पंचायत चुनावों में सख्ती: चिट्टे के आरोप तय होने पर प्रधान की कुर्सी जाएगी
पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को लेकर प्रदेश सरकार नियमों को सख्त करने की तैयारी में है। नए प्रावधानों के तहत यदि कोई व्यक्ति पंचायत प्रधान बनने के बाद चिट्टा (नशा) से जुड़े आरोपों में दोषी ठहराया जाता है या आरोप तय हो जाते हैं, तो ऐसी स्थिति में उसकी कुर्सी चली जाएगी।
पंचायत चुनावों में सख्ती: चिट्टे के आरोप तय होने पर प्रधान की कुर्सी जाएगी
हिमाचल प्रदेश में आगामी पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को लेकर प्रदेश सरकार नियमों को और सख्त करने जा रही है। प्रस्तावित प्रावधानों के तहत यदि कोई व्यक्ति पंचायत प्रधान बनने के बाद चिट्टा (नशा) से जुड़े मामलों में आरोप तय हो जाते हैं, तो उसे पद से हटाया जा सकता है।
विधेयक में यह भी स्पष्ट किया गया है कि चिट्टे के मामलों में दोषी पाए गए लोग चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। पहले से ही इस संबंध में रोक का प्रावधान किया गया था, जिसे अब और कड़ा किया जा रहा है।
इसके अलावा पंचायत का कोरम पूरा करने के नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब परिवार के एक सदस्य की उपस्थिति को पूरे परिवार का प्रतिनिधित्व नहीं माना जाएगा। पंचायत बैठकों के लिए कुल मतदाताओं में से कम से कम 10 प्रतिशत की उपस्थिति अनिवार्य होगी।
जिला परिषद कोरम में बदलाव: अवैध कब्जाधारियों पर भी चुनाव लड़ने से रोक
पंचायती राज संस्थाओं से जुड़े नियमों में संशोधन के तहत जिला परिषद के कोरम नियमों में भी बदलाव किया गया है। पहले कोरम पूरा करने के लिए सदस्यों की आधी उपस्थिति आवश्यक होती थी, लेकिन अब इसे घटाकर एक-तिहाई (वन थर्ड) कर दिया गया है।
सरकार का मानना है कि कोरम पूरा न होने के कारण कई योजनाएं स्वीकृत नहीं हो पाती थीं, इसलिए यह बदलाव किया गया है। बुधवार को यह विधेयक विधानसभा के पटल पर रखा गया, जिसे वीरवार को सर्वसम्मति से मंजूरी मिलने की संभावना है।
इसके अलावा नए प्रावधानों के अनुसार, सरकारी या पंचायत भूमि पर अवैध कब्जा करने वाले लोग भी अब चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।
चुनाव में सख्ती: डिफॉल्टर और रिकवरी लंबित उम्मीदवार होंगे अयोग्य
पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने नए सख्त प्रावधान लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत सहकारी बैंकों और सोसाइटियों के डिफॉल्टरों को चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया गया है।
इसके अलावा, जिन लोगों पर पंचायत के ऑडिट में रिकवरी लंबित है, वे भी चुनावी प्रक्रिया से बाहर रहेंगे। सरकार का मानना है कि यह कदम पंचायतों में वित्तीय जवाबदेही को मजबूत करेगा।
सरकार के अनुसार इन सख्त नियमों का उद्देश्य साफ-सुथरी छवि वाले और ईमानदार प्रतिनिधियों को पंचायतों में लाना है, ताकि ग्रामीण विकास योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हो सके। इस फैसले से चुनावी मैदान में स्वच्छ छवि वाले उम्मीदवारों को बढ़ावा मिलेगा और पंचायत स्तर पर सुशासन को मजबूती मिलेगी।
