कि मांग उठाने वाले कर्मचारियों को मानसिक रूप से प्रताडि़त किया जाता और तबादले या नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है। कर्मचारियों ने मांग उठाई कि सभी श्रम कानूनों को सख्ती से लागू किया जाए, सेवा से निकाले गए कर्मचारियों को तुरंत बहाल किया जाए तथा तबादला आदेशों को रद्द किया जाए। इसके अलावा प्रति माह न्यूनतम 30 हजार रुपये वेतन देने और सभी प्रकार की छुट्टियों का प्रावधान सुनिश्चित करने की भी मांग की गई। यूनियन प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो आगामी दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

सरकारी चालकों के हवाले एंबुलेंस

108 व 102 एंबुलेंस कर्मचारियों के प्रदर्शन के चलते गुरुवार को जिला ऊना के स्वास्थ्य संस्थानों में एंबुलेंस सेवा बुरी तरह से प्रभावित रही। ऐसे में एबुलेंस सरकारी चालकों के हाथों में रही। सरकारी चालकों ने मरीजों को आपात स्थिति में सेवाएं प्रदान की।

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