Shimla News: 5 करोड़ रुपये की लागत से बनी सुरक्षा दीवार एक साल भी नहीं टिकी, हजारों छात्रों की सुरक्षा पर सवाल

बालूगंज में बनी सुरक्षा दीवार एक साल में ही ढही, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल

जिला शिमला के बालूगंज क्षेत्र में बनाई गई सुरक्षा दीवार (Retaining Wall) मात्र एक वर्ष के भीतर ही ढह जाने से क्षेत्र में गंभीर चिंता का माहौल पैदा हो गया है। यह दीवार स्थानीय ढलान और भूस्खलन जैसी समस्याओं से सुरक्षा के उद्देश्य से बनाई गई थी, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता और स्थायित्व पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं।

बालूगंज–समरहिल मार्ग पर बस के गुजरते ही गिरा मलबा, यात्रियों में मची अफरा-तफरी

शुक्रवार को स्थिति उस समय और अधिक गंभीर हो गई जब बालूगंज से समरहिल चौक की ओर जा रही एक निजी बस जैसे ही उस क्षेत्र से गुजरी, अचानक पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और पत्थर गिरने लगे। इससे बस यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई और कुछ समय के लिए सड़क पर यातायात भी बाधित हो गया। हालांकि किसी बड़े हादसे की सूचना नहीं मिली, लेकिन यह घटना बेहद खतरनाक साबित हो सकती थी।

बालूगंज क्षेत्र में बार-बार भूस्खलन से लोग चिंतित, सुरक्षा दीवार ढहने से बढ़ी परेशानी

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में पहले भी भूस्खलन की समस्या सामने आती रही है, लेकिन सुरक्षा दीवार बनने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि स्थिति में सुधार होगा। मगर दीवार के जल्द ही ढह जाने से उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।

विशेषज्ञों ने जताई लापरवाही की आशंका, प्रशासन ने जांच के दिए आदेश

विशेषज्ञों का मानना है कि भारी बारिश, कमजोर निर्माण सामग्री और सही तकनीकी देखरेख की कमी के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई हो सकती है। वहीं, स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश देने की बात कही है और क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने की भी संभावना जताई जा रही है।

इस घटना ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बालूगंज में शिव बावड़ी लैंडस्लाइड के बाद बनी 5 करोड़ की सुरक्षा दीवार एक साल में ढही, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल

राजधानी शिमला के बालूगंज क्षेत्र में शिव बावड़ी लैंडस्लाइड के बाद लोगों की सुरक्षा के लिए बनाई गई सुरक्षा दीवार (Retaining Wall) मात्र एक वर्ष के भीतर ही ढह जाने से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। यह घटना शुक्रवार करीब 11 बजे सामने आई, जब अचानक दीवार का बड़ा हिस्सा भरभराकर गिर गया, जिससे आसपास के लोगों में दहशत फैल गई।

जानकारी के अनुसार, इस सुरक्षा दीवार का निर्माण केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) द्वारा लगभग 5 करोड़ रुपये की लागत से किया गया था। यह कार्य पिछले वर्ष दिसंबर में ही पूरा हुआ था, ताकि क्षेत्र में बार-बार होने वाले भूस्खलन और मिट्टी धंसने की समस्या पर रोक लगाई जा सके। लेकिन इतने कम समय में ही संरचना का ढह जाना निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

बालूगंज में सुरक्षा दीवार ढहने से बढ़ी चिंता, स्थानीय लोग डरे, विशेषज्ञों ने लापरवाही की जताई आशंका

स्थानीय लोगों का कहना है कि शिव बावड़ी लैंडस्लाइड के बाद इस क्षेत्र को सुरक्षित बनाने के लिए यह दीवार एक बड़ी उम्मीद थी, लेकिन इसके टूट जाने से अब फिर से खतरा बढ़ गया है। लोगों में भय का माहौल है और वे प्रशासन से तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारी बारिश, कमजोर निर्माण सामग्री, सही ड्रेनेज सिस्टम की कमी और तकनीकी देखरेख में लापरवाही इस तरह की घटनाओं का मुख्य कारण हो सकती है। यदि निर्माण के दौरान भू-तकनीकी सर्वेक्षण और सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन किया जाता, तो शायद यह स्थिति नहीं बनती।

बालूगंज हादसे के बाद प्रशासन सक्रिय, जांच के आदेश की संभावना, निर्माण गुणवत्ता पर फिर उठे सवाल

घटना के बाद प्रशासन और संबंधित विभाग सक्रिय हो गए हैं और मामले की जांच के आदेश दिए जाने की संभावना है। साथ ही क्षेत्र में अस्थायी सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है।

इस घटना ने एक बार फिर पहाड़ी राज्यों में हो रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, पारदर्शिता और सुरक्षा मानकों पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं।

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