Himachal: तीसरे बच्चे के जन्म पर भी महिला को मिलेगा मातृत्व अवकाश, हाईकोर्ट से सरकार को दिया आदेश

धर्मपुर मार्ग पर निजी बस हादसा, बनेरड़ी के पास पलटी बस

मंडी से धर्मपुर की ओर आ रही एक निजी बस बुधवार सुबह बनेरड़ी से आगे मलोन के पास अचानक अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गई। हादसे के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।


तीसरे बच्चे पर भी मातृत्व अवकाश का अधिकार, हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

प्रदेश हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए याचिकाकर्ता महिला को उसके तीसरे बच्चे के जन्म पर भी मातृत्व अवकाश देने का आदेश दिया है। यह फैसला महिलाओं के मातृत्व अधिकारों को मजबूत बनाने वाला माना जा रहा है, क्योंकि अब तक तीसरे बच्चे पर अवकाश देने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी।

हाईकोर्ट के इस निर्णय से न केवल याचिकाकर्ता को राहत मिली है, बल्कि प्रदेश की हजारों कामकाजी महिलाओं के लिए भी यह एक मिसाल बन सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मातृत्व एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसे किसी भी नियम या नीति के कारण सीमित नहीं किया जा सकता।

फैसले के बाद महिला कर्मचारियों में खुशी की लहर है और इसे महिलाओं के हित में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

हिमाचल हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, तीसरे बच्चे पर भी मिलेगा मातृत्व अवकाश

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए याचिकाकर्ता महिला को उसके तीसरे बच्चे के जन्म पर भी मातृत्व अवकाश प्रदान करने का आदेश दिया है।

न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 15, 21, 42 और 51 का हवाला देते हुए कहा कि महिला की गरिमा, स्वास्थ्य और अधिकारों की रक्षा करते हुए मातृत्व अवकाश से वंचित नहीं किया जा सकता।

अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि याचिकाकर्ता द्वारा किए गए आवेदन की तिथि से 12 सप्ताह की अवधि के लिए मातृत्व अवकाश दिया जाए। यह फैसला महिलाओं के अधिकारों को सशक्त करने की दिशा में एक मील का पत्थर माना जा रहा है।

हाईकोर्ट ने तीसरे बच्चे पर भी मातृत्व अवकाश देने पर जोर, महिला के मौलिक अधिकारों को बताया सर्वोपरि

अदालत ने कहा कि केंद्रीय सिविल सेवा अवकाश नियम 1972 के आधार पर महिला कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश से जुड़े मामलों का निर्णय करते समय एक महत्वपूर्ण मानक को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। ऐसे मामलों का केवल नियमों के आधार पर निपटारा ही नहीं करना है, बल्कि उन्हें भारत के संविधान में निहित महिलाओं के मौलिक अधिकारों के संदर्भ में भी देखना चाहिए।

केंद्रीय सिविल सेवा अवकाश नियम 1972 भले ही महिला कर्मचारी को उसके तीसरे जैविक बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश की अनुमति नहीं देते, लेकिन वर्ष 2017 में संशोधित मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 की धारा 5(3) इस अधिकार को मान्यता देती है। हालांकि, तीसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश की अवधि पहले दो बच्चों की तुलना में कम निर्धारित की गई है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि मातृत्व अवकाश का निर्णय करते समय महिला की गरिमा, सुरक्षा और अधिकारों को सर्वोच्च मानते हुए ही व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।

तीसरे बच्चे पर मातृत्व अवकाश को लेकर याचिकाकर्ता का मामला—हाईकोर्ट ने सुनाया महत्वपूर्ण फैसला

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में पेश एक महत्त्वपूर्ण मामले में याचिकाकर्ता महिला ने अपने तीसरे बच्चे के जन्म पर मातृत्व अवकाश की मांग की थी। विभाग ने यह कहते हुए उसका आवेदन खारिज कर दिया था कि तीसरे बच्चे पर मातृत्व अवकाश का कोई प्रावधान नहीं है।

मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता की पहली शादी से दो बच्चे हैं, जिनमें से एक गंभीर बीमारी से जूझ रहा है। बाद में उनका तलाक हो गया और उन्होंने दूसरी शादी की। दूसरे पति की पहली पत्नी और उनका एकमात्र बच्चा सड़क हादसे में निधन हो चुका था। ऐसे में याचिकाकर्ता का यह तीसरा बच्चा वास्तव में दूसरे पति से उनका पहला जैविक बच्चा है।

याचिकाकर्ता वर्तमान में 43 वर्ष की आयु की टीजीटी शिक्षक हैं और परिस्थितियों के मद्देनज़र अपने दूसरे पति के एकमात्र जैविक बच्चे के जन्म एवं पालन-पोषण के लिए मातृत्व अवकाश आवश्यक था।

अदालत ने इस पूरे प्रकरण को अनुराधा बनाम हिमाचल प्रदेश मामले के रूप में सुनते हुए स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों का निर्णय केवल नियमों के आधार पर नहीं, बल्कि भारतीय संविधान में निहित महिलाओं के मौलिक अधिकारों और उनकी गरिमा को ध्यान में रखते हुए होना चाहिए।

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