Kinnaur Kailash Yatra : किन्नौर कैलाश के दर्शन कर छलक आईं आंखें, भक्ति में डूबे श्रद्धालु; जानें कैसा रहा सफर

Kinner Kailash Yatra : बारिश और अंधेरे के बीच रात 2 बजे शुरू हुआ श्रद्धालुओं का दुर्गम सफर

मंगलवार रात, किन्नौर कैलाश यात्रा 2025 के दौरान श्रद्धालु रात 2 बजे बारिश के बीच दुर्गम और चुनौतीपूर्ण ट्रैक पर निकल पड़े। कठिन मौसम और अंधेरे के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था डगमगाई नहीं।

यात्रियों ने बताया कि यात्रा के दौरान उन्हें फिसलन भरे रास्तों, ठंडी हवाओं और बारिश से जूझना पड़ा, लेकिन आध्यात्मिक ऊर्जा और भगवान शिव में विश्वास ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी। श्रद्धालुओं ने इस कठिन यात्रा के अनुभवों को विस्तार से साझा किया, जो उनकी आस्था और साहस की मिसाल पेश करते हैं।

अगर आप चाहें, तो मैं इस रिपोर्ट को श्रद्धालुओं के इंटरव्यू या अनुभवों के साथ और विस्तार से लिख सकती हूँ।

बारिश, अंधेरा और दुर्गम रास्ता… फिर भी नहीं रुकी आस्था: किन्नौर कैलाश यात्रा में दिखा श्रद्धा का अद्भुत दृश्य

मंगलवार रात किन्नौर कैलाश यात्रा में भगवान शिव के दर्शनों की व्याकुलता और श्रद्धालुओं के पहाड़ जैसे हौसले की अनूठी झलक देखने को मिली। श्रद्धालु रात 2 बजे तेज बारिश के बीच दुर्गम ट्रैक पर निकले और कई घंटे की कठिन चढ़ाई के बाद दोपहर तक किन्नौर कैलाश के दर्शन कर सके।

इस अद्भुत अनुभव के दौरान कई श्रद्धालुओं की आंखें छलक आईं, और वे भक्ति में पूरी तरह डूब गए। यह दृश्य श्रद्धा, साहस और भगवान शिव के प्रति अगाध विश्वास का प्रतीक बन गया।

श्रद्धा हो तो हर रास्ता आसान: किन्नौर कैलाश यात्रा में बोले श्रद्धालु – ‘यह सपना था, जो भोलेनाथ ने पूरा कर दिया’

किन्नौर कैलाश यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए इसे आस्था, आत्मबल और भक्ति की यात्रा बताया।

किन्नौर की श्रद्धालु आंचल ने कहा कि पार्वती कुंड तक का रास्ता तो ठीक था, लेकिन उसके बाद की चढ़ाई बेहद चुनौतीपूर्ण रही। उन्होंने बताया, “ऊपर पहुंचकर ऐसा लगा जैसे सब कुछ सपना सा है… भोलेनाथ के दर्शन के बाद तो जैसे जीवन ही पूर्ण हो गया।

वहीं, मंडी से पहुंचे सनातनी गोसेवक ठाकुर बोधराज ने बताया कि वह दूसरी बार किन्नौर कैलाश यात्रा पर आए हैं। उन्होंने कहा, “लोग कहते हैं सभी कैलाश बार-बार, किन्नौर कैलाश एक बार, लेकिन मेरी मान्यता है कि अगर श्रद्धा हो, तो किन्नौर कैलाश बार-बार आना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि हर उम्र का व्यक्ति इस यात्रा में शामिल हो सकता है, बशर्ते मन में सच्ची श्रद्धा और संकल्प हो। जो श्रद्धा से डगमगाते हैं, वे बीच रास्ते से लौट जाते हैं, लेकिन सच्चे भक्त हर कठिनाई पार कर लेते हैं।

किन्नौर कैलाश यात्रा श्रीखंड महादेव से भी कठिन: हरियाणा के श्रद्धालु निहार ने साझा किया अनुभव

किन्नौर कैलाश यात्रा की कठिनाईयों को लेकर हरियाणा से आए श्रद्धालु निहार ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह यात्रा श्रीखंड महादेव यात्रा से भी अधिक चुनौतीपूर्ण है।

उन्होंने बताया, “मैं श्रीखंड यात्रा पहले ही कर चुका हूं, लेकिन किन्नौर कैलाश की चढ़ाई ने उसे भी पीछे छोड़ दिया।” निहार के अनुसार, रात 2 बजे यात्रा शुरू करनी पड़ती है और दोपहर 12 बजे तक चोटी पर पहुंचना जरूरी होता है, क्योंकि इसके बाद मौसम बिगड़ने लगता है।

उन्होंने यह भी बताया कि बारिश और फिसलन भरे ट्रेल ने यात्रा को और अधिक कठिन बना दिया। तांगलिंग बेस कैंप से लगभग 19 किमी की सीधी और खड़ी चढ़ाई के बाद ही भोले बाबा के दर्शन संभव हो पाते हैं।

यह अनुभव दर्शाता है कि किन्नौर कैलाश यात्रा न केवल शारीरिक साहस बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक दृढ़ता की भी परीक्षा है।

“20 मिनट तक बैठकर रोता रहा”: किन्नौर कैलाश पहुंचते ही भावुक हुए श्रद्धालु निहार

हरियाणा से आए श्रद्धालु निहार ने किन्नौर कैलाश यात्रा के अनुभव को बेहद आध्यात्मिक और भावनात्मक बताया। उन्होंने कहा, “जब मैंने भोलेनाथ के दर्शन किए, तो मैं लगभग 20 मिनट तक वहीं बैठकर रोता रहा। मेरी आंखें खुद-ब-खुद नम हो गईं।

श्रद्धा से भरपूर इस कठिन यात्रा में बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं ने भी हिम्मत और आस्था के साथ भाग लिया। यात्रियों का कहना है कि यहां पहुंचने के लिए केवल शरीर नहीं, बल्कि मन भी तैयार होना चाहिए

कई श्रद्धालु ऐसे भी होते हैं जो रास्ते की कठिनाइयों से थककर दर्शन किए बिना ही लौट जाते हैं, लेकिन जिनके मन में सच्ची श्रद्धा होती है, वे हर कठिनाई पार कर लेते हैं।

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