मध्य प्रदेश के एक सरकारी स्कूल में लापरवाही का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां बच्चों को शिक्षा देने की जगह शिक्षकों ने उन्हें दीवारों की पुताई और सफाई में लगा दिया। यह घटना सामने आते ही स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया और प्रशासन तक इसकी शिकायत पहुंच गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने तत्काल जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, यह मामला जिले के एक प्राथमिक विद्यालय का है, जहां हाल ही में स्कूल की मरम्मत और रंगाई-पुताई का काम शुरू हुआ था। ठेकेदार की जगह स्कूल प्रबंधन ने बच्चों को ही पुताई करवाने लगा दिया। छोटे-छोटे छात्र दीवारों पर ब्रश लेकर रंगाई करते दिखाई दिए, जबकि शिक्षक और स्कूल कर्मचारी दूर खड़े तमाशा देखते रहे।
यह पूरा मामला तब उजागर हुआ जब किसी ग्रामीण ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि 8 से 12 वर्ष तक की उम्र के बच्चे स्कूल यूनिफॉर्म में रंग और ब्रश लेकर दीवारें पुत रहे हैं।
वीडियो वायरल होते ही शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। स्थानीय अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जहां बच्चों को किताबें पकड़ाई जानी चाहिए, वहां उन्हें ब्रश और बाल्टी थमाई जा रही है।
कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित शिक्षकों और प्राचार्य से स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने कहा कि बच्चों से किसी भी तरह का श्रम करवाना बाल अधिकारों का उल्लंघन है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा विभाग के अधिकारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह साबित हुआ है कि स्कूल में रंगाई का काम बच्चों से करवाया जा रहा था। फिलहाल संबंधित शिक्षकों को निलंबित करने की सिफारिश की गई है और पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे मामलों पर कड़ी कार्रवाई हो ताकि भविष्य में किसी भी बच्चे को इस तरह का शोषण न झेलना पड़े।
इस घटना ने “शिक्षा के अधिकार” की वास्तविक स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर बच्चों को पढ़ाई से ज्यादा मजदूरी जैसा काम क्यों कराया जा रहा है।
