HP CBSE स्कूल भर्ती: 5600 पदों के लिए 12 हजार शिक्षकों के आवेदन

CBSE स्कूल भर्ती पर हाईकोर्ट में सुनवाई, हजारों शिक्षकों की टिकी नजरें

Joint Teachers Association की ओर से दायर याचिका पर Himachal Pradesh High Court की खंडपीठ सुनवाई करेगी।

इस मामले में आने वाले फैसले पर प्रदेश के हजारों शिक्षकों की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका असर भर्ती प्रक्रिया और कई अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ सकता है।

CBSE स्कूल भर्ती पर हाईकोर्ट में आज सुनवाई, 5600 पदों के लिए 12 हजार शिक्षकों ने किया आवेदन

Himachal Pradesh में सरकारी CBSE स्कूलों के लिए शिक्षकों की चयन प्रक्रिया को लेकर गुरुवार को Himachal Pradesh High Court में अहम सुनवाई होगी। Joint Teachers Association की ओर से दायर याचिका पर हाईकोर्ट की खंडपीठ सुनवाई करेगी। इस मामले में आने वाले फैसले पर प्रदेश के हजारों शिक्षकों की नजरें टिकी हुई हैं।

इसी चयन प्रक्रिया के तहत 22 मार्च को प्रस्तावित परीक्षा आयोजित की जानी है। शिक्षा विभाग ने प्रदेश के चयनित सरकारी स्कूलों में CBSE पैटर्न लागू करने के लिए सेवारत शिक्षकों से आवेदन आमंत्रित किए थे।

इस प्रक्रिया के तहत करीब 5600 पदों के लिए लगभग 12 हजार शिक्षकों ने आवेदन किया है। चयन के लिए लिखित परीक्षा आयोजित करने का कार्यक्रम तय किया गया है।

संयुक्त शिक्षक संघ ने चयन प्रक्रिया के कुछ प्रावधानों और परीक्षा प्रणाली पर आपत्ति जताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। अब इस मामले में अदालत के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

CBSE स्कूल भर्ती: चयन प्रक्रिया पर उठे सवाल, परीक्षा को आधार बनाने पर आपत्ति

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि शिक्षकों के चयन के लिए लिखित परीक्षा को आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। हालांकि, याचिका दायर करने वाले कई शिक्षक स्वयं भी इस भर्ती प्रक्रिया के आवेदक हैं। याचिका में चयन के मानदंडों और परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठाए गए सवालों पर अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई है।

अब गुरुवार को होने वाली सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि 22 मार्च को प्रस्तावित परीक्षा तय कार्यक्रम के अनुसार आयोजित होगी या चयन प्रक्रिया में कोई बदलाव किया जाएगा।

इस संबंध में शिक्षा विभाग का कहना है कि CBSE पैटर्न पर आधारित स्कूलों के माध्यम से सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने का प्रयास किया जा रहा है। इसके तहत चयनित शिक्षकों को इन स्कूलों में तैनात किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के अनुरूप बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सके।

कठिन क्षेत्रों में कार्यकाल पूरा होने पर तबादला जरूरी: हाईकोर्ट

Himachal Pradesh High Court ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी कठिन या जनजातीय क्षेत्र में अपना निर्धारित कार्यकाल पूरा कर लेता है, तो उसका स्थानांतरण करना सरकार की जिम्मेदारी है। अदालत ने कहा कि ऐसा न होने पर इन क्षेत्रों में नियुक्ति को सजा के रूप में देखा जाने लगेगा।

न्यायमूर्ति Ajay Mohan Goel की अदालत ने कहा कि यदि कर्मचारियों को यह भरोसा नहीं होगा कि कार्यकाल पूरा होने के बाद उनका तबादला कर दिया जाएगा, तो कठिन क्षेत्रों में कोई भी स्वेच्छा से सेवा नहीं देना चाहेगा। समय पर स्थानांतरण न होने से इन क्षेत्रों में नियुक्तियां पनिशमेंट पोस्टिंग मानी जाने लगेंगी। अदालत ने यह भी कहा कि कठिन क्षेत्रों में कार्यकाल पूरा करने वाले शिक्षकों का स्थानांतरण सजा नहीं, बल्कि उनका अधिकार है।

अदालत ने 31 जनवरी के आदेश को रद्द करते हुए प्रतिवादी शिक्षा विभाग और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि चार सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता शिक्षक का वर्तमान स्थान से स्थानांतरण कर उन्हें किसी अन्य क्षेत्र में तैनात किया जाए और उनकी जगह नए व्यक्ति की नियुक्ति की जाए।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि याचिकाकर्ता का तबादला इसलिए नहीं किया गया, क्योंकि इससे उनके बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती थी। हालांकि अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए विभाग के इस रवैये को मनमाना बताया।

याचिकाकर्ता शिक्षक वर्तमान में Mandi जिले के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कठोग में तैनात हैं। उन्होंने अपनी याचिका में बताया कि कठिन क्षेत्र में सामान्य कार्यकाल पूरा करने के बावजूद 31 जनवरी 2026 को जारी आदेश के माध्यम से उनके तबादले के अनुरोध को खारिज कर दिया गया था, जिसे उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अदालत ने उसी याचिका पर यह फैसला सुनाया है।

पिछला लेख
हिमाचल में शिक्षा व्यवस्था में बदलाव, छठी से अंग्रेजी माध्यम अनिवार्य
अगला लेख
HP CBSE स्कूल भर्ती: 5600 पदों के लिए 12 हजार शिक्षकों के आवेदन

इस विषय से संबंधित:

Toggle Dark Mode