दिल्ली की एक अदालत में ऑनलाइन सुनवाई के दौरान एक चौंकाने वाला वाकया हुआ, जब एक फरियादी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चल रही सुनवाई के बीच ही सिगरेट जलाकर पीना शुरू कर दिया। इस अनुशासनहीन व्यवहार को देखते हुए कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई और फरियादी को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होने का सख्त आदेश दिया।
क्या है पूरा मामला?
यह घटना दिल्ली की एक अदालत में उस वक्त हुई जब एक मुकदमे की वर्चुअल सुनवाई चल रही थी। आमतौर पर, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई के दौरान पक्षकारों से मर्यादित आचरण की उम्मीद की जाती है, लेकिन इस मामले में फरियादी ने कोर्ट की गंभीरता को नजरअंदाज करते हुए सिगरेट पीना शुरू कर दिया।
कोर्ट ने जब यह देखा तो तुरंत ही उसकी इस हरकत पर नाराजगी जताई। न्यायालय ने इसे अनुचित और न्यायिक मर्यादा का उल्लंघन करार दिया। इसके बाद अदालत ने फरियादी को फटकार लगाते हुए स्पष्ट किया कि ऐसी अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और उसे अगली सुनवाई में फिजिकली अदालत में हाजिर होने का निर्देश दिया।
कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
न्यायाधीश ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए टिप्पणी की कि अदालत की गरिमा बनाए रखना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है, चाहे सुनवाई ऑनलाइन हो या फिजिकल। न्यायपालिका की कार्यवाही के दौरान ऐसा आचरण न केवल अस्वीकार्य है, बल्कि यह न्यायिक प्रक्रिया का भी अनादर है।
न्यायपालिका की गरिमा और अनुशासन का महत्व
यह पहली बार नहीं है जब वर्चुअल सुनवाई के दौरान अनुशासनहीनता का मामला सामने आया हो। पहले भी कई मामलों में लोग अदालत की कार्यवाही को गंभीरता से नहीं लेने के कारण न्यायालय की नाराजगी झेल चुके हैं।
ऑनलाइन सुनवाई की सुविधा लोगों के लिए कोर्ट की पहुंच आसान बनाने के लिए शुरू की गई थी, लेकिन कुछ लोग इसका दुरुपयोग कर रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वर्चुअल सुनवाई के दौरान अनुशासन बनाए रखने के लिए सख्त नियमों की जरूरत है?
कोर्ट का यह फैसला साफ दर्शाता है कि न्यायालय की गरिमा को बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और ऐसे मामलों में सख्त कदम उठाने से भी न्यायपालिका पीछे नहीं हटेगी।
